Friday, October 9, 2026
HomeDelhi High CourtRent Promise Row: सीएम का हर बयान कानून नहीं…केजरीवाल ने लॉकडाउन के...

Rent Promise Row: सीएम का हर बयान कानून नहीं…केजरीवाल ने लॉकडाउन के किराया भरने वाले वादे नहीं होंगे लागू, यह है केस

Rent Promise Row: पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मार्च 2020 में लॉकडाउन के दौरान गरीब किरायेदारों का किराया भरने का जो ‘आश्वासन’ दिया गया था, उसे कानूनी रूप से लागू (Enforce) नहीं किया जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओ. पी. शुक्ला की बेंच ने एक अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें 2021 के सिंगल जज के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई बातें तब तक ‘रिट ऑफ मैंडमस’ (Writ of Mandamus) के जरिए लागू नहीं की जा सकतीं, जब तक कि उन्हें आधिकारिक सरकारी नीति न बनाया जाए।

सिचुएशन की गर्मी में दिया गया बयान (Heat of the Situation)

  • अदालत ने अवलोकन किया कि मुख्यमंत्री का यह बयान कि ‘राज्य गरीबों का किराया भरेगा’, 29 मार्च 2020 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था।
  • कानूनी आधार का अभाव: कोर्ट ने कहा, “यह बयान स्पष्ट रूप से उस समय की गंभीर स्थिति (कोविड लॉकडाउन) के बीच दिया गया था और इसके पीछे कोई कानूनी प्रावधान या वित्तीय आकलन नहीं था।”
  • आधिकारिक दस्तावेज की कमी: आश्वासन को किसी लिखित आदेश, अधिसूचना (Notification), सर्कुलर या आधिकारिक ज्ञापन (OM) में नहीं बदला गया, जिसके बिना इसकी कोई कानूनी शक्ति नहीं है।

2021 के सिंगल जज के फैसले को पलटा

  • जुलाई 2021 में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने कहा था कि मुख्यमंत्री का वादा ‘चुनावी जुमला’ नहीं है और सरकार को इस पर 6 हफ्ते में फैसला लेना चाहिए। लेकिन डिवीजन बेंच ने इसे खारिज कर दिया।
  • वित्तीय प्रभाव: “इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मुख्यमंत्री या अधिकारियों ने इस वादे के वित्तीय परिणामों या सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ का आकलन किया था।”
  • असंभव कार्य: कोर्ट ने संदेह जताया कि देश जिस स्थिति में था, क्या एक दिन के भीतर ऐसा कोई वित्तीय आकलन संभव भी था।

Distinction between Political Speech and Executive Order

श्रेणीस्थिति (Status)प्रवर्तनीयता (Enforceability)
चुनावी रैली का वादाराजनीतिक बयानकानूनी रूप से लागू नहीं
प्रेस कॉन्फ्रेंस (बिना नीति के)सीएम का आश्वासनलागू नहीं किया जा सकता (इस फैसले के अनुसार)
अधिसूचना/सर्कुलरकार्यकारी आदेशकानूनी रूप से लागू

‘राजनीतिक बयान’ बनाम ‘सीएम का बयान’

  • अदालत ने दिल्ली सरकार की उस दलील को भी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया कि यह केवल एक राजनीतिक बयान था।
  • गंभीरता: कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान को “हल्के में खारिज” नहीं किया जा सकता। एक निर्वाचित व्यक्ति जब पद पर रहते हुए कुछ कहता है, तो उसकी गरिमा होती है, लेकिन उसे लागू करने के लिए एक उचित सरकारी प्रक्रिया (Policy Decision) की आवश्यकता होती है।

मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए स्थिति

  • किराया वसूली: चूंकि उस समय दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने मकान मालिकों को किराया मांगने से रोका था और उस आदेश को कभी चुनौती नहीं दी गई, इसलिए मकान मालिक लॉकडाउन अवधि का किराया प्रवासी किरायेदारों से अब वसूल नहीं सकते।

निष्कर्ष: शासन (Governance) बनाम भाषण

यह फैसला स्पष्ट करता है कि सुशासन में केवल घोषणाएं काफी नहीं हैं; उन्हें कानून का रूप देना अनिवार्य है। अदालत ने माना कि सरकार स्वतंत्र है कि वह इस पर कोई नीति बनाए या न बनाए, लेकिन अदालत उसे केवल एक मौखिक बयान के आधार पर सरकारी खजाना खोलने का आदेश नहीं दे सकती।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
24.1 ° C
24.1 °
24.1 °
84 %
2kmh
3 %
Fri
30 °
Sat
29 °
Sun
31 °
Mon
33 °
Tue
33 °

Recent Comments