Tuesday, June 30, 2026
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MACT Case: रिंग रोड पर तेज गति से गाड़ी चलाना लापरवाही नहीं…क्योंकि यह सड़क ही तेज रफ्तार सफर के लिए बनी है, ISRO वैज्ञानिक का केस जानिए

MACT Case: मद्रास हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों में ‘कंट्रीब्यूटरी नेग्लिजेंस’ (सहभागितापूर्ण लापरवाही) के सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए बेहद व्यावहारिक फैसला सुनाया है।

टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज

हाईकोर्ट जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस के. राजशेखर की खंडपीठ ने टाटा एआईजी बनाम पी. अम्मू मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा,”आउटर रिंग रोड जैसी एक्सप्रेसवे सड़कों पर, जो विशेष रूप से तेज गति से यात्रा करने के लिए बनाई गई हैं, वाहनों को तेज रफ्तार में चलाना अपने आप में लापरवाही (Negligence) नहीं माना जा सकता। यदि ऐसी सड़कों पर कोई वाहन बहुत धीमा चलता है, तो वह सामान्य यातायात को बाधित करता है और दुर्घटना का कारण बन सकता है। अदालत ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी (Tata AIG General Insurance Company) की अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए एक सड़क दुर्घटना में मारे गए इसरो (ISRO) वैज्ञानिक के परिवार को ₹2.92 करोड़ का मुआवजा देने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।

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मामला क्या है?: इसरो वैज्ञानिक की सड़क हादसे में मौत

यह दुखद मामला विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC/ISRO), तिरुवनंतपुरम में कार्यरत वैज्ञानिक आरएसपी पुगलेंथी (RSP Pugazhenthi) की मौत से जुड़ा है।

हादसे का विवरण: 31 दिसंबर, 2019 को वैज्ञानिक पुगलेंथी मिंजुर-वंडालूर बाईपास आउटर रिंग रोड पर अपना दोपहिया वाहन (Two-wheeler) चला रहे थे। इसी दौरान मोरे ओवरब्रिज के पास उन्होंने सड़क के बाईं ओर खड़ी एक ‘टाटा एस’ (Tata Ace) मालवाहक गाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

सड़क पर खड़ी थी गाड़ी: जिस टाटा एस गाड़ी को टक्कर लगी, उसे बिना किसी संकेतक (Indicator) या चेतावनी लाइट के सड़क के किनारे पार्क किया गया था।

ट्रिब्यूनल का फैसला: तिरुवल्लूर के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने माना कि दुर्घटना तेज रफ्तार सफर वाली सड़क पर लापरवाही से गाड़ी पार्क करने के कारण हुई और पीड़ित परिवार (पत्नी, नाबालिग बेटे और मां) को ₹2.92 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया।

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बीमा कंपनी का तर्क बनाम हाई कोर्ट का रुख

बीमा कंपनी टाटा एआईजी ने मुआवजे की राशि को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि चूंकि वैज्ञानिक ने खड़ी गाड़ी में पीछे से टक्कर मारी, इसलिए वे खुद भी ‘तेज गति’ से गाड़ी चलाने के दोषी थे। कंपनी ने उनके खिलाफ ‘कंट्रीब्यूटरी नेग्लिजेंस’ (यानी दुर्घटना में मृतक की भी गलती होना) तय करने और मुआवजे की राशि कम करने की मांग की। हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी के इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया और निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

रिंग रोड का उद्देश्य ही तेज रफ्तार है: खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना आउटर रिंग रोड पर हुई, जहां सभी वाहन स्वाभाविक रूप से तेज गति से चलते हैं। कोर्ट ने कहा, यह सच है कि कम गति से आने वाला कोई भी वाहन दुर्घटना से बच सकता है। हालांकि, जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, वह स्थान तेज गति से यात्रा करने के लिए ही बना था। रिंग रोड में प्रवेश करने वाले सभी वाहन तेज गति से चलते हैं। यदि कोई वाहन वहां धीमा चलता है, तो वह नियमित यातायात को बाधित करेगा।

गलत पार्किंग ही दुर्घटना की जड़: कोर्ट ने पाया कि टाटा एस गाड़ी उस ट्रैक पर खड़ी थी जो आमतौर पर दोपहिया वाहनों के लिए इस्तेमाल होता है। साथ ही, वह एक ऊंचे ऊंचे पुल (Elevated road) के प्रवेश बिंदु पर खड़ी थी, जहां पीछे से आने वाले वाहनों के लिए दृश्यता (Visibility) बहुत कम होती है। इसलिए, हादसे का मूल कारण वैज्ञानिक की गति नहीं, बल्कि गाड़ी की अवैध पार्किंग थी।

पुलिस जांच का समर्थन: अदालत ने यह भी नोट किया कि स्थानीय पुलिस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट (Charge sheet) मालवाहक गाड़ी के ड्राइवर के खिलाफ ही दर्ज की थी, जिससे यह साफ होता है कि गलती किसकी थी।

चूंकि बीमा कंपनी ने मुआवजे की कुल रकम (Quantum) पर कोई कानूनी सवाल नहीं उठाया था, इसलिए हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए ₹2.92 करोड़ के मुआवजे की पुष्टि की और कंपनी की अपील को खारिज (Dismiss) कर दिया।

केस मैट्रिक्स: मद्रास हाई कोर्ट का फैसला (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांमद्रास उच्च न्यायालय का फैसला (2026)
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय (चेन्नई पीठ)
माननीय खंडपीठजस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस के. राजशेखर
केस का नामटाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी बनाम पी. अम्मू व अन्य
पीड़ित/मृतकआरएसपी पुगलेंथी (वैज्ञानिक, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र – ISRO)
मुआवजे की राशि₹2.92 करोड़ (बहाल रखी गई)
मुख्य विधिक सिद्धांतहाई-स्पीड या एक्सप्रेसवे सड़कों पर निर्धारित तेज गति से चलना लापरवाही नहीं है; ऐसी सड़कों पर बिना किसी संकेतक के गाड़ी खड़ी करना ‘पूर्ण लापरवाही’ माना जाएगा।
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