Sunday, September 20, 2026
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SC News: जब किसी का बच्चा खोता है तो यह दर्द और पीड़ा मौत से भी बुरा होता है…बच्चा चोरी पर टिप्पणी

SC News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यदि किसी अस्पताल से नवजात शिशु की तस्करी होती है, तो उस अस्पताल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर लाइसेंस निलंबित करें।

बच्चों की चोरी की घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने मंगलवार को ने दिल्ली-एनसीआर में अस्पतालों में हो रही बच्चों की चोरी की घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की है। सभी राज्यों के लिए बाल तस्करी को रोकने और उससे संबंधित अपराधों की रोकथाम हेतु एक दिशानिर्देशों का सेट जारी किया है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह पूरे देश में, खासकर माता-पिता को यह संदेश देना चाहती है कि उन्हें अपने बच्चों के प्रति अत्यंत सतर्क और सावधान रहना चाहिए। उनकी थोड़ी सी लापरवाही या असावधानी भारी पड़ सकती है। जब किसी का बच्चा मर जाता है, तो माता-पिता समय के साथ ईश्वर की इच्छा मान लेते हैं। मगर जब बच्चा खो जाता है और नहीं मिलता, तो यह दर्द और पीड़ा जीवन भर बनी रहती है। यह मौत से भी बुरा होता है।

मानव तस्करी पर तैयार की गई रिपोर्ट का अध्ययन करें

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे भारतीय अनुसंधान और विकास संस्थान (BIRD), नई दिल्ली की मानव तस्करी पर तैयार की गई रिपोर्ट का अध्ययन करें। सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस रिपोर्ट का पूरा अध्ययन करें और उसमें दी गई प्रत्येक सिफारिश को लागू करने की दिशा में उपयुक्त कदम उठाएं। दरअसल, एक नवजात की तस्करी के मामले में अखबार में छपी रिपोर्ट पर शीर्ष कोर्ट ने संज्ञान लिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मामले में रिपोर्ट तलब की है। पूछा कि अस्पतालों से बच्चा चोरी करने वाले गिरोह से निपटने के लिए उनकी ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

दिशा-निर्देशों के पालन में लापरवाही को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना माना जाएगा…

पीठ ने बच्चों की तस्करी को रोकने और इस तरह के केसों से निपटने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को निर्देश जारी किया है कि वे इस संदर्भ में अपने अधीन निचली अदालतों को आदेश जारी करें कि वे बच्चों की तस्करी से जुड़े मामलों में 6 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करें। ऐसे मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करते हुए उनमें प्रतिदिन सुनवाई की जाए। ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस रद्द करें। इन दिशा-निर्देशों के पालन में लापरवाही को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बाल तस्करी के मामलों में आरोपियों को दी गई जमानत पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और उनकी जमानत रद्द कर दी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर 2025 में करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के एक मामले में आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए दिल्ली-एनसीआर में बच्चों की तस्करी से जुड़े गैंग के होने की एक खबर पर संज्ञान लिया है। यूपी में बच्चों की तस्करी के मामले में 18 केसों में 13 आरोपी थे। इनमें बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े गिरोह के अलावा, दो नर्स और बच्चे को खरीदने वाले नि:संतान दंपती भी शामिल थे। बेंच ने कहा, हम सभी आरोपियों की जमानत को रद्द कर रहे हैं। सभी आरोपी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करें। पुलिस आत्मसमर्पण न करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे।

फैसले में कहा गया

हम देश के सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश देते हैं कि वे बाल तस्करी से संबंधित लंबित मुकदमों की स्थिति की आवश्यक जानकारी प्राप्त करें। इसके बाद, प्रत्येक हाई कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से संबंधित ट्रायल कोर्टों को यह निर्देश दे कि वे छह महीने के भीतर मुकदमे पूरे करें। आवश्यकता होने पर केस की प्रतिदिन सुनवाई कर निपटारा करें।

कोर्ट ने आगे निर्देश दिया:

इसके बाद, प्रत्येक हाई कोर्ट इस कोर्ट को एक रिपोर्ट भेजे कि इन निर्देशों का पालन कितना हुआ। यदि किसी भी प्राधिकरण की ओर से इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया या कोई भी लापरवाही पाई गई, तो इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक हुआ तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

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