हाईकोर्ट द्वारा जारी सख्त निर्देश (Key Directives)
- सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक:अदालत ने मुंबई की सार्वजनिक सड़कों, गलियों और पैदल मार्गों (Footpaths) पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। पुलिस कमिश्नर को सभी पुलिस स्टेशनों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस आदेश का सख्त क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- साइलेंस ज़ोन में पूर्ण पाबंदी:अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास घोषित ‘साइलेंस ज़ोन’ (Silence Zones) में पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- लाउडस्पीकर और जुलूस के नियम:अदालत ने 22 सितंबर के अपने आदेश को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया, जिसके अनुसार लाउडस्पीकर/म्यूजिक सिस्टम का उपयोग करने वाले जुलूसों को दी गई पुलिस अनुमति का आधिकारिक पत्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
- SOP और सार्वजनिक जागरूकता अभियान:हाईकोर्ट ने उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने और बीएमसी व MPCB को पटाखों के दुष्प्रभावों के बारे में जन-जागरूकता अभियान चलाने का आदेश दिया।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां
1. “समुद्री हवा का फायदा गंवाया जा रहा है”:
न्यायाधीश कुलकर्णी और न्यायाधीश गोखले की पीठ ने टिप्पणी की: “यह चौंकाने वाला है। शहर के पास समुद्री हवा (Sea Breeze) का प्राकृतिक लाभ है, खुला समुद्र और बहुत सारे खुले स्थान हैं, फिर भी हम इस स्थिति का सामना कर रहे हैं… अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुंबई का आसमान साफ रहे।”
2. अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर सवाल:
अदालत ने नाराजगी जताते हुए बीएमसी और पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि जब लाखों नागरिक प्रदूषण और अस्वास्थ्यकर हवा के कारण आपातकालीन स्थिति जैसी तकलीफ झेल रहे हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं?
मुंबई: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण व प्रदूषण-मुक्त जीवन जीने का मूल अधिकार), वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Air Act, 1981), ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution Rules, 2000), सार्वजनिक सड़कों व साइलेंस जोन (Silence Zones) में पटाखों पर पूर्ण निषेध, जुलूसों में लाउडस्पीकर की आधिकारिक अनुमति के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनिवार्यता, तथा अदालती निर्देशों के लगातार उल्लंघन पर नागरिक व पुलिस प्रशासन की विफलता पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है।
बॉम्बे उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले शामिल थे, ने त्योहारी सीजन के दौरान मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 150 से 200 (अस्वस्थ श्रेणी) तक पहुंचने और कई क्षेत्रों में दिल्ली से भी बदतर प्रदूषण स्तर दर्ज किए जाने पर कड़ा संज्ञान लिया।
अदालत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और मुंबई पुलिस की घोर निष्क्रियता पर कड़ी फटकार लगाते हुए मुंबई की सभी सार्वजनिक सड़कों, व्यस्त गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban on Public Roads & Footpaths) लगा दिया है। अदालत ने बीएमसी आयुक्त और मुंबई पुलिस आयुक्त को इस आदेश के सख्त प्रवर्तन और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर 26 अक्टूबर 2026 तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निर्देश एवं तल्ख टिप्पणियां
1. ‘समुद्र तटीय भौगोलिक लाभ का सत्यानाश; दिल्ली से बदतर होना स्तब्धकारी’
न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने मुंबई की प्राकृतिक स्थिति का हवाला देते हुए व्यवस्था दी: “यह अत्यंत स्तब्धकारी (Shocking) है। इस शहर के पास समुद्री हवा (Sea Breeze) का प्राकृतिक लाभ है, विशाल खुला समुद्र और खुले स्थान हैं, इसके बावजूद हम इस स्थिति का सामना कर रहे हैं। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि मुंबई का आसमान पूरी तरह स्वच्छ रहे। प्रशासन को यह समझना होगा कि प्राकृतिक वरदान की इस तरह बर्बादी स्वीकार्य नहीं है।”
2. ‘जब लाखों नागरिक आपात स्थिति में हों, तो प्रवर्तन अधिकारी चैन से कैसे सो सकते हैं?’
