Thursday, October 15, 2026
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Sultanpur Bar Association: सुल्तानपुर बार एसोसिएशन चुनाव…महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य; प्रमुख पदों के लिए रोटेशन प्रणाली तय

मामले के मुख्य बिंदु और हाईकोर्ट के कड़े रुख

  • कम महिला सदस्यों का तर्क खारिज: बार एसोसिएशन के एक सदस्य ने तर्क दिया कि 2,028 सदस्यों में से केवल 41 महिला अधिवक्ता हैं, इसलिए 30% आरक्षण व्यावहारिक नहीं है। पीठ ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का अनुच्छेद 142 के तहत आदेश बाध्यकारी (Article 144) है और हाईकोर्ट इस प्रतिशत को कम नहीं कर सकता।
  • चुनाव प्रक्रिया और समयसीमा: अदालत ने एल्डर्स कमेटी (Elders’ Committee) को चुनाव की कमान सौंपी है और निर्देश दिया है कि 3 दिनों के भीतर संशोधित चुनाव कार्यक्रम जारी कर 3 सप्ताह के भीतर चुनाव संपन्न कराएं। निवर्तमान पदाधिकारियों के हस्तक्षेप को अवमानना (Contempt) माना जाएगा।
  • आपराधिक मामलों का प्रकटीकरण (Criminal Disclosure): चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को अपने खिलाफ दर्ज FIR या लंबित/निपटारे हो चुके आपराधिक मुकदमों का पूरा विवरण नामांकन पत्र में देना होगा। जानकारी छिपाने पर उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।

लखनऊ/प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुल्तानपुर बार एसोसिएशन को अपनी कार्यकारी समिति (Executive Committee) और गवर्निंग काउंसिल में महिला अधिवक्ताओं के लिए 30% आरक्षण तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख पदों (अध्यक्ष, महासचिव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष आदि) को क्रमिक चुनावों में रोटेशन (Rotational Basis) के आधार पर आरक्षित किया जाएगा।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मनजीवे शुक्ला की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (दीक्षा एन. अमृतेश बनाम कर्नाटक राज्य) के अनुपालन को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनिवार्य अनुपालन पर पीठ ने कहा: “सुप्रीम कोर्ट द्वारा संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जारी किए गए निर्देश सभी बार एसोसिएशनों पर पूरी तरह बाध्यकारी हैं। आरक्षण देना या न देना बार एसोसिएशन का कोई व्यक्तिगत विकल्प (Choice) नहीं है। महिलाओं के लिए यह 30% आरक्षण ‘अक्रॉस द बोर्ड’ यानी सभी स्तरों और पदों पर समग्र रूप से लागू होना चाहिए।”

महिला सदस्यों की कम संख्या का तर्क खारिज करते हुए अदालत ने कहा: “यह तर्क कि 2,028 सदस्यों में से केवल 41 महिला सदस्य हैं, इसलिए 30% आरक्षण उचित नहीं है, पूरी तरह अस्वीकार्य है। हम संविधान के अनुच्छेद 144 के तहत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए बाध्य हैं और हम आरक्षण के प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं कर सकते।”

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प्रमुख पदों के लिए रोटेशन व्यवस्था (Rotation Formula)

सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की 16 सदस्यीय कार्यकारी परिषद में से 5 पद (लगभग 30%) महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। अदालत ने इसके लिए वर्षवार रोटेशन चार्ट निर्धारित किया है:

  • कोषाध्यक्ष (Treasurer): वर्ष 2026, 2029, 2032 और आगे इसी चक्र में महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित रहेगा।
  • महासचिव (General Secretary): वर्ष 2027, 2030, 2033 और आगे इसी क्रम में रोटेशन के तहत आरक्षित होगा।
  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष (Senior Vice President): वर्ष 2027, 2030 और आगे के चुनावों में महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित रहेगा।
  • अध्यक्ष (President): वर्ष 2028, 2031, 2034 और आगे इसी चक्र में रोटेशन के तहत आरक्षित रहेगा।
  • संयुक्त सचिव (Joint Secretary – कुल 3 पद): 1 पद हमेशा महिला के लिए रोटेशन पर रहेगा—
    • 2026: संयुक्त सचिव (प्रशासन)
    • 2027: संयुक्त सचिव (पुस्तकालय)
    • 2028: संयुक्त सचिव (क्लब)
  • कार्यकारी सदस्य (Executive Members): 4 सीनियर गवर्निंग काउंसिल और 4 जूनियर गवर्निंग काउंसिल पदों में से 1-1 पद स्थायी रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा।

चुनाव प्रक्रिया और एल्डर्स कमेटी को निर्देश

  1. एल्डर्स कमेटी संभालेगी कमान: अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव कराने की पूरी जिम्मेदारी अब ‘एल्डर्स कमेटी’ (Elders’ Committee) के अधीन है। निवर्तमान पदाधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को ‘अदालत की अवमानना’ माना जाएगा।
  2. समय-सीमा: एल्डर्स कमेटी को 3 दिनों के भीतर नया चुनाव कार्यक्रम जारी करने और कार्यक्रम जारी होने के 3 सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया गया है।
  3. आपराधिक मामलों का खुलासा अनिवार्य: चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों के लिए अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों/एफआईआर (चाहे लंबित हों या निस्तारित) का पूरा ब्योरा नामांकन फॉर्म में घोषित करना अनिवार्य कर दिया गया है। किसी भी तथ्य को छिपाने पर उम्मीदवारी या चुनाव रद्द किया जा सकेगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने कहा: “बार एसोसिएशनों में महिलाओं का 30% आरक्षण कोई विकल्प या स्वेच्छा का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के तहत बाध्यकारी कानूनी दायित्व (Article 141 & 144) है। सभी प्रमुख पदों पर महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर आरक्षण की यह रोटेशनल व्यवस्था आवश्यक है।”

Sultanpur Bar Association:एट ए ग्लान्स (At a Glance of Orders)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
पीठासीन पीठन्यायमूर्ति राजन राय एवं न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट का संदर्भदीक्षा एन. अमृतेश बनाम कर्नाटक राज्य (अनुच्छेद 142 के तहत 30% आरक्षण निर्देश)
आरक्षण संरचनाकुल 16 में से 5 पद (30%) महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित
मुख्य निर्देशप्रमुख पदों का वर्षवार रोटेशन तय; एल्डर्स कमेटी को 3 सप्ताह में चुनाव कराने के निर्देश; अपराधियों के ब्योरे का खुलासा अनिवार्य
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