Monday, May 18, 2026
HomeHigh CourtRight to Choice: लिव-इन रिलेशनशिप में धर्म बैरियर है या नहीं… इलाहाबाद...

Right to Choice: लिव-इन रिलेशनशिप में धर्म बैरियर है या नहीं… इलाहाबाद HC ने सुरक्षा का दिया आदेश

Right to Choice: इलाहाबाद हाई कोर्ट (प्रयागराज) ने इंटरफेथ लिव-इन रिलेशनशिप पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रगतिशील फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने सोनभद्र के एक इंटरफेथ जोड़े (काजल प्रजापति और उनके मुस्लिम साथी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। जोड़े ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दो अलग-अलग धर्मों के वयस्कों का आपसी सहमति से साथ रहना कोई अपराध नहीं है और इसे संविधान के तहत पूरी सुरक्षा प्राप्त है।

कोर्ट की बड़ी बात: “हम हिंदू-मुस्लिम नहीं, दो वयस्क देख रहे हैं”

  • अदालत ने धर्म से ऊपर उठकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी।
  • पहचान: “यह अदालत अलग-अलग धर्मों के याचिकाकर्ताओं को ‘हिंदू और मुस्लिम’ के रूप में नहीं, बल्कि दो ऐसे वयस्कों के रूप में देखती है, जो अपनी स्वतंत्र इच्छा और पसंद से लंबे समय से शांतिपूर्वक साथ रह रहे हैं।”
  • अधिकारों का हनन: निजी संबंधों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप व्यक्ति की ‘पसंद की स्वतंत्रता’ के अधिकार पर एक गंभीर अतिक्रमण है।

कानूनी आधार: क्या कहता है संविधान?

  • कोर्ट ने अपने फैसले में अनुच्छेद 14, 15 और 21 का हवाला देते हुए लिव-इन रिलेशनशिप की वैधता को स्पष्ट किया।
  • कोई प्रतिबंध नहीं: लिव-इन रिलेशनशिप किसी भी कानून के तहत न तो प्रतिबंधित है और न ही दंडनीय।
  • समानता: जाति, पंथ, लिंग या धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
  • पुलिस को निर्देश: कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं को कोई नुकसान पहुँचाया जाता है, तो कानून के अनुसार तुरंत कार्रवाई की जाए।

मामला क्या था? (The Threats & Protection)

  • पृष्ठभूमि: काजल और उनके साथी ने कोर्ट को बताया कि वे बालिग (Majors) हैं और अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं, लेकिन महिला का परिवार उन्हें परेशान कर रहा है।
  • पुलिस की भूमिका: सरकारी वकील ने पुष्टि की कि दोनों बालिग हैं और उनके खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं है। कोर्ट ने पुलिस को उनकी उम्र और आरोपों की जांच कर सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

निष्कर्ष: निजी स्वतंत्रता का सम्मान

यह फैसला उन जोड़ों के लिए एक बड़ी राहत है जो समाज या परिवार के डर से अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब दो वयस्क साथ रहने का फैसला करते हैं, तो राज्य या समाज को उनके निजी जीवन में दखल देने का कोई कानूनी हक नहीं है।

आगे क्या?

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह रुख उत्तर प्रदेश में ‘लव जेहाद’ जैसे विवादों और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
mist
31 ° C
31 °
31 °
74 %
3.1kmh
0 %
Mon
44 °
Tue
43 °
Wed
44 °
Thu
46 °
Fri
45 °

Recent Comments