Ownership Case: अपनी कार पुरानी कारों के मशहूर प्लेटफॉर्म ‘स्पिनी’ (Spinny) के जरिए बेचने के बाद कानूनी पचड़े में फंसे एक वकील को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
कार बिकने के 2.5 साल बाद भी खरीदार के नाम ट्रांसफर नहीं हुई
हाईकोर्ट के जस्टिस मधु जैन की अवकाशकालीन पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और प्री-ओन्ड कार डीलर प्लेटफॉर्म ‘स्पिनी’ को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। अदालत ने वकील के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) पर रोक लगा दी है। दरअसल, कार बिकने के 2.5 साल बाद भी खरीदार के नाम ट्रांसफर नहीं हुई थी और हाल ही में पुलिस ने उस कार को आबकारी कानून (Excise Law) के तहत शराब तस्करी के अपराध में जब्त कर मूल मालिक (वकील) को नोटिस भेज दिया था।
मामला क्या है?: कार बेचने के बाद पहचान की चोरी और तस्करी का खेल
यह मामला प्रयुक्त (Used) कारों के व्यापार से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की लापरवाही और सुरक्षा खामियों को उजागर करता है।
दिसंबर 2023 में बेची कार: पेशे से वकील शंकर कुमार झा ने 29 दिसंबर, 2023 को स्पिनी प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी कार बेची थी और गाड़ी का भौतिक कब्जा (Physical Possession) कंपनी को सौंप दिया था। कंपनी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे आरटीओ (RTO) में स्वामित्व ट्रांसफर (Transfer of Ownership) सहित बिक्री के बाद की सभी सेवाएं पूरी करेंगे।
शराब तस्करी में इस्तेमाल: बार-बार याद दिलाने के बाद भी कार नए खरीदार के नाम ट्रांसफर नहीं की गई। इसी महीने (जून 2026), झा को अचानक दिल्ली पुलिस से एक नोटिस मिला, जिसमें बताया गया कि उनकी पुरानी कार का इस्तेमाल आबकारी कानून के तहत शराब की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया गया है।
वकील की विधिक दलील: शंकर कुमार झा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजात ने अदालत में तर्क दिया कि जैसे ही उनके मुवक्किल ने दिसंबर 2023 में कार का कब्जा सौंप दिया, उसी तारीख से उनकी कोई भी आपराधिक, दीवानी या नियामक देनदारी (Liability) समाप्त हो गई।
हाई कोर्ट का आदेश: दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक
याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों और प्रतिष्ठा को हो रहे नुकसान को देखते हुए जस्टिस मधु जैन ने कड़ा रुख अपनाया। इस बीच, प्रतिवादियों (पुलिस व प्रशासन) को अगली सुनवाई की तारीख तक वाहन के अवैध उपयोग के संबंध में याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोका जाता है।
स्पिनी के तौर-तरीकों की जांच और ‘पॉलिसी’ बनाने की मांग
याचिकाकर्ता ने इस मामले को केवल एक लापरवाही न मानकर समाज और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
मौलिक अधिकारों का हनन: याचिका में कहा गया है कि डीलर और अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण याचिकाकर्ता को ‘पहचान की चोरी’ (Identity Theft), आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) और अनुचित व्यापार प्रथाओं का सामना करना पड़ा है। इससे संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत गरिमा के साथ जीने का अधिकार, गोपनीयता का अधिकार और सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।
स्पिनी के खिलाफ जांच की मांग: याचिका में मांग की गई है कि स्पिनी (प्रतिवादी नंबर 6) की कार्यप्रणाली और तौर-तरीकों की विस्तृत जांच (Inquiry) के आदेश दिए जाएं, क्योंकि यह एक अधिक भयावह पैटर्न को दर्शाता है।
केंद्र सरकार को निर्देश: वकील ने अदालत से प्रार्थना की है कि केंद्र सरकार को देश में पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों की व्यावसायिक गतिविधियों को विनियमित (Regulate) करने के लिए एक विस्तृत और कड़े नियम/नीति (Policy) बनाने का निर्देश दिया जाए।
केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Overview)
| कानूनी और प्रशासनिक बिंदु | दिल्ली हाई कोर्ट की विधिक कार्यवाही (२३ जून, २०२६) |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस मधु जैन (अवकाशकालीन पीठ) |
| याचिकाकर्ता (वादी) | शंकर कुमार झा (वरिष्ठ वकील) |
| मुख्य प्रतिवादी | केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और स्पिनी (Spinny – प्रयुक्त कार डीलर) |
| मुख्य विधिक मुद्दा | कार बेचने के बाद भी RTO ओनरशिप ट्रांसफर न होना और वाहन का शराब तस्करी में इस्तेमाल। |
| अदालत का अंतरिम आदेश | याचिकाकर्ता वकील के खिलाफ किसी भी दंडात्मक या पुलिस कार्रवाई पर पूर्ण रोक (Stay); 4 सप्ताह में जवाब तलब। |
| अगली सुनवाई | 10 अगस्त, 2026 |

