MLA Raja Bhaiya: दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को बड़ा झटका दिया है।
विधायक की पत्नी ने घरेलू हिंसा की याचिका दायर की
हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 30 मई 2026 को दिए अपने फैसले में राजा भैया की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सांसदों और विधायकों के लिए बनी राउज एवेन्यू (Rouse Avenue) की विशेष अदालत को घरेलू हिंसा के मामलों की सुनवाई का अधिकार (Jurisdiction) नहीं है। कोर्ट ने उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह द्वारा दायर घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के मामले में राजा भैया को जारी समन को बरकरार रखा है।
पूरा विवाद क्या है? (The Matrimonial Dispute)
मामला: रघुराज प्रताप सिंह और भानवी कुमारी सिंह की शादी को 28 साल हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान में दोनों के बीच दिल्ली की अदालत में एक विवादित तलाक (Contested Divorce) का मामला चल रहा है।
राजा भैया का पक्ष: उन्होंने क्रूरता और परित्याग (Cruelty and Desertion) का हवाला देते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की है।
भानवी सिंह के आरोप: उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह ने उन पर घरेलू दुर्व्यवहार (Domestic Abuse), एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (पारिवारिक रिश्ते से बाहर संबंध) और वित्तीय धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने महिला संरक्षण (घरेलू हिंसा से) अधिनियम (PWDV Act) के तहत मामला दर्ज कराया था।
राउज एवेन्यू विशेष कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर था विवाद
राजा भैया ने दिल्ली हाई कोर्ट में राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) द्वारा जुलाई 2024 में जारी समन को चुनौती दी थी।
दोनों पक्षों की दलीलें और हाई कोर्ट का फैसला
| पक्ष / तर्क | राजा भैया के वकीलों का दावा | दिल्ली हाई कोर्ट की व्यवस्था |
| मामले की प्रकृति | घरेलू हिंसा के तहत मिलने वाले उपचार (Remedies) मुख्य रूप से दीवानी (Civil) प्रकृति के होते हैं, इसलिए यह सांसदों/विधायकों की ‘आपराधिक’ विशेष अदालत के दायरे से बाहर है। | भले ही उपचार दीवानी हों, लेकिन इस कानून में सुरक्षा आदेशों के उल्लंघन पर आपराधिक दंड के प्रावधान हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC/CrPC-based) के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा ही संचालित होती है। |
| सही अदालत (Forum) | यह मामला साकेत (Saket) की क्षेत्रीय पारिवारिक/मजिस्ट्रेट अदालत में चलना चाहिए था। पत्नी ने पहले साकेत से केस वापस लिया और फिर जानबूझकर राउज एवेन्यू में डाला (Forum Shopping)। | सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों के त्वरित और समयबद्ध निपटारे के लिए ही सेंट्रलाइज्ड विशेष अदालतें बनाई गई हैं। इसे सिर्फ इस तकनीकी आधार पर अप्रभावी नहीं किया जा सकता। |
अदालत की मुख्य टिप्पणी: जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने जनप्रतिनिधियों (Elected Representatives) के मामलों पर विशेष अदालतों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, विशेष अदालतों के गठन का मूल उद्देश्य यह था कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामले अनिश्चित काल तक लंबित न रहें और उनका निपटारा समयबद्ध तरीके से हो। यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज और न्याय प्रशासन में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए, राउज एवेन्यू कोर्ट एक सक्षम मजिस्ट्रेट कोर्ट है और वह मौजूदा विधायकों के खिलाफ ऐसी कार्यवाही सुन सकती है।
निष्कर्ष (Takeaway)
इस फैसले के बाद अब राजा भैया को दिल्ली की राउज एवेन्यू विशेष अदालत के समक्ष घरेलू हिंसा के मामले में कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश ने यह कानूनी सिद्धांत भी साफ कर दिया है कि राजनेताओं के मामलों के लिए बनी विशेष अदालतें (MP/MLA Courts) उन पर चल रहे घरेलू हिंसा जैसे अर्ध-दीवानी और अर्ध-आपराधिक मामलों की सुनवाई करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।

