Monday, August 17, 2026
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Mumbai Police: नागरिकों को विरोध का अधिकार है…कोई बीजेपी मुर्दाबाद या अमित शाह मुर्दाबाद के नारे लगाएगा तो क्या आप तड़ीपार करेंगे, पढ़िए केस

Mumbai Police: महाराष्ट्र पुलिस की एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को सिरे से खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह बेहद सख्त और दूरगामी टिप्पणी की है।

SDPI के राज्य महासचिव के खिलाफ आदेश को किया रद्द

हाईकोर्ट जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य के मामले में सुनवाई करते हुए सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महाराष्ट्र राज्य महासचिव सईद अहमद चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार के आदेश को पूरी तरह अवैध घोषित कर रद्द (Quash) कर दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है, वे विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते- यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हुए हैं। अगर लोग विरोध करेंगे, तो आप केस थोप देंगे… यह क्या है? विरोध करना नागरिकों का अधिकार है… याचिकाकर्ता ने केवल ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं… नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए तड़ीपार के आदेश क्यों?’ पुलिस ने ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’ के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) के खिलाफ तड़ीपार का आदेश जारी किया था। सईद सीएए व ज्ञानवापी विवाद सहित केंद्र के विभिन्न फैसलों के खिलाफ लगातार मोर्चे और धरने कर रहे थे।

पुलिस जनता के प्रति जवाबदेह, नेताओं के अधीन काम नहीं करें

अदालत ने कहा, पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह प्राधिकारी (Authorities) हैं, न कि मंत्रियों के अधीन काम करने वाले कर्मचारी या कारिंदे। सरकार के फैसलों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना या राजनीतिक नारे लगाना किसी भी नागरिक को उसके अपने शहर से निष्कासित या तड़ीपार (Externment) करने का वैध आधार नहीं हो सकता।

वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है

हाईकोर्ट जस्टिस जामदार ने कहा, महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है, पाला बदल लें जस्टिस माधव जामदार ने कहा- ‘परसों, एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा इस बात पर चर्चा कर रही थी कि पीठासीन अधिकारी कैसे चुना जाता है और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे स्थानांतरित हो गया है… यह क्या है? यहां तक कि आपको (वाहिद चौधरी) भी पाला बदल लेना चाहिए… वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके (वाहिद चौधरी) खिलाफ कुछ एफआईआर हैं… पाला बदलने पर विचार करें, वहां एक वॉशिंग मशीन है।

मामला क्या है?: प्रदर्शन करने पर मुंबई पुलिस ने 1 साल के लिए किया था ‘तड़ीपार’

यह मामला मुंबई के चेंबूर इलाके के निवासी और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार सईद अहमद चौधरी से जुड़ा है।

पुलिस की तड़ीपार कार्रवाई (दिसंबर 2025): मुंबई पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (DCP) ने दिसंबर 2025 में महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (MPA) के तहत एक आदेश जारी किया। इस आदेश में चौधरी को 1 साल (12 महीने) की अवधि के लिए मुंबई शहर और उपनगरीय सीमाओं से बाहर (तड़ीपार) जाने का निर्देश दिया गया था। कोंकण डिवीजन के संभागीय आयुक्त ने भी अपील में इस आदेश को बरकरार रखा था।

तड़ीपार का आधार: पुलिस ने दलील दी थी कि चौधरी के खिलाफ 2019 से 2024 के बीच कई एफआईआर (FIR) दर्ज हैं और उसकी गतिविधियां ‘सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा’ हैं। हालांकि, ये सभी एफआईआर नागरिकता संशोधन कानून (CAA), एनआरसी (NRC), ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और वक्फ बोर्ड जैसे मुद्दों पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन और रैलियां आयोजित करने से जुड़ी थीं, जिनमें धारा 188 (सरकारी आदेश की अवज्ञा) लगाई गई थी।

हाई कोर्ट में चुनौती: चौधरी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि मुंबई नगर निगम (BMC) के आगामी चुनावों के महत्वपूर्ण समय में उन्हें जानबूझकर उनके चुनावी क्षेत्र से दूर रखने और लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग किया गया है।

हाई कोर्ट का रुख: यह अभिव्यक्ति की आजादी और सम्मान से जीने के अधिकार पर चोट है

जस्टिस माधव जामदार ने मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई पर तीखी नाराजगी व्यक्त की और देश में हाल ही में हुए पेपर लीक (Paper Leaks) के खिलाफ युवाओं के प्रदर्शनों का भी हवाला दिया।

राजनीतिक नारेबाजी कोई अपराध नहीं

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने मौखिक रूप से पूछा कि ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’ या ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने से कोई व्यक्ति तड़ीपार करने लायक अपराधी कैसे हो जाता है? अदालत ने अपने लिखित आदेश में स्पष्ट किया कि भारत सरकार के कुछ फैसलों का विरोध करने मात्र के लिए महाराष्ट्र राज्य द्वारा चौधरी को तड़ीपार करने की कार्रवाई, सीधे तौर पर याचिकाकर्ता के वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a)) और गरिमा के साथ जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21) पर प्रहार करती है।

पुलिस शक्तियों का दुर्भावनापूर्ण (Malafide) उपयोग

याचिकाकर्ता की वकील एडवोकेट पयोशी रॉय ने कोर्ट को समझाया कि महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (MPA) की धारा 56 के तहत तड़ीपार की कार्रवाई केवल तब की जाती है जब किसी व्यक्ति से जान-माल या संपत्ति को गंभीर और हिंसक खतरा हो। शांतिपूर्ण धरने-प्रदर्शन (IPC धारा 188) इसके दायरे में नहीं आते। हाई कोर्ट ने इस तर्क को सही माना और कहा कि पुलिस ने इस कानून का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया है।

अदालत का अंतिम आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने चेंबूर के पुलिस उपायुक्त और कोंकण संभाग के आयुक्त, दोनों के आदेशों को पूरी तरह से निरस्त (Quash and Set Aside) कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण किसी भी नागरिक को उसके अपने ही शहर से निर्वासित नहीं किया जा सकता।

केस मैट्रिक्स: बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांबॉम्बे उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय, मुंबई
माननीय न्यायाधीशजस्टिस माधव जामदार (एकल पीठ)
केस संदर्भसईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी बनाम महाराष्ट्र राज्य (Saeed Ahmad Chaudhary v. State of Maharashtra)
लागू कानूनमहाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (MPA) की धारा 56 बनाम आईपीसी की धारा 188
पुलिस की कार्रवाईराजनीतिक आंदोलनों और नारों के कारण १ साल के लिए मुंबई से तड़ीपार करना।
याचिकाकर्ता के वकीलएडवोकेट पयोशी रॉय
अदालत का अंतिम निर्णयतड़ीपार का आदेश रद्द; कोर्ट ने पुलिस को याद दिलाया कि वे मंत्रियों के नहीं, बल्कि जनता के सेवक हैं।
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