मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- लंबी उड़ान में भोजन का न मिलना:जसप्रीत सिंह की पत्नी, उनकी 11 महीने की बच्ची और सास ने 4 मार्च 2020 को दिल्ली से मेलबर्न के लिए सिंगापुर एयरलाइंस से उड़ान भरी। जसप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि 15-16 घंटे की लंबी यात्रा के दौरान एयरलाइंस कर्मचारियों ने उनके परिवार को उचित भोजन नहीं दिया, और यहाँ तक कि उनकी 11 महीने की बच्ची के लिए दूध भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
- एयरलाइंस का रुख और जिला आयोग का फैसला (2023):एयरलाइंस ने दलील दी कि यात्री की ओर से ‘शाकाहारी’ या किसी ‘विशेष भोजन’ का कोई अग्रिम अनुरोध दर्ज नहीं कराया गया था।
- रूपनगर जिला उपभोक्ता आयोग (Ropar District Commission) ने जनवरी 2023 में एयरलाइंस को ₹1.25 लाख का पूरा टिकट किराया 7% ब्याज के साथ वापस करने, ₹25,000 का मुआवजा और ₹11,000 कानूनी खर्च देने का आदेश दिया था।
- राज्य आयोग में एयरलाइंस की अपील:सिंगापुर एयरलाइंस ने इस आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की।
राज्य उपभोक्ता आयोग के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
1. “विशेष भोजन की मांग न होना एयरलाइंस को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता”:
राज्य आयोग ने सिंगापुर एयरलाइंस के इस बचाव को खारिज करते हुए कहा: “यह तथ्य कि यात्री ने विशेष भोजन का विकल्प नहीं चुना था, का अर्थ यह नहीं है कि एयरलाइंस को हवाई यात्रा का हिस्सा बनने वाली साधारण भोजन सेवा प्रदान करने के अपने मूल कर्तव्य से छूट मिल जाती है, विशेषकर तब जब यात्रा 15-16 घंटे की हो।”
2. साक्ष्यों का अभाव:
- आयोग ने नोट किया कि एयरलाइंस ऐसा कोई पर्याप्त सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रही, जिससे यह साबित हो सके कि यात्रियों को उड़ान के दौरान पर्याप्त भोजन और पेय पदार्थ परोसे गए थे।
3. पूरा टिकट किराया रिफंड न करने का कारण:
- हालांकि, राज्य आयोग ने जिला आयोग के पूरा टिकट किराया (₹1.25 लाख) रिफंड करने के आदेश में संशोधन किया।
- आयोग का मानना था कि चूंकि यात्रियों ने अपनी गंतव्य यात्रा पूरी कर ली थी, इसलिए पूरा टिकट रिफंड करना एक असंगत दंड होगा। यह मामला पूरी उड़ान सेवा में विफलता का नहीं, बल्कि इन-फ्लाइट (सहायक) सेवाओं में कमी का है।
चंडीगढ़: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में उड़ान के दौरान अनुषंगी सेवाओं (In-flight / Ancillary Services) में कमी, लंबी दूरी की उड़ानों (Long-Haul Flights) में एयरलाइंस का खान-पान संबंधी वैधानिक दायित्व, ‘विशेष भोजन’ (Special Meal) के विकल्प का अभाव बनाम ‘नियमित भोजन’ (Ordinary Meal) की अनिवार्य आपूर्ति, तथा पूर्ण किराया वापसी बनाम आनुपातिक हर्जाने के निर्धारण पर पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC, पंजाब) ने एक महत्वपूर्ण एवं नजीरपरक फैसला सुनाया है।
राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायिक सदस्य एच.पी.एस. महल और सदस्य किरण सिबल की पीठ ने रोपड़ (रूपनगर) जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के खिलाफ सिंगापुर एयरलाइंस द्वारा दायर प्रथम अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया।
राज्य आयोग ने जिला फोरम द्वारा दिए गए पूरे टिकट किराए (₹1.25 लाख) की 7% ब्याज सहित वापसी के आदेश को संशोधित करते हुए एयरलाइंस को ₹50,000 का समेकित हर्जाना (मानसिक उत्पीड़न व मुकदमा खर्च सहित) 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को अदा करने का निर्देश दिया। आयोग ने दो-टूक व्यवस्था दी कि यदि किसी यात्री ने शाकाहारी या विशेष भोजन का पूर्व अनुरोध नहीं भी किया था, तब भी एयरलाइंस लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा में सामान्य भोजन और शिशु के लिए दूध उपलब्ध कराने के अपने बुनियादी कर्तव्य से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
राज्य उपभोक्ता आयोग के मुख्य विधिक निष्कर्ष एवं सिद्धांत
