केस एवं कानून सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल |
| संबंधित कानून | टेलीऑपरेशंस/टेलीकम्यूनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 20(2) व संविधान का अनुच्छेद 21 |
| मुख्य मुद्दा | सीबीआई द्वारा अवैध तरीके से फोन टैप कर सबूत जुटाना |
| कोर्ट का आदेश | इंटरसेप्शन आदेश रद्द, टैप किए गए डेटा को नष्ट करने का निर्देश; बाकी सबूतों पर ट्रायल जारी रहेगा। |
Right to Privacy: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फोन टैपिंग और कॉल इंटरसेप्शन (Call Interception) पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि टेलीफोन वायरटैपिंग संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त निजता के मौलिक अधिकार (Right to Privacy) पर एक गंभीर प्रहार है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 (Telecommunications Act, 2023) की धारा 20(2) के तहत तय की गई वैधानिक प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाना अनिवार्य है।
सीबीआई (CBI) के फोन इंटरसेप्शन आदेश को किया रद्द
यह टिप्पणी ‘श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च’ (SRISMR), रायपुर के अध्यक्ष रविशंकर जी महाराज से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई के दौरान आई।
अदालत ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत फोन टैपिंग के आदेशों को रद्द (Set Aside) कर दिया और इंटरसेप्ट की गई सभी कॉल रिकॉर्डिंग व सामग्रियों को नष्ट करने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार के हलफनामे में उजागर हुई बड़ी लापरवाही
- मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर टेलीकॉम सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे से पता चला कि गृह मंत्रालय (MHA) का पुष्टि आदेश (Confirmation Order) 4 जुलाई 2025 को जारी हुआ था, जिसमें 1 जून से 31 जुलाई 2025 तक की अवधि को कवर किया गया था।
- यानी पुष्टि आदेश मूल अनधिकृत अवधि शुरू होने के लगभग एक महीने बाद जारी किया गया था और इसे पिछली तारीख से लागू (Retrospective Effect) करने की कोशिश की गई थी।
उच्च न्यायालय की मुख्य टिप्पणी
खंडपीठ का निर्णय: “नियमों के तहत मिलने वाली पुष्टि (Confirmation) केवल पुष्टिकारी प्रकृति की होती है; यह पिछली तारीखों से क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का निर्माण नहीं कर सकती। इंटरसेप्शन से जुड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं का केवल नाममात्र नहीं, बल्कि कड़ाई से (Strict Compliance) पालन किया जाना चाहिए।”
प्राथमिकी (FIR) और चार्जशीट रद्द नहीं, बाकी सबूतों पर चलेगा केस
- आरोप: याचिकाकर्ता पर स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अधिकारियों के साथ मिलकर रिश्वत, फर्जी फैकल्टी (Ghost Faculty) और नकली मरीजों के दम पर मेडिकल कॉलेज की अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट हासिल करने की साजिश का आरोप था। सीबीआई का मामला मुख्य रूप से फोन टैपिंग पर टिका था।
- ट्रायल जारी रहेगा: याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील मनु शर्मा ने निष्पक्ष रुख अपनाते हुए एफआईआर या चार्जशीट को रद्द करने पर जोर नहीं दिया और कहा कि उनके मुवक्किल अन्य सबूतों के आधार पर मुकदमे (Trial) का सामना करने के लिए तैयार हैं।
- अदालत का फैसला: कोर्ट ने सहमति व्यक्त करते हुए अवैध फोन टैपिंग के सबूतों को खारिज कर दिया, लेकिन बाकी जांच सामग्री के आधार पर मामले की सुनवाई/ट्रायल जारी रखने की अनुमति दी।

