Thursday, October 29, 2026
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RTI Rules: आरटीआई के तहत आवेदक को सीधे नहीं दी जा सकती सीसीटीवी फुटेज; आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(g) का निर्देश पढ़ें

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी व्याख्या

  • RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) का हवाला: अदालत ने कहा कि बिना किसी औपचारिक अदालती शिकायत के सीधे फुटेज मांगना कानून के अनुकूल नहीं है:“याचिकाकर्ता ने आज तक किसी भी अदालत या आयोग के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है और सीधे तौर पर CCTV फुटेज मांगी है। हमारी राय में, यह फुटेज याचिकाकर्ता को सीधे प्रदान नहीं की जा सकती क्योंकि यह 2005 अधिनियम की धारा 8(1)(g) में समाहित अपवाद के अंतर्गत आती है।” — इलाहाबाद हाईकोर्ट
  • अदालत और आयोग का अधिकार क्षेत्र: पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों और आयोगों को यह अधिकार दिया है कि वे आवश्यकता पड़ने पर सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और मंगाने का आदेश दे सकें। यदि याचिकाकर्ता संबंधित फोरम या कोर्ट में कोई औपचारिक मामला दर्ज कराता है, तो वह संस्था फुटेज तलब कर सकती है।

RTI अधिनियम के तहत छूट की श्रेणियां (Section 8 Exceptions)

RTI अधिनियम, 2005 की धारा 8 के तहत सार्वजनिक प्राधिकारियों को निम्नलिखित जानकारी साझा न करने की छूट प्राप्त है:

  • सुरक्षा व संप्रभुता: देश की सुरक्षा, संप्रभुता या विदेशी संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली जानकारी।
  • व्यक्तिगत सुरक्षा (Section 8(1)(g)): ऐसी जानकारी जिससे किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरा हो या जांच की प्रक्रिया बाधित हो।
  • गोपनीयता व विशेषाधिकार: अदालत द्वारा प्रतिबंधित जानकारी, कैबिनेट पेपर (अंतिम निर्णय से पहले), और व्यावसायिक गोपनीयता (Trade Secrets)।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत सीसीटीवी फुटेज के प्रकटीकरण और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी वैधानिक छूटों पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत प्रतिपादित किया है।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग (UPSIC) द्वारा आरटीआई में सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार करने के आदेश के खिलाफ दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरटीआई कानून के तहत कोई भी नागरिक सीधे तौर पर सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि यह धारा 8(1)(g) के तहत सुरक्षा व जीवन को खतरे के आधार पर छूट (Exemption) के दायरे में आती है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. धारा 8(1)(g) के तहत सुरक्षा छूट सीसीटीवी फुटेज की संवेदनशील प्रकृति और वैधानिक प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए खंडपीठ ने 1 सितंबर 2026 के अपने आदेश में कहा: “हमारी राय में, याचिकाकर्ता ने आज तक किसी भी अदालत या आयोग के समक्ष कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है और केवल सीधे तौर पर सीसीटीवी फुटेज की मांग की है। हमारे विचार से, उक्त फुटेज याचिकाकर्ता को सीधे उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, क्योंकि यह आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(g) में निहित अपवाद के अंतर्गत आती है।”

2. अदालत या सक्षम आयोग के माध्यम से ही फुटेज तलब करने का अधिकार

  • अदालत ने स्वीकार किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सक्षम अदालतों या सांविधिक आयोगों (जैसे मानवाधिकार आयोग या सतर्कता आयोग) को सीसीटीवी फुटेज संरक्षित (Preserve) कराने और उसे तलब करने का पूर्ण अधिकार है।
  • हालांकि, यदि किसी व्यक्ति ने संबंधित सक्षम फोरम के समक्ष कोई औपचारिक कानूनी शिकायत दाखिल की है, तो वह अदालत या फोरम आरोपों की जांच हेतु फुटेज को सुरक्षित रखने और मंगाने का निर्देश दे सकता है—लेकिन आरटीआई के माध्यम से व्यक्ति को सीधे निजी हाथ में कॉपी नहीं दी जा सकती।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि

  • विवाद की उत्पत्ति: याचिकाकर्ता ने आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत एक सार्वजनिक प्रतिष्ठान/विभाग से सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की थी।
  • सूचना आयोग का रुख: उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करते हुए माना कि सीसीटीवी फुटेज में संवेदनशील दृश्य, सुरक्षा विन्यास और अन्य व्यक्तियों की उपस्थिति शामिल होती है, जिसे आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
  • हाईकोर्ट में चुनौती: याचिकाकर्ता ने सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया और दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज का संरक्षण और प्राप्ति उसका कानूनी अधिकार है।

आरटीआई कानून की धारा 8 के तहत छूट का ढांचा

अदालत ने रेखांकित किया कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8 सार्वजनिक प्राधिकरणों को निम्नलिखित संवेदनशील जानकारियां प्रकट करने से छूट प्रदान करती है:

  • धारा 8(1)(g): ऐसी जानकारी जिसका प्रकटीकरण किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाले अथवा कानून प्रवर्तन व सुरक्षा उद्देश्यों के लिए दी गई सहायता/स्रोतों की पहचान उजागर करे।
  • धारा 8(1)(h) व 8(1)(j): जांच प्रक्रिया में बाधा डालने वाली जानकारी और किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत निजता (Privacy) का अनुचित हनन करने वाली सूचनाएं।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

  1. याचिका का निस्तारण: उच्च न्यायालय ने राज्य सूचना आयोग के आदेश में किसी भी प्रकार की विधिक त्रुटि न पाते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
  2. सक्षम फोरम में जाने की छूट: अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता किसी उचित फोरम या अदालत में मूल विवाद को लेकर औपचारिक परिवाद दर्ज कराता है, तो वह संबंधित फोरम सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और साक्ष्य के रूप में मंगाने का उचित आदेश पारित कर सकेगा।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: सिविल रिट याचिका (राज्य सूचना आयोग के आदेश और आरटीआई में सीसीटीवी प्रकटीकरण को चुनौती)
  • प्रासंगिक कानून: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) की धारा 8(1)(g), धारा 8(1)(j) एवं धारा 19
  • पीठ: न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (इलाहाबाद उच्च न्यायालय)

RTI Rules:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ व न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी
संबंधित कानूनसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act – Section 8(1)(g))
मुख्य मुद्दाक्या कोई नागरिक आरटीआई (RTI) आवेदन के जरिए सीधे CCTV फुटेज प्राप्त कर सकता है?
अदालत का फैसलासीधे फुटेज नहीं दी जा सकती; केवल सक्षम अदालत या आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज होने पर ही इसे सुरक्षित या तलब किया जा सकता है।
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