Thursday, October 1, 2026
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PwBD category: नेत्रदृष्टि बाधित महिला को राज्य में सिविल न्यायाधीश बनाए राजस्थान हाईकोर्ट…यह कही अन्य बातें

PwBD category: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह सामान्य वर्ग की एक नेत्रदृष्टि बाधित महिला को राज्य में सिविल न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करे।

अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए हाईकोर्ट को या तो रेखा शर्मा को सिविल न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने या एक अधिशेष पद (supernumerary seat) सृजित करने का निर्देश दिया। संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आदेश पारित करने की व्यापक शक्ति प्रदान करता है। अधिशेष पद का तात्पर्य स्वीकृत पदों से अधिक अतिरिक्त पद से है, जो भविष्य में रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से सृजित किया जाता है।

दृष्टिहीन वर्ग में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक से अधिक रेखा ने प्राप्त किए

रेखा शर्मा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता तल्हा अब्दुल रहमान ने कहा कि राजस्थान न्यायपालिका ने मानक दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के लिए नौ पद आरक्षित किए थे, जिनमें से दो पूर्ण दृष्टिहीनता और कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए थे। उन्होंने बताया कि शर्मा को 119 अंक प्राप्त हुए थे, जो दृष्टिहीनता और कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों से अधिक थे, फिर भी उन्हें न्यायिक अधिकारी के रूप में नियुक्त नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि PwBD (Persons with Benchmark Disabilities) श्रेणी में केवल दो उम्मीदवारों को अंततः नौ रिक्तियों में से चुना गया, और शर्मा को सेवा में समायोजित किया जा सकता था।

दिव्यांगता श्रेणी के आरक्षित सीट को दो वर्ग के उम्मीदवारों को दिया

पीठ ने शर्मा की उस दलील को नोट किया कि हाईकोर्ट ने दिव्यांगता श्रेणी के तहत आरक्षित सीट को एक PwBD उम्मीदवार और एक अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को दे दिया, जिन्हें उनकी अपनी आरक्षित श्रेणी के तहत समायोजित किया जा सकता था। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 142 के उद्देश्य और मंशा को ध्यान में रखते हुए, हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता को सिविल न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाए। पीठ ने कहा कि यह नियुक्ति या तो एक अधिशेष पद सृजित करके या दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए रिक्त रह गई सीटों में समायोजित करके की जा सकती है, जिन्हें अगले चक्र में आगे बढ़ाया गया था।

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