Tuesday, September 1, 2026
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Mirror Account: को-ऑपरेटिव बैंकों के ‘मिरर अकाउंट’ फ्रीज…यह कानूनी जवाब-कुछ धोखेबाजों की वजह से पूरा बैंक ठप, यह काफी चिंता का विषय

Mirror Account: केरल के सहकारी बैंकों (Co-operative Banks) को साइबर अपराधों की जांच के दौरान होने वाली व्यावहारिक और गंभीर दिक्कतों पर केरल हाईकोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

ऑनलाइन फ्रॉड (Cyber Fraud) कुछ मुट्ठी भर शातिर ग्राहक करते हैं: अदालत

हाईकोर्ट के जस्टिस एम.ए. अब्दुल हकीम की एकल पीठ ने थलाक्कड़ सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बनाम भारत संघ व अन्य मामले की सुनवाई करते हुए इस विसंगति को दूर करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा, ऑनलाइन फ्रॉड (Cyber Fraud) कुछ मुट्ठी भर शातिर ग्राहक करते हैं, और पैसे निकालकर रफूचक्कर हो जाते हैं। लेकिन जांच एजेंसियां उन जालसाजों को पकड़ने के बजाय को-ऑपरेटिव बैंकों के उस पूरे ‘मिरर अकाउंट’ (Mirror Account) को ही फ्रीज कर देती हैं जिससे हजारों निर्दोष ग्राहकों का लेनदेन जुड़ा होता है। यह व्यवस्था न केवल सहकारी बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि पूरी न्याय प्रणाली और बैंकिंग डिजिटल ढांचे के लिए एक गंभीर संकट खड़ी कर रही है।

मामला क्या है?: ‘मिरर अकाउंट’ फ्रीज होने से मची अफरा-तफरी

यह कानूनी विवाद थलाक्कड़ सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड द्वारा दायर की गई एक याचिका से उपजा है।

क्या होता है मिरर अकाउंट (Mirror/Pool Account)?: सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक अपने ग्राहकों को ऑनलाइन लेनदेन (जैसे NEFT, RTGS, IMPS और UPI) की सुविधा देने के लिए किसी बड़े अनुसूचित कमर्शियल बैंक (जैसे इस मामले में ICICI बैंक) के साथ एक साझा सेटलमेंट अकाउंट रखते हैं। इसे ‘मिरर या पूल अकाउंट’ कहा जाता है। यह खाता बैंक के सभी ग्राहकों के डिजिटल लेनदेन के लिए एक कॉमन गेटवे (Gateway) की तरह काम करता है।

विवाद की जड़: जब को-ऑपरेटिव बैंक के किसी एक या दो खाताधारकों पर साइबर धोखाधड़ी का शक होता है, तो जांच एजेंसियां (पुलिस/साइबर सेल) उस विशिष्ट संदिग्ध खाते को ब्लॉक करने के बजाय कमर्शियल बैंक में मौजूद को-ऑपरेटिव बैंक के पूरे ‘मिरर अकाउंट’ पर ही ‘फ्रीज’ या ‘लियन’ (Lien – लेनदेन पर रोक) लगा देती हैं।

बैंक का नुकसान: इस कार्रवाई के कारण बैंक के हजारों निर्दोष ग्राहकों की ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं अचानक ठप हो जाती हैं। याचिकाकर्ता बैंक ने बताया कि उसके खाते से ₹32.45 लाख के संदिग्ध लेन-देन हुए थे, जिनमें से ₹11.57 लाख की राशि चार संदिग्ध खाताधारकों के खातों में ट्रेस की गई थी। बैंक ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: असली गुनहगार फरार, बैंक भुगत रहे सजा

जस्टिस एम.ए. अब्दुल हकीम ने इस प्रशासनिक और तकनीकी ढिलाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, अधिकारी देरी करते हैं, धोखेबाज पैसे निकाल लेते हैं: कोर्ट ने माना कि जब तक पुलिस या साइबर सेल धोखाधड़ी करने वाले असली अपराधियों की पहचान करती है और बैंक को विवरण भेजती है, तब तक वे शातिर अपराधी अपने खातों से पूरा पैसा निकालकर रफूचक्कर हो चुके होते हैं। अंत में केवल सहकारी बैंक ही इस फ्रीजिंग की मार झेलने के लिए अकेला बच जाता है।

संगठित अपराध (Organised Crime) के तहत एफआईआर का आदेश: हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित संगठित अपराध है। कोर्ट ने मलप्पुरम जिले की तिरूर पुलिस को आदेश दिया कि वे इन चारों संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account – दूसरों के पैसे ट्रांसफर करने के लिए किराए पर लिए गए खाते) धारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करें।

अंतरिम राहत: ICICI बैंक को बिना नोटिस पैसे ट्रांसफर करने पर रोक

अदालत ने को-ऑपरेटिव बैंक को वित्तीय रूप से टूटने से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है।

एडवांस नोटिस अनिवार्य: कोर्ट ने ICICI बैंक को सख्त निर्देश दिया है कि वह थलाक्कड़ को-ऑपरेटिव बैंक को पूर्व सूचना (Advance Notice) दिए बिना उनके मिरर अकाउंट से किसी भी प्रकार की राशि का ट्रांसफर या कटौती नहीं करेगा।

अंतरिम आदेश का विस्तार: आज की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस सुरक्षात्मक अंतरिम आदेश को अगले दो महीनों के लिए बढ़ा दिया है और मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 तय की है।

विधिक केस शीट: केरल हाई कोर्ट बनाम साइबर सेल (मिरर अकाउंट फ्रीज विवाद)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय, कोच्चि
माननीय न्यायाधीशजस्टिस एम.ए. अब्दुल हकीम
याचिकाकर्ता बैंकथलाक्कड़ सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
प्रतिवादी बैंकICICI बैंक लिमिटेड (जहाँ मिरर अकाउंट मेंटेन था)
लागू नया विधिक प्रावधानभारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 (संगठित अपराध)
अदालत का अंतरिम निर्देशबिना पूर्व नोटिस के मिरर अकाउंट से कोई पैसा ट्रांसफर न किया जाए (18 अगस्त तक विस्तारित)

ल अकाउंट्स के खिलाफ नए कानून BNS की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत कड़ी कार्रवाई करने का आदेश देकर कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि निशाना सीधे अपराधियों पर होना चाहिए, न कि उस बैंकिंग प्रणाली पर जो ग्रामीण भारत और आम नागरिकों की रीढ़ की हड्डी है। यह फैसला राज्य के अन्य को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए भी एक बड़ी राहत लेकर आएगा।

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