Friday, August 14, 2026
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Reform In BCI: बार काउंसिल ऑफ इंडिया में संरचनात्मक सुधारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा…NALSAR विवाद के बाद आया नया मामला

याचिका का संक्षिप्त सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
याचिका का उद्देश्यBar Council of India (BCI) के पुनर्गठन और अध्यक्ष के कार्यकाल की सीमा तय करना।
मुख्य मुद्दाअध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा का 2014 से लगातार पद पर बने रहना।
क्षेत्रीय असंतुलनपिछले 30 सालों में 20 राज्यों के प्रतिनिधियों को BCI का नेतृत्व नहीं मिला।
प्रेरणा (Trigger Point)NALSAR छात्रों पर BCI द्वारा की गई दंडात्मक कार्रवाई और क्षेत्राधिकार उल्लंघन का मामला।

Reform In BCI: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल और संगठन में केंद्रीकृत शक्तियों को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में BCI के कामकाज, अध्यक्ष पद के कार्यकाल और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर व्यापक सुधारों की मांग की गई है।

यह कदम नालसार (NALSAR) विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ BCI द्वारा जारी (और बाद में वापस लिए गए) विवादित आदेश के तुरंत बाद सामने आया है।

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याचिका में उठाई गई प्रमुख मांगें और तर्क

  1. अध्यक्ष के कार्यकाल की सीमा (Tenure Limits)
    • दीर्घकालिक प्रभुत्व पर सवाल: याचिका में कहा गया है कि वर्तमान अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा नवंबर 2014 से लगातार इस पद पर बने हुए हैं।
    • निश्चित कार्यकाल का सुझाव: अध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों के कार्यकाल और पदों की संख्या पर एक तर्कसंगत और निश्चित सीमा तय की जाए।
  2. क्षेत्रीय और राज्यस्तरीय प्रतिनिधित्व (Rotational Representation)
    • 20 राज्यों को मौका नहीं: राष्ट्रीय नियामक (National Regulator) होने के बावजूद, बीते 30 वर्षों में देश के 28 राज्यों में से 20 राज्यों के प्रतिनिधियों को कभी BCI अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं मिला
    • घूर्णन प्रणाली (Rotational Mechanism): याचिका में मांग की गई है कि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों को BCI नेतृत्व में अवसर देने के लिए रोटेशनल व्यवस्था लागू की जाए।
  3. लोकतांत्रिक विविधता और नया नेतृत्व
    • केवल चुनाव करा लेना ही वास्तविक लोकतंत्र नहीं है, यदि एक ही व्यक्ति या समूह का लगातार वर्चस्व बना रहे।
    • BCI जैसी संस्था में नए विचारों, नई सोच और विविध क्षेत्रीय दृष्टिकोणों वाले नए प्रतिनिधियों का आना आवश्यक है।
  4. NALSAR विवाद और संस्थागत जवाबदेही
    • NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों का इनरोलमेंट रोकने के हालिया फैसले का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि यह घटना अनियंत्रित और केंद्रीकृत नियामक शक्तियों (Unchecked concentrated authority) के खतरों को दर्शाती है।
    • BCI के भीतर वित्तीय, संस्थागत और नियामक स्तर पर मजबूत जवाबदेही (Accountability) तंत्र की मांग की गई है।

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याचिकाकर्ता का विवरण

  • याचिकाकर्ता: अधिवक्ता एम. वरधन् (M. Varadhan)
  • प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता संदीप पांडे (Sandeep Pandey) के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

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