Thursday, September 24, 2026
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Parliament Security: धुएं वाला कनस्तर यूएपीए के तहत आता है…तब तो आईपीएल मैच में जो ले जाते हैं

Parliament Security: दिल्ली हाईकोर्ट संसद सुरक्षा में 2023 में हुई बड़ी चूक की घटना के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई अब 7 मई को करेगा।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल उपलब्ध नहीं हैं

कोर्ट को बताया, अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए सुनवाई टालने की मांग की गई। कोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली। जिन दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, उनमें एकमात्र महिला आरोपी नीलम आज़ाद और महेश कुमावत शामिल हैं। नीलम के वकील ने सुनवाई टालने का विरोध करते हुए कहा कि यह देरी की रणनीति है और देश के लिए यह रवैया ठीक नहीं है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, बस कीजिए, आप हमें परेशान कर रहे हैं।

क्या धुएं वाला कनस्तर यूएपीए के तहत आता है: कोर्ट

हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा था कि क्या धुएं वाला कनस्तर, जो जानलेवा नहीं है, उसे आतंकवाद निरोधक कानून यूएपीए के तहत लाया जा सकता है? कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो होली और आईपीएल मैचों में भी लोग इस कानून के तहत अपराधी बन जाएंगे।

13 दिसंबर 2023 को संसद में हुई थी घटना

13 दिसंबर 2023 को संसद पर 2001 के आतंकी हमले की बरसी पर सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी। आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने लोकसभा की दर्शक दीर्घा से कूदकर पीले रंग का धुआं छोड़ा और नारेबाजी की। उसी समय संसद परिसर के बाहर अमोल शिंदे और नीलम आज़ाद ने भी रंगीन धुआं छोड़ा और तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाए। नीलम के वकील ने कहा कि वह संसद के अंदर नहीं थीं और उनके पास कोई विस्फोटक नहीं था, इसलिए यूएपीए लागू नहीं होता। वहीं पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों का मकसद 2001 के हमले की यादें ताजा करना था और यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी।

यूएपीए के तहत क्या आता है

यूएपीए की धारा 15 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अगर भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने की नीयत से कोई ऐसा कृत्य करता है जिससे लोगों में डर पैदा हो, तो वह आतंकवादी कृत्य माना जाएगा। इसमें बम, विस्फोटक, जहरीली गैस या अन्य खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल शामिल है।

ट्रायल कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की थी

ट्रायल कोर्ट ने नीलम आज़ाद की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी आरोपी पहले से जानते थे कि प्रतिबंधित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने संसद पर हमले की धमकी दी थी, इसके बावजूद उन्होंने उसी दिन यह कृत्य किया। चार आरोपी मौके से पकड़े गए थे, जबकि लालित झा और महेश कुमावत को बाद में गिरफ्तार किया गया। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ गंभीर अपराध है।

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