- न्यायमूर्ति कुलकर्णी ने वायु व ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर अफसरों की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की:“जब लाखों नागरिक इस गंभीर आपात स्थिति (Emergency Situation) के चलते सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य संकट झेल रहे हैं, तो प्रवर्तन अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं?“
- पीठ ने पाया कि 22 सितंबर 2026 के पिछले आदेशों के बावजूद सार्वजनिक सड़कों पर न तो अवैध लाउडस्पीकरों पर लगाम लगी और न ही पटाखों की अनियंत्रित आतिशबाजी पर रोक लगाई गई।
3. पटाखों पर विशिष्ट अदालती पाबंदियां एवं साइलेंस जोन का संरक्षण:
- सड़कों व फुटपाथों पर पूर्ण रोक: शहर की किसी भी सार्वजनिक सड़क, मुख्य मार्ग या पैदल पथ (फुटपाथ) पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- साइलेंस जोन में शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance): अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों, शैक्षणिक संस्थानों और नर्सिंग होम के आसपास घोषित ‘साइलेंस जोन’ (Silence Zones) में पटाखे फोड़ने पर शत-प्रतिशत प्रतिबंध लागू रहेगा।
- उल्लंघनकर्ताओं पर दंडात्मक SOP: बीएमसी और पुलिस को निर्देश दिया गया कि वे प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, जब्ती और जुर्माना लगाने के लिए एक स्पष्ट ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) तैयार करें।
4. पुलिस आयुक्त को सभी थाना प्रभारियों की बैठक बुलाने का निर्देश:
- मुंबई के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया गया कि वे शहर के सभी पुलिस स्टेशनों के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षकों (Senior PIs) की तत्काल एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाएं और उन्हें पटाखों व ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट के आदेशों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने का दायित्व सौंपें।
5. जुलूसों में लाउडस्पीकर अनुमति का अनिवार्य सार्वजनिक प्रदर्शन:
- अदालत ने अपने 22 सितंबर के आदेश को सख्ती से लागू करने का पुनः निर्देश दिया, जिसके तहत किसी भी धार्मिक या सामाजिक जुलूस/शोभायात्रा में डीजे या म्यूजिक सिस्टम का उपयोग करने से पूर्व पुलिस से ली गई आधिकारिक अनुमति पत्र (Permission Copy) को जुलूस में आगे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित (Display) करना अनिवार्य होगा, जिसमें डेसिबल सीमाओं के पालन का वचनपत्र शामिल हो।
तथ्यात्मक स्थिति एवं प्रशासनिक विफलता का कालक्रम
| विधिक मानक / चरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं अदालती निष्कर्ष |
| प्रदूषण की वर्तमान स्थिति | aqi.in के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में मुंबई का AQI लगातार 150 से 200 के बीच दर्ज हुआ है, जो श्वसन व हृदय रोगियों सहित आम नागरिकों के लिए भी ‘अस्वस्थ’ (Unhealthy) श्रेणी में आता है। |
| प्रशासनिक विफलता | बीएमसी और एमपीसीबी शहर के नागरिकों को पटाखों के दुष्प्रभावों और सार्वजनिक स्थानों पर आतिशबाजी के प्रतिबंध के बारे में जागरूक करने के लिए कोई प्रभावी जन-जागरूकता अभियान (Public Awareness Campaign) चलाने में पूरी तरह विफल रहे। |
| जुलूसों में ध्वनि उल्लंघन | जुलूसों और उत्सवों में बिना डेसिबल अंडरटेकिंग और बिना विधिवत पूर्व अनुमति के भारी-भरकम साउंड सिस्टम बजाए जा रहे हैं, जो ध्वनि प्रदूषण नियमावली 2000 का खुला उल्लंघन है। |
| अदालत का अंतिम अल्टीमेटम | 26 अक्टूबर 2026 तक पुलिस आयुक्त और बीएमसी कमिश्नर को व्यक्तिगत हलफनामा देकर यह बताना होगा कि सड़कों पर पटाखे रोकने के लिए क्या-क्या ठोस जमीनी कदम उठाए गए हैं। |
विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: स्वच्छ हवा का अधिकार बनाम उत्सव की सीमाएं
- सुप्रीम कोर्ट की नजीरें — अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ [(2019) 13 SCC 523]:
