Thursday, October 29, 2026
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Licensed Liquor Outlets: चर्च के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों की नैतिक आपत्ति कानूनी शराब की दुकान को बंद नहीं करा सकती..पढ़ें विरोध की कहानी

केस मैट्रिक्स: Meghalaya High Court Order on Licensed Liquor Outlets

पहलूविवरण
संबंधित अदालतमेघालय उच्च न्यायालय (Meghalaya High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस एच. एस. थंगख्यू (Justice HS Thangkhiew)
स्थानदानाकग्रे, वेस्ट गारो हिल्स (Danakgre, West Garo Hills, Meghalaya)
मुख्य सिद्धांतनैतिक आपत्तियां वैध लाइसेंस को रद्द नहीं कर सकतीं; कानून का पालन सर्वोपरि है।
दूरी का नियमपूजा स्थल/स्कूलों से 200 मीटर से अधिक की दूरी पाई गई।

Licensed Liquor Outlets: मेघालय उच्च न्यायालय (Meghalaya High Court) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि चर्च के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों की केवल ‘नैतिक आपत्ति’ (Moral Objection) किसी ऐसे वैध शराब ठेके को बंद करने या रोकने का आधार नहीं बन सकती जो राज्य के आबकारी नियमों (Excise Rules) का पूरी तरह से पालन करता है।

जस्टिस एच. एस. थंगख्यू (Justice HS Thangkhiew) की पीठ ने वेस्ट गारो हिल्स जिले के दानाकग्रे (Danakgre) में स्थित भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की दुकान के मालिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

मामला क्या था?: लाइसेंस और शिफ्टिंग के बाद स्थानीय विरोध

  1. संवैधानिक व कानूनी प्रक्रिया पूरी: याचिकाकर्ता महिला ने जेंगजाल मार्केट से अपनी दुकान दानाकग्रे शिफ्ट करने के लिए स्थानीय नोकमा (Nokma – गांव के प्रधान) से एनओसी (NOC) प्राप्त की थी और जनवरी 2025 में आबकारी विभाग से वैध अनुमति व लाइसेंस हासिल किया था।
  2. दुकान बंद करने का निर्देश: हालांकि, स्थानीय चर्च के नेताओं और एक विकास समिति की आपत्तियों के बाद आबकारी अधीक्षक (Superintendent of Excise) ने दुकान बंद करने के मौखिक/लिखित निर्देश जारी कर दिए, जिसके खिलाफ दुकान मालिक ने हाई कोर्ट का रुख किया।
  3. सरकारी जांच में नियमों का पालन: कोर्ट ने नोट किया कि आधिकारिक जांच रिपोर्ट में पाया गया कि दुकान मेघालय आबकारी अधिनियम और नियमों के तहत पूजा स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों से निर्धारित 200 मीटर की अनिवार्य दूरी से काफी बाहर स्थित है।

मेघालय हाई कोर्ट की मुख्य कानूनी टिप्पणियां

अदालत ने धर्मशास्त्र या नैतिकता के आधार पर कानूनी अधिकारों को रोकने की कोशिश पर कड़ा रुख अपनाया।

मेघालय हाई कोर्ट (जस्टिस एच. एस. थंगख्यू) का निर्णय: प्रतिवादियों द्वारा उठाई गई आपत्तियां केवल ‘नैतिक आधारों’ पर आधारित हैं, न कि किसी कानूनी या ठोस आधार पर जो लाइसेंस रद्द करने या दुकान को संचालित होने से रोकने को सही ठहरा सके… यद्यपि शराब का व्यापार करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन जब कानून के अनुसार एक बार लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो यह एक कानूनी अधिकार (Legal Right) का सृजन करता है जिसे केवल कानून की उचित प्रक्रिया द्वारा ही वापस लिया जा सकता है।

अवैध शराब (Bootlegging) और कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी

  • पास में ही अन्य बार संचालित: अदालत ने सरकारी रिपोर्टों का हवाला देते हुए नोट किया कि याचिकाकर्ता की दुकान से महज 105 मीटर की दूरी पर पहले से ही एक अन्य लाइसेंस प्राप्त रेस्टोरेंट-कम-बार चल रहा था।
  • अवैध बिक्री पर रोक: कोर्ट ने कहा कि इलाके में अवैध शराब की बिक्री (Bootlegging) काफी ज्यादा थी, और एक वैध/कानूनी रिटेल आउटलेट की मौजूदगी से अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

अंतिम आदेश

हाई कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता का लाइसेंस और अनुमति पूरी तरह से वैध है और आपत्तियों में कोई कानूनी मेरिट नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नए स्थान पर शराब की दुकान चलाने की तत्काल अनुमति दी जाए।

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