Friday, June 12, 2026
HomeHigh CourtMisused to the hilt: प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट पर कानूनी प्रहार…ACP की जेब...

Misused to the hilt: प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट पर कानूनी प्रहार…ACP की जेब से क्यों कटेगी ₹2 लाख मुआवजे की राशि

Misused to the hilt: उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के तहत पुलिस अधिकारियों को मिली मजिस्ट्रेट की शक्तियों के दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।

पुलिस ने शक्तियों का चरम सीमा पर दुरुपयोग किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने आदेश में प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कहा, प्रयागराज कमिश्नरेट में हालात बेहद चौंकाने वाले (Shocking) हैं। पुलिस कमिश्नर और उनके अधीनस्थ अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की जो शक्तियां दी गई हैं, उनका चरम सीमा तक दुरुपयोग (Misused to the hilt) किया जा रहा है और नागरिकों को नियमित रूप से अवैध हिरासत में भेजा जा रहा है।

एक नागरिक को 8 दिनों तक अवैध रूप से जेल में रखा

अदालत ने एक नागरिक को 8 दिनों तक अवैध रूप से जेल में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को ₹2 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि यह मुआवजा ₹25,000 प्रति दिन की दर से तय किया गया है और यह राशि सरकार पीड़ित को देने के बाद दोषी असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP), बारा (प्रयागराज) के वेतन या संपत्ति से वसूल (Recover) करेगी।

मामला क्या था? (शांति भंग की आशंका में सीधे 8 दिन के लिए जेल)

यह मामला याचिकाकर्ता मंसूर अहमद उर्फ लल्लू से जुड़ा है, जिन्हें प्रयागराज की बारा थाना पुलिस ने 19 मार्च 2026 को हिरासत में लिया था।

पुलिस का आरोप: पुलिस का कहना था कि मंसूर अहमद ने पटवारी गांव में कुछ लोगों को अपशब्द कहे थे, जिससे इलाके में शांति भंग होने की आशंका (Breach of Peace) थी। इसलिए एहतियाती तौर पर (Preventive Action) उन्हें हिरासत में लिया गया।

मजिस्ट्रेट के सामने पेशी और खेल: पुलिस ने मंसूर को एसीपी (जो कमिश्नरेट सिस्टम में मजिस्ट्रेट की शक्ति रखते हैं) के सामने पेश किया। पुलिस के मुताबिक, मंसूर जमानत/जमानती (Surety) पेश नहीं कर सके, इसलिए उन्हें ‘न्यायिक अभिरक्षा’ (जेल) भेज दिया गया।

हाई कोर्ट में खुली पोल: पीड़ित के परिवार ने जब हाई कोर्ट में याचिका दायर की, तब 27 मार्च 2026 को उन्हें रिहा किया गया। हाई कोर्ट ने जब कागजात देखे, तो पता चला कि एसीपी ने 19 मार्च को ही मंसूर को सीधे 27 मार्च (8 दिन बाद) तक के लिए जेल भेज दिया था और इसके लिए एक छपे-छपाए प्रोफार्मा (Printed Proforma) का इस्तेमाल किया गया था।

हाई कोर्ट का कानूनी चाबुक: ’24 घंटे से ज्यादा रखने का अधिकार नहीं’

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने नए आपराधिक कानून यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धाराओं का हवाला देते हुए एसीपी के आदेश को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

धारा 170 BNSS का उल्लंघन: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BNSS की धारा 170 (पुराने कानून की धारा 151 CrPC) के तहत एहतियातन हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति को २४ घंटे से अधिक समय तक कस्टडी में नहीं रखा जा सकता।

बॉन्ड भरने का मौका नहीं दिया: एसीपी के आदेश में कहीं भी यह दर्ज नहीं था कि जब मंसूर को पेश किया गया, तो उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए पर्सनल बॉन्ड (व्यक्तिगत बंधपत्र) भरने से इनकार किया था।

अगली तारीख 8 दिन बाद क्यों?: कोर्ट ने कहा कि अगर 19 मार्च 2026 को याचिकाकर्ता जमानती नहीं दे पाया था, तो कानूनन उसे 20 मार्च 2026 को पर्सनल बॉन्ड भरने का मौका दिया जाना चाहिए था। एसीपी ने सीधे ८ दिन बाद की तारीख तय कर दी, जो BNSS की धारा 170, 126 और 135 का सरेआम उल्लंघन है।

विश्लेषण: प्रयागराज कमिश्नरेट के चौंकाने वाले आंकड़े

सुनवाई के दौरान चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM), प्रयागराज द्वारा हाई कोर्ट को सौंपे गए आंकड़ों ने कोर्ट को स्तब्ध कर दिया। इन आंकड़ों से साफ हुआ कि पुलिस कमिश्नरेट में कानून को ताक पर रखकर लोगों को जेल भेजना एक ‘रूटीन’ बन चुका है।

वर्षकानून का उल्लंघन कर अवैध रूप से जेल भेजे गए लोगों की संख्या
2024283 व्यक्ति
20251,321 व्यक्ति
2026 (अब तक)721 व्यक्ति

अदालत ने इन आंकड़ों को देखने के बाद कहा कि मजिस्ट्रेट की शक्तियों का यह दुरुपयोग नागरिकों की स्वतंत्रता (Personal Liberty) पर सीधा हमला है।

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश और समय-सीमा

  • 6 सप्ताह के भीतर मुआवजा: उत्तर प्रदेश सरकार याचिकाकर्ता मंसूर अहमद को 6 हफ्ते के भीतर ₹2 लाख का मुआवजा देगी।
  • 3 महीने के भीतर विभागीय जांच: राज्य सरकार दोषी असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP), बारा के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक जांच शुरू करेगी और मुआवजे की यह रकम उसी अधिकारी से वसूल की जाएगी।
  • अधिवक्ता: इस मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह ने रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता (AAG) अनूप त्रिवेदी और अपर सरकारी अधिवक्ता मोहम्मद शोएब खान पेश हुए।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
35.7 ° C
35.7 °
35.7 °
38 %
7.1kmh
6 %
Fri
36 °
Sat
43 °
Sun
43 °
Mon
44 °
Tue
45 °

Recent Comments