- शीर्ष अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी थी कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक या उत्सवी स्वतंत्रता किसी भी स्थिति में अनुच्छेद 21 के तहत अन्य नागरिकों के ‘स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार’ का अतिक्रमण नहीं कर सकती।
- सार्वजनिक सड़कों और अस्पतालों के पास पटाखे फोड़ना न केवल वायु और ध्वनि प्रदूषण पैदा करता है, बल्कि यह आम नागरिकों, बुजुर्गों और मरीजों के जीवन को सीधे संकट में डालता है।
- ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के नियम 5 एवं 6:
- नियम 6 साइलेंस जोन (अस्पतालों, अदालतों, शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर दायरे) में किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर, हॉर्न या ध्वनि-उत्सर्जक पटाखों के प्रयोग को अपराध मानता है।
- नियम 5 के तहत बिना सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि उपकरणों का संचालन प्रतिबंधित है। हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि यदि अनुमति ली भी गई है, तो उसे मौके पर जनता और पुलिस की जांच हेतु भौतिक रूप से प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य है।
विधिक विवरण
- न्यायालय: बॉम्बे उच्च न्यायालय (मूल व जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
- पीठ: न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति नीला गोखले (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: अक्टूबर 2026
- अनुपालन रिपोर्ट / हलफनामा समय-सीमा: 26 अक्टूबर 2026
- संबद्ध विषय: मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में गिरावट, ध्वनि प्रदूषण और पटाखों पर प्रतिबंध
प्रासंगिक कानून एवं सांविधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार – स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार), अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण का राज्य दायित्व) एवं अनुच्छेद 226
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 — धारा 16, 17 एवं धारा 22
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 — धारा 3 एवं धारा 5 (प्रदूषण रोकथाम हेतु निर्देश)
- ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 — नियम 3, 5, 6 (साइलेंस जोन) एवं नियम 7 (शिकायत निवारण)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- शहरी वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक सुरक्षा की सर्वोच्चता: ‘सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ना नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है; उत्सवों की आड़ में अदालती आदेशों और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जा सकता; प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम का यह विधिक दायित्व है कि वे समुद्र तटीय शहरों में वायु की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दंडात्मक और निवारक कदम उठाएं।’
- अंतिम परिणाम: मुंबई की सार्वजनिक सड़कों, गलियों, फुटपाथों और सभी साइलेंस जोनों में पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध; पुलिस आयुक्त को सभी थाना प्रमुखों की बैठक बुलाकर प्रतिबंध लागू कराने का निर्देश; बीएमसी और पुलिस को उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एसओपी तैयार करने तथा 26 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन शपथपत्र प्रस्तुत करने का सख्त आदेश।
Polluted Mumbai:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति गिरीश एस. कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति नीला गोखले |
| मुख्य मुद्दा | मुंबई में बढ़ता वायु व ध्वनि प्रदूषण और दिवाली/त्योहारों के दौरान पटाखों व लाउडस्पीकरों पर नियंत्रण। |
| हालिया AQI स्थिति | मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पिछले सप्ताह 150 से 200 के बीच (“अस्वास्थ्यकर” श्रेणी) दर्ज किया गया। |
| मुख्य अदालती आदेश | सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध। |
| अनुपालन रिपोर्ट | बीएमसी (BMC) कमिश्नर और मुंबई पुलिस कमिश्नर को 26 अक्टूबर तक हलफनामा दायर करने का निर्देश। |

