केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड (राजस्थान उच्च न्यायालय) |
| विवादित स्थान | ब्यावर-मसौदा-गोयला राज्य राजमार्ग (राजस्थान) |
| संबंधित नियम | राजस्थान राज्य राजमार्ग शुल्क नियम, 2015 (नियम 8 – 2 किमी दायरा प्रतिबंध) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | अवैध या विवादित टोल से एकत्रित सार्वजनिक धन का उपयोग ‘जनहित’ और पर्यावरणीय सुधार (Greenery/Oxygen) के लिए किया जा सकता है। |
| अदालत का निर्णय | टोल की कमाई से पौधारोपण का निर्देश; 3 महीने में टोल ट्रांसफर पर फैसला न होने पर अवमानना कार्यवाही की चेतावनी। |
Public Good Order: राजस्थान हाईकाेर्ट ने एक अनूठे और दूरगामी फैसले में आदेश दिया है कि ब्यावर-मसौदा-गोयला राज्य राजमार्ग पर बने एक विवादित और ‘अवैध’ बताए जा रहे टोल प्लाजा से एकत्र किए गए पूरे राजस्व का उपयोग आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में छायादार पौधे लगाने (Tree Plantation) के लिए किया जाएगा।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने 3 अगस्त 2026 को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, ताजा और ऑक्सीजन युक्त वातावरण प्रदान करना सबसे बड़ा जनहित (Larger Public Good) है।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के लिए निर्णय:“ऊपर दिए गए निर्देशों के अनुसार पेड़ लगाना एक ऐसी पहल है जिसे यह अदालत अत्यंत उपयुक्त मानती है। जब तक ये पेड़ जीवित रहेंगे—चाहे दशकों तक हों या शताब्दियों तक—वे शहर और आसपास के समुदाय को लगातार और मौन रहकर अनगिनत लाभ प्रदान करेंगे। हमारी आने वाली पीढ़ियों को इससे स्वच्छ, ताजी और ऑक्सीजन से भरपूर हवा मिलेगी।”
- जनहित में राशि का सही उपयोग: अदालत ने कहा कि जब तक टोल स्थानांतरण पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक एकत्रित राजस्व का विवरण सुरक्षित रखा जाए और इसका सार्वजनिक लाभ के लिए पौधारोपण में उपयोग किया जाए।
मामला क्या था? (Case Background)
- टोल प्लाजा के स्थान पर विवाद
- दो याचिकाकर्ताओं ने ब्यावर-मसौदा-गोयला स्टेट हाईवे पर स्थित टोल प्लाजा को नगरपालिका सीमा से दूर स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की थी।
- राजस्थान राज्य राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रहण) नियम, 2015 के नियम 8 के अनुसार, किसी भी नगरपालिका या स्थानीय कस्बे की सीमा के 2 किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा स्थापित करने पर स्पष्ट प्रतिबंध है।
- जिला कलेक्टर का निष्पादित न हुआ आदेश
- याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर ब्यावर के जिला कलेक्टर ने 27 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर टोल प्लाजा को नगरपालिका सीमा से 5 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।
- याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस आदेश को कहीं चुनौती नहीं दी गई और यह अंतिम (Final) हो चुका था, फिर भी इसका पालन नहीं किया गया और अवैध रूप से टोल वसूली जारी रखी गई।
हाई कोर्ट का अंतिम आदेश और निर्देश
- 3 महीने में रिप्रजेंटेशन पर निर्णय का आदेश
- हाई कोर्ट ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर (Project Director) को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा 21 मई 2026 को दिए गए अभ्यावेदन (Representation) पर सभी पक्षों को सुनवाई का मौका देकर कानून के अनुसार 3 महीने के भीतर निर्णय लें।
- अवमानना (Contempt) की चेतावनी: कोर्ट ने साफ किया कि तय समयसीमा में निर्णय न लेने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्यवाही शुरू की जाएगी।
- टोल के पैसों से पौधारोपण का रोडमैप
- अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे इस टोल प्लाजा से अब तक एकत्र की गई पूरी राशि का ब्योरा सुरक्षित रखें और प्रोजेक्ट डायरेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करें।
- प्रोजेक्ट डायरेक्टर इस पैसे का उपयोग आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर छायादार पेड़ लगाने के लिए किसी व्यक्ति/एजेंसी को नियुक्त करके करेंगे।
- अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) अनिवार्य
- कोर्ट ने आदेश दिया कि लगाए गए छायादार पौधों की तस्वीरें और उनकी देखरेख करने वाले व्यक्ति का वचनपत्र (Undertaking) अदालत के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट के रूप में पेश किया जाए।

