Tuesday, September 22, 2026
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Organised Urban Slums: हम संगठित शहरी झुग्गियां बना रहे हैं…पैसा दो और अपराध करो, फीस देकर आप नियमों में ढील कैसे दे सकते हैं? पढ़ें केस

केस एवं टाउन प्लानिंग मैट्रिक्स (Case Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति रोहित कपूर
मुख्य विषयगुरुग्राम DLF सिटी में अवैध निर्माण, Zoning Plan उल्लंघन और Purchasable FAR की वैधता
याचिकाकर्ताDLF सिटी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन एवं अन्य (वरिष्ठ अधिवक्ता अमित झांजी)
हरियाणा सरकार का पक्षअतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) अंकुर मित्तल
अदालत का मुख्य अवलोकननियमितीकरण और अतिरिक्त FAR की छूट से शहरी योजनाएं तबाह हो रही हैं; यह ‘Pay and commit offence’ जैसा है।

Organised Urban Slums: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने देश में नगर नियोजन (Town Planning) के गिरते स्तर और अवैध निर्माणों के नियमितीकरण (Regularisation) पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ गुरुग्राम के DLF सिटी में कथित अवैध निर्माणों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अतिरिक्त फीस लेकर अतिरिक्त निर्माण (Purchasable Floor Area Ratio – FAR) की अनुमति देना और अवैध निर्माणों को नियमित करना देश में “संगठित शहरी झुग्गियां” पैदा कर रहा है।

‘Pay and Commit Offence’: परचेजेबल FAR पर कोर्ट के कड़े सवाल

  1. ‘पैसा दो और अपराध करो’ की संस्कृति: पीठ ने हरियाणा में परचेजेबल एफएआर (Purchasable FAR) की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल राजस्व (Revenue) जुटाने के लिए नियमों को शिथिल किया जा रहा है।हाई कोर्ट की टिप्पणी: “फीस देकर आप नियमों में ढील कैसे दे सकते हैं? यह ‘परचेजेबल एफएआर’ का विचार आपके पूरे अर्बन टाउनशिप के कॉन्सेप्ट को नष्ट कर देता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे ‘पैसा दो और अपराध करो’ (Pay and commit offence)।”
  2. चार मंजिलों की अनुमति और सामाजिक समस्याएं: अदालत ने कहा कि जब चार मंजिलों (Four Floors) की अनुमति दी जाती है, तो एक ही भूखंड पर चार परिवार रहने लगते हैं। हर परिवार के पास गाड़ियां होती हैं, जिससे सड़कों पर पार्किंग को लेकर पड़ोसियों के बीच विवाद बढ़ रहे हैं, रिश्ते बिगड़ रहे हैं और अपराध में वृद्धि हो रही है।
  3. चंडीगढ़ मॉडल का उदाहरण: कोर्ट ने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि यह शहर इसलिए बचा हुआ है क्योंकि वहां आज भी स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार ली कोर्बुसिए (Le Corbusier) द्वारा बनाए गए भवन उप-नियमों (Building Bye-laws) का कड़ाई से पालन किया जाता है। वहीं, आधुनिक टाउनशिप अपने उस मूल उद्देश्य को पूरा करने में विफल रही हैं, जिसके लिए उन्हें बनाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि और सुप्रीम कोर्ट का रुख

  • 2021 की याचिकाएं: DLF सिटी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और ‘DLF-3 वॉइस’ ने 2021 में याचिकाएं दायर कर 2018 की एक्शन टेकन रिपोर्ट के आधार पर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की मांग की थी।
  • हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट: फरवरी 2025 में High Court ने गुरुग्राम के DLF सिटी में करीब 4,000 अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। हालांकि, अक्टूबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने इस आदेश को रद्द कर दिया था और प्रभावित भूखंड मालिकों को सुनवाई का अवसर देकर मामले को नए सिरे से सुनने का निर्देश दिया था।
  • जारी सुनवाई: हाई कोर्ट अब प्रभावित पक्षों की विस्तृत दलीलें सुन रहा है और जल्द ही इस पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।

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