Thursday, September 17, 2026
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Romance Scam: हरियाणा की एक जज साहिबा कैसे टिंडर पर हनीट्रैप में गंवाईं ₹52 लाख…जज के आचरण पर उठाए गंभीर सवाल

Romance Scam: न्याय की कुर्सी पर बैठी हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी (Judicial Officer/जज) खुद ऑनलाइन हनीट्रैप (Honeytrap) और रोमांस स्कैम (Romance Scam) का शिकार हो गईं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की लचर जांच पर तीखी टिप्पणी

राजधानी दिल्ली से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां डेटिंग ऐप टिंडर (Tinder) से शुरू हुए इस खेल में जज साहिबा ने कथित तौर पर ₹52.81 लाख गंवा दिए। इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली की एक अदालत ने मुख्य आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका (Bail Plea) को सिरे से खारिज कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने आदेश पारित करते हुए न केवल आरोपी, बल्कि पीड़ित महिला जज के आचरण और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Special Cell) की लचर जांच पर भी बेहद तीखी टिप्पणियां की हैं।

मामला क्या था? (टिंडर पर ‘सीक्रेट एजेंट’ से प्यार और ₹52 लाख का फ्रॉड)

अदालत के सामने आए अभियोजन पक्ष (Prosecution) के दस्तावेजों के अनुसार, यह पूरा विवाद नवंबर 2025 में शुरू हुआ था।

फर्जी पहचान से दोस्ती: हरियाणा की महिला जज डेटिंग ऐप ‘टिंडर’ पर एक शख्स के संपर्क में आईं, जिसने अपना नाम “अभिमन्यु वशिष्ठ” बताया। आरोपी ने खुद को भारत सरकार के एक ‘सीक्रेट डिपार्टमेंट’ (गुप्त विभाग) का अधिकारी होने का दावा किया।

प्यार के जाल में निवेश का झांसा: दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं, जिसके बाद आरोपी ने जज साहिबा को ऊंचे रिटर्न (High Returns) का लालच देकर अलग-अलग निवेश योजनाओं में पैसे ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया। जज साहिबा ने कुल ₹52.81 लाख आरोपी के खातों में भेज दिए, लेकिन न तो कोई रिटर्न मिला और न ही मूल रकम वापस आई।

खुद के बजाय नौकरानी के नाम पर FIR: जब ठगी का अहसास हुआ, तो लोक-लाज और प्रशासनिक बदनामी के डर से जज साहिबा ने खुद शिकायतकर्ता बनने के बजाय अपने घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका (Maid) दीक्षा देवी को आगे कर दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दीक्षा देवी के नाम पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर आरोपी दीपक वत्स को गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली कोर्ट का तीखा रुख: ‘जज खुद कानून के साथ आंख-मिचौली खेल रही हैं’

जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच की, तो परतें खुलती चली गईं। कोर्ट ने पाया कि ठगी गई पूरी रकम (₹52.81 लाख) किसी नौकरानी के खाते से नहीं, बल्कि सीधे महिला जज के बैंक खातों से ट्रांसफर हुई थी।

जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने पीड़ित महिला न्यायिक अधिकारी के इस रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए अपने आदेश में कहा, “यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक न्यायिक अधिकारी—एक ऐसा व्यक्ति जिसे खुद न्याय देने, कानून के सामने सच्चाई को बनाए रखने और अपनी अदालत में आने वाले हर व्यक्ति से पूर्ण तथ्य (Complete Facts) पेश करने की उम्मीद करने का पवित्र कर्तव्य सौंपा गया है—उसने अदालत के सामने खुद आने के बजाय अपनी मेड (Maid) के नाम का इस्तेमाल करते हुए परोक्ष/टेढ़े रास्ते (Obliquely) से आने का विकल्प चुना।”

अदालत ने आगे कहा कि हम मानते हैं कि ऐसे रोमांस स्कैम का शिकार होने पर व्यक्तिगत शर्मिंदगी (Personal Embarrassment) और मानसिक परेशानी हो सकती है, लेकिन यह असुविधा या सामाजिक डर किसी निष्पक्ष आपराधिक जांच (Fair Investigation) के आड़े नहीं आ सकता।

