Sunday, July 26, 2026
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LIC Loan Dispute: मेरी पॉलिसी पर फर्जी लोन किसने लिया?…पॉलिसीधारक को हर हाल में जवाब दें, LIC से जुड़े केस को बड़े ध्यान से पढ़ें, सबके लिए जरूरी

LIC Loan Dispute: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को एक कड़ा निर्देश जारी किया।

यह मामला एक पॉलिसीधारक की ₹50 लाख की बीमा पॉलिसी से जुड़ा है। जब पॉलिसी मैच्योर हुई, तो LIC ने उसे बताया कि उसकी पॉलिसी पर दो बड़े लोन लिए गए हैं, जबकि आवेदक का दावा है कि उसने इसके लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था। CIC ने LIC को उस पॉलिसीधारक को जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है, जिसने दावा किया है कि उसकी पॉलिसी पर उसकी जानकारी के बिना फर्जी लोन लिए गए हैं।

क्या है पूरा विवाद? (The Fraud Allegation)

  • पॉलिसी की वैल्यू: पॉलिसी की मैच्योरिटी वैल्यू लगभग ₹81.7 लाख थी।
  • विवादित लोन: LIC के रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2007 में ₹10.45 लाख और फिर ₹15.89 लाख के दो लोन लिए गए थे।
  • आवेदक का दावा: पॉलिसीधारक का कहना है कि उसने ये लोन कभी नहीं लिए। उसने आरोप लगाया कि एक LIC एजेंट और कुछ अन्य लोगों ने उसकी जानकारी के बिना उसके नाम पर एक जॉइंट बैंक अकाउंट खोला और लोन की रकम वहां ट्रांसफर कर हड़प ली।
  • नुकसान: इन फर्जी लोनों और उन पर लगे ब्याज को काटने के बाद, LIC ने मैच्योरिटी राशि को घटाकर केवल ₹36.67 लाख कर दिया।

LIC ने जानकारी देने से क्यों मना किया?

LIC ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(h) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था। LIC का तर्क था कि यह मामला उपभोक्ता अदालत (Consumer Forum) में लंबित है। इस मामले में दो FIR दर्ज हैं, इसलिए जानकारी देने से “जांच प्रभावित (Impede Investigation)” हो सकती है।

CIC का फैसला और फटकार

  • सूचना आयोग ने LIC के तर्कों को खारिज करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं।
  • जांच में बाधा का सबूत नहीं: आयोग ने पाया कि LIC यह साबित करने में विफल रहा कि जानकारी साझा करने से जांच कैसे बाधित होगी।
  • कोई अदालती रोक नहीं: सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि किसी भी अदालत ने जानकारी देने पर कोई रोक (Stay) नहीं लगाई है।
  • पॉलिसीधारक का अधिकार: चूंकि जानकारी आवेदक की अपनी पॉलिसी और लोन से जुड़ी है, इसलिए उसे यह जानने का पूरा हक है।

आयोग का निर्देश (The Order)

केंद्रीय सूचना आयोग ने 8 अप्रैल, 2026 (सुनवाई के बाद) निर्देश दिया कि LIC अपने जवाब की समीक्षा करे और सभी उपलब्ध जानकारी आवेदक को प्रदान करे। LIC ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, जिस पर आयोग ने उन्हें दोबारा रिकॉर्ड खंगालने और संशोधित जवाब (Revised Reply) देने को कहा है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
संबंधित संस्थानभारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)।
विवादित रकमलगभग ₹26.34 लाख के दो कथित फर्जी लोन।
आरोपजाली हस्ताक्षरों के जरिए जॉइंट अकाउंट खोलकर धोखाधड़ी।
कानूनी स्थितिRTI की धारा 8(1)(h) के तहत सूचना छिपाने की कोशिश विफल।

ग्राहकों की सुरक्षा और पारदर्शिता

यह आदेश उन लाखों पॉलिसीधारकों के लिए एक बड़ी जीत है जो अक्सर बड़ी कंपनियों के प्रशासनिक तंत्र के सामने खुद को असहाय पाते हैं। CIC ने साफ कर दिया है कि केवल मामला अदालत में है, कह देना जानकारी छिपाने का वैध आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब मामला खुद आवेदक के अपने वित्तीय हितों से जुड़ा हो।

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