केस मैट्रिक्स: Supreme Court Decision on National Emblem Installation
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ |
| याचिकाकर्ता | बदरावाड़ा वेणुगोपाल (उर्फ ‘बाबा खतरनाक’) |
| मुख्य मांग | सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर अशोक चक्र लगाने का निर्देश |
| अदालत का निर्णय | याचिका खारिज; परिसर का रखरखाव व प्रतीक लगाना प्रशासनिक विषय है। |
National Emblem Installation: सुप्रीम कोर्ट की इमारत के मुख्य गुंबद और गेट पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र (Ashok Chakra) स्थापित करने से जुड़ी एक याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि शीर्ष अदालत के परिसर में क्या लगाया जाना है, इसका फैसला अदालत खुद अपने प्रशासनिक स्तर पर करेगी।
यह याचिका याचिकाकर्ता-इन-पर्सन बदरावाड़ा वेणुगोपाल (उर्फ ‘बाबा खतरनाक’) द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने अदालतों की “संवैधानिक पहचान” का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर अशोक चक्र लगाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कीं, तो मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे खारिज करते हुए टिप्पणी की।
CJI सूर्यकांत का वक्तव्य: “Supreme Court ke gate pe kya lagana hai hum dekh lenge… aap duniya mein itni samasyaein hai unka dhyan rakhiye. (सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है, वह हम देख लेंगे… दुनिया में इतनी समस्याएं हैं, आप उन पर ध्यान दीजिए।)“
याचिका का प्रशासनिक व कानूनी इतिहास
- मार्च 2026 का पिछला आदेश: याचिकाकर्ता वेणुगोपाल ने इससे पहले संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर की थी। 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका का निस्तारण करते हुए कहा था कि यह मामला पूरी तरह से प्रशासनिक (Administrative Domain) स्तर का है। कोर्ट ने सचिव जनरल (Secretary General) को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नोट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
- रजिस्ट्रार का आदेश और अपील: इसके बाद, याचिकाकर्ता ने 23 मार्च के प्रशासनिक निर्देशों के कार्यान्वयन और प्रगति (Status Report) की मांग करते हुए एक अर्जी दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के तहत उस अर्जी को लॉज (निरस्त) कर दिया।
- हाई कोर्ट/SC में अपील: रजिस्ट्रार के इसी आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अपील दायर की थी, जिसे मंगलवार को CJI पीठ ने सुनवाई के योग्य न मानते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया।
फैसले का मुख्य कानूनी पहलू
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के भवन, परिसर या मुख्य द्वारों पर किसी भी प्रतीक या चिह्न को लगाने या न लगाने से जुड़े निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र (Administrative Domain) में आते हैं, और इसके लिए कोई जनहित याचिका या न्यायिक निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