व्हाट्सएप चैट और ‘हनीट्रैप’ का पुख्ता पैटर्न

सुनवाई के दौरान आरोपी दीपक वत्स के वकीलों ने तर्क दिया कि यह पूरा संबंध आपसी सहमति (Consensual Relationship) से था और पैसों का लेनदेन पूरी तरह स्वैच्छिक था। आरोपी का दावा था कि खुद जज साहिबा ने उसके ऑनलाइन गेमिंग या सट्टेबाजी (Betting) के खातों में पैसे ट्रांसफर करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अदालत ने आरोपी के इस दावे को खारिज कर दिया।

सटीक टाइमिंग: कोर्ट ने जब आरोपी द्वारा पेश की गई व्हाट्सएप चैट का विश्लेषण किया, तो पाया कि व्हाट्सएप चैट पर जैसे ही आरोपी द्वारा पैसों की मांग या पुष्टि की जाती थी, ठीक उसके तुरंत बाद जज साहिबा के खातों से पैसे ट्रांसफर हो जाते थे।

हनीट्रैप की पुष्टि: कोर्ट ने कहा, “वित्तीय लेनदेन का यह पैटर्न व्हाट्सएप कम्युनिकेशंस के साथ इतनी सटीकता और तत्परता से मेल खाता है, जो पूरी तरह से ‘हनीट्रैप’ (Honey Trap) की परिकल्पना की पुष्टि करता है।” यह पूरी तरह से ऑनलाइन रोमांस स्कैम का स्थापित मॉडस ऑपेरंडी (Modus Operandi) है, जिसमें पहले भावनात्मक संबंध बनाए जाते हैं और फिर बार-बार वित्तीय मांगें की जाती हैं।

कोर्ट चपरासी और ₹5 लाख कैश का रहस्य

इस मामले में एक और संदिग्ध मोड़ तब आया जब जांच में ₹5 लाख के नकद (Cash) डिपॉजिट की बात सामने आई। पुलिस के सामने कहानी गढ़ी गई कि यह ₹5 लाख की नकदी घरेलू सहायिका (मेड) की थी। लेकिन कोर्ट ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया, क्योंकि रिकॉर्ड से साफ हुआ कि यह ₹5 लाख कैश बैंक में महिला जज के ‘कोर्ट पीन’ (चपरासी) द्वारा जमा कराए गए थे। कोर्ट ने कहा कि इस कहानी को स्वीकार करना गले नहीं उतरता।

दिल्ली पुलिस की ‘स्पेशल सेल’ को कोर्ट की फटकार

आरोपी की जमानत तो खारिज हो गई, लेकिन कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली पुलिस की जांच के लचर स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने नोट किया कि जांच अधिकारियों ने मामले के बुनियादी डिजिटल साक्ष्य जुटाने की जहमत तक नहीं उठाई। पुलिस ने अभी तक टिंडर (Tinder) के आधिकारिक रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री हासिल नहीं की। दोनों के बीच की पूरी व्हाट्सएप चैट (Complete WhatsApp Data) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को भी पूरी तरह से खंगाला नहीं गया। जिन सट्टेबाजी या वित्तीय संस्थाओं/खातों के जरिए करोड़ों के फंड्स को घुमाया गया (Fund Trail), उनके बारे में भी पुलिस के पास पुख्ता जानकारी गायब थी।

विश्लेषण: इस केस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू

मुख्य विवादित बिंदुकोर्ट की टिप्पणी और कानूनी स्थिति
वास्तविक पीड़ित (Real Victim)एफआईआर भले ही नौकरानी के नाम पर हो, लेकिन असली पीड़ित महिला जज ही हैं क्योंकि सारा पैसा उन्हीं का था।
साक्ष्यों को छिपानाकोर्ट ने महिला जज को निर्देश दिया है कि वे जांचकर्ताओं के सामने व्हाट्सएप चैट, टिंडर रिकॉर्ड्स और पैसों के लेनदेन का पूरा और स्पष्ट विवरण खुद प्रस्तुत करें।
अग्रिम जांच के आदेशजमानत खारिज करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए इस पूरे स्कैम और फंड ट्रेल की गहराई से जांच करनी होगी।

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