1. ‘विशेष भोजन का विकल्प न चुनना नियमित भोजन के दायित्व को समाप्त नहीं करता’
न्यायिक सदस्य एच.पी.एस. महल और सदस्य किरण सिबल की पीठ ने एयरलाइंस के उस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यात्रियों ने टिकट बुकिंग के समय शाकाहारी या विशेष भोजन का चयन नहीं किया था: “यह तथ्य कि किसी यात्री ने विशेष भोजन (Special Meal) का विकल्प नहीं चुना था, इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि एयरलाइन हवाई यात्रा के अभिन्न अंग के रूप में सामान्य भोजन सेवा (Ordinary Meal Service) प्रदान करने के अपने बुनियादी कर्तव्य से मुक्त हो जाती है—विशेष रूप से तब जब यात्रा 15 से 16 घंटे की लंबी अवधि की रही हो।”
अदालत ने पाया कि सिंगापुर एयरलाइंस यह साबित करने में विफल रही कि उसने उड़ान के दौरान यात्रियों को नियमित मेनू से पर्याप्त और उचित भोजन परोसा था।
2. 11 महीने के दुधमुंहे बच्चे के साथ यात्रा की कठिनाई की उपेक्षा अस्वीकार्य:
- पीठ ने इस मानवीय पहलू को गंभीरता से लिया कि यात्रा करने वाले यात्रियों में शिकायतकर्ता की पत्नी, सास और एक 11 महीने की दुधमुंही बच्ची शामिल थी:“लगभग 15–16 घंटे की लंबी यात्रा के दौरान हुई असुविधा और कठिनाई—विशेषकर 11 महीने के बच्चे के साथ यात्रा कर रहे यात्री के मामले में—को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज या खारिज नहीं किया जा सकता।”
- शिकायतकर्ता ने स्पष्ट आरोप लगाया था कि स्टाफ ने नवजात बच्ची के लिए दूध तक उपलब्ध कराने में असंवेदनशीलता दिखाई, जिससे परिवार को भारी मानसिक और शारीरिक यातना झेलनी पड़ी।
3. पूर्ण किराया वापसी बनाम आनुपातिक हर्जाने का न्यायशास्त्र:
- जिला फोरम, रोपड़ ने पूरी टिकट राशि (₹1.25 लाख) ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था।
- राज्य आयोग ने इस पर विधिक अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि यात्रियों ने वास्तव में दिल्ली से मेलबर्न तक की अपनी हवाई यात्रा पूरी की थी। अतः यह ‘हवाई परिवहन सेवा की पूर्ण विफलता’ (Complete Failure of Transportation) का मामला नहीं है, बल्कि ‘इन-फ्लाइट सेवाओं के निष्पादन में कमी’ (Deficiency in Ancillary Services) का मामला है।
- ऐसे में पूरे टिकट का किराया वापस कराना एयरलाइंस के लिए एक असंगत और अत्यधिक कठोर दंड (Disproportionate Penalty) होगा। इसलिए आयोग ने राहत को तर्कसंगत बनाते हुए ₹50,000 का एकमुश्त समग्र मुआवजा तय किया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2020–2026)
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के तर्क |
| शिकायतकर्ता | जसप्रीत सिंह — जिनकी पत्नी, सास और 11 माह की बेटी ने सिंगापुर एयरलाइंस की कनेक्टिंग फ्लाइट से यात्रा की थी। |
| यात्रा विवरण | 4 मार्च 2020 को दिल्ली से मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) के बीच लगभग 15 से 16 घंटे की अंतरराष्ट्रीय उड़ान। |
| शिकायतकर्ता के आरोप | 1. 15 घंटे की लंबी उड़ान में परिवार को पर्याप्त और उचित भोजन नहीं दिया गया। 2. 11 महीने की दुधमुंही बच्ची के लिए गर्म दूध तक उपलब्ध कराने में केबिन क्रू ने इनकार किया। 3. 9 मार्च 2020 को औपचारिक ईमेल शिकायत पर एयरलाइंस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ‘वेज मील’ बुक नहीं था और ट्रैवल एजेंट से संपर्क करने को कहा। |
| सिंगापुर एयरलाइंस का बचाव | 1. यात्रियों ने टिकट बुक करते समय किसी ‘स्पेशल मील’ या शाकाहारी भोजन का चयन नहीं किया था। 2. उड़ान के दौरान यात्रियों को नियमित मेनू (Regular Menu) से भोजन उपलब्ध कराया गया था। 3. यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई, अतः सेवा में कोई बुनियादी कमी नहीं थी। |
| रोपड़ जिला फोरम का निर्णय (2023) | एयरलाइंस और ट्रैवल एजेंट को ₹1.25 लाख का पूरा किराया 7% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, ₹25,000 मानसिक संताप और ₹11,000 वाद व्यय देने का आदेश दिया। |
