Tuesday, September 1, 2026
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CBSE 12th: कांपियों की फिजिकल जांच कराई जाए…ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में है गड़बड़झाला, NSUI की याचिका में और बातें हैं, पढ़कर पता चलेगा

CBSE 12th: नीट (NEET) परीक्षा विवाद के बीच अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की मूल्यांकन प्रणाली भी कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है।

कांग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (NSUI) ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में व्यापक अनियमितताओं और तकनीकी विफलताओं का आरोप लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया है। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ द्वारा दायर इस जनहित याचिका (PIL) में प्रभावित छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अदालत से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

क्या है OSM विवाद और छात्रों की मुख्य शिकायतें?

शिकायत: सीबीएसई ने कॉपियों के मूल्यांकन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम शुरू किया था, जिसके तहत शारीरिक उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके शिक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचने के लिए दिया जाता है। याचिका के अनुसार, परिणाम घोषित होने के बाद देश भर से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने इस प्रणाली में गंभीर खामियों की शिकायत की है।

धुंधली और गायब कॉपियां: जब छात्रों ने अपनी कॉपियों की स्कैन प्रति डाउनलोड की, तो कई उत्तर पुस्तिकाएं बेहद धुंधली (Blurred) थीं, कुछ में पन्ने गायब थे और कई जगह कॉपियों का अपलोड अधूरा था।

उत्तर पुस्तिकाओं का बेमेल (Mismatch): कई मामलों में एक छात्र की आईडी पर किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका अपलोड होने की गंभीर गड़बड़ी सामने आई है।

उम्मीद से बेहद कम अंक: इन तकनीकी खामियों और शिक्षकों द्वारा स्क्रीन पर ठीक से न पढ़ पाने के कारण लाखों छात्रों को उम्मीद से बहुत कम अंक मिले हैं।

NSUI की अदालत से मुख्य मांगें (Key Prayers in PIL)

मुआवजा अंक (Compensatory Marks): अधिवक्ता ऋषभ रंजन और अजय छिकारा के माध्यम से दायर इस याचिका में राहत मांगी गई हैं। जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं सिस्टम से गायब पाई गईं, धुंधली थीं या जिनका मूल्यांकन तकनीकी त्रुटि के कारण गलत हुआ, उन्हें मुआवजा अंक दिए जाएं।

स्वतंत्र जांच (Independent Probe): ओएसएम (OSM) प्रणाली में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं, तकनीकी कमियों और शिकायत निवारण तंत्र की विफलता की एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।

फिजिकल री-चेकिंग (Manual Verification): जिन मामलों में छात्र डिजिटल स्कैन कॉपी या मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं, वहां कॉपियों की भौतिक (Physical) रूप से मैन्युअल दोबारा जांच करने के आदेश दिए जाएं।

पोर्टल की समय सीमा बढ़ाना: सीबीएसई के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) पोर्टल को एक अतिरिक्त महीने के लिए खुला रखा जाए ताकि कोई भी प्रभावित छात्र आवेदन करने से न छूटे।

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सीबीएसई के अपने आंकड़ों से खुलासे का हवाला

याचिका में सीबीएसई के ही जनसंचार (Public Communications) का हवाला दिया गया है, जिसमें बोर्ड ने खुद माना था कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को देखने वाले पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियां (Technical Glitches) आई थीं।

“परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद एक संक्षिप्त अवधि के भीतर 3,87,399 स्कैन की गई कॉपियों के लिए लगभग 1,27,146 आवेदन प्राप्त हुए। इतनी भारी संख्या में छात्रों का कॉपियां मांगना यह दर्शाता है कि छात्रों का इस मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा उठ चुका है। इसे कोई सामान्य पोस्ट-रिजल्ट औपचारिकता मानकर खारिज नहीं किया जा सकता।”
— याचिका का मुख्य अंश

मामले की गंभीरता: एक नज़र में (Core Matrix)

मुख्य बिंदुजमीनी प्रभाव और चिंताएं
भविष्य पर संकटकक्षा 12वीं के अंक यूनिवर्सिटी प्रवेश (जैसे CUET कट-ऑफ), छात्रवृत्ति और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Professional Courses) के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सीबीएसई का रुखबोर्ड ने पोर्टल पर तकनीकी खराबी की बात स्वीकार की है, लेकिन इसे एक व्यवस्थागत विफलता मानने के बजाय सामान्य त्रुटि माना है।
वर्तमान स्थितिचूंकि दिल्ली हाई कोर्ट में वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है और अदालत आंशिक रूप से कार्य कर रही है (जज वैकल्पिक दिनों पर बैठ रहे हैं), NSUI के वकील इस मामले को इसी सप्ताह तत्काल सुनवाई (Urgent Listing) के लिए सूचीबद्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

निष्कर्ष (Takeaway)

यह याचिका भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों में हो रहे अंधाधुंध डिजिटलीकरण की सीमाओं को रेखांकित करती है। तकनीकी रूप से उन्नत होना अच्छी बात है, लेकिन अगर सॉफ्टवेयर की कमियों या कॉपियों के खराब रेजोल्यूशन में स्कैन होने के कारण किसी छात्र का मूल्यांकन प्रभावित होता है, तो यह उसके पूरे करियर को तबाह कर सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में अपनाया जाने वाला रुख देश के लाखों सीबीएसई छात्रों के प्रवेश सत्र (Admission Season) को प्रभावित करेगा।

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