| राज्य आयोग का अंतिम निर्णय | जिला फोरम का किराया वापसी का आदेश संशोधित; एयरलाइंस का बचाव नामंजूर; सेवा में कमी के लिए ₹50,000 का समेकित हर्जाना 45 दिनों में अदा करने का आदेश। |
विधिक एवं उपभोक्ता न्यायशास्त्र: इन-फ्लाइट सेवाओं का वैधानिक दायित्व
- नागरिक उड्डयन नियम और संविदात्मक दायित्व:
- लंबी दूरी (8 घंटे से अधिक) की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में खान-पान और पानी की व्यवस्था कोई ‘वैकल्पिक विलासिता’ (Optional Luxury) नहीं है, बल्कि यह उड़ान सुरक्षा और यात्री अनुबंध का अनिवार्य हिस्सा है।
- एयरलाइंस यह तर्क नहीं दे सकती कि चूंकि यात्री ने ‘स्पेशल मील’ नहीं चुना, इसलिए उसे भूखा रखा जा सकता है। विशेष भोजन का विकल्प उन लोगों के लिए होता है जिन्हें स्वास्थ्य या धार्मिक कारणों से विशिष्ट आहार की आवश्यकता होती है; अन्य सभी यात्रियों को सामान्य बोर्ड मेनू से भोजन मिलना उनका कानूनी अधिकार है।
- शिशु यात्रियों (Infant Passengers) के प्रति एयरलाइंस का विशेष दायित्व:
- जब कोई एयरलाइन किसी नवजात या शिशु के लिए टिकट जारी करती है, तो उसके संविदात्मक दायित्व में यह निहित होता है कि वह उड़ान के दौरान शिशु की बुनियादी आवश्यकताओं (जैसे दूध गर्म करना, स्वच्छ पानी) को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेगी। इसमें विफलता सीधे तौर पर घोर लापरवाही और सेवा में कमी है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- केस संदर्भ: सिंगापुर एयरलाइंस बनाम जसप्रीत सिंह व अन्य [प्रथम अपील – पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंडीगढ़]
- पीठ: एच.पी.एस. महल (न्यायिक सदस्य) एवं किरण सिबल (सदस्य)
- आदेश की तिथि: 7 अक्टूबर 2026
- संबद्ध निचली अदालत का आदेश: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रोपड़ (रूपनगर) [आदेश दिनांक: जनवरी 2023 – संशोधित]
- अनुपालन समय-सीमा: 45 दिनों के भीतर ₹50,000 का भुगतान अनिवार्य
विधिक प्रतिनिधित्व:
- अपीलकर्ता (सिंगापुर एयरलाइंस) की ओर से: अधिवक्ता आई.एस. कक्कड़ (Advocate IS Kakkar)
- शिकायतकर्ता / प्रत्यर्थी की ओर से: निजी पैरवी / अधिवक्ता
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 / 1986 — धारा 2(11) (‘सेवा में कमी’ / Deficiency in Service) एवं धारा 41 (राज्य आयोग के समक्ष अपील)
- विमानन विनियम (DGCA / IATA दिशानिर्देश) — लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्री सुविधा और खान-पान मानक
- संविदा अधिनियम, 1872 — धारा 73 (अनुषंगी संविदा भंग हेतु क्षतिपूर्ति)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- लंबी उड़ानों में खान-पान का बुनियादी कर्तव्य: ‘अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में विशेष भोजन का चयन न किया जाना एयरलाइंस को सामान्य भोजन सेवा प्रदान करने के मूल दायित्व से मुक्त नहीं करता; लंबी दूरी की उड़ानों में शिशु के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों को भोजन या दूध न देना सेवा में गंभीर कमी है, जिसके लिए एयरलाइन आनुपातिक मानसिक क्षतिपूर्ति देने हेतु पूर्णतः उत्तरदायी है।’
- अंतिम परिणाम: सिंगापुर एयरलाइंस की अपील आंशिक रूप से स्वीकार; टिकट किराए की पूरी वापसी का आदेश रद्द; सेवा दोष और मानसिक प्रताड़ना के लिए कुल ₹50,000 का समेकित हर्जाना 45 दिनों के भीतर भरने का आदेश पारित।
Singapore Airlines:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित आयोग | पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग |
| पीठ | न्यायिक सदस्य एच.पी.एस. महल एवं सदस्य किरण सिबल |
| विमान सेवा प्रदाता | सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines) |
| शिकायतकर्ता | जसप्रीत सिंह (जिनकी पत्नी, 11 महीने की बेटी और सास ने यात्रा की थी) |
| उड़ान का विवरण | दिल्ली से मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया), 4 मार्च 2020 (यात्रा समय: 15-16 घंटे) |
| मुख्य मुद्दा | 15 घंटे की लंबी उड़ान में भोजन और 11 महीने की बच्ची के लिए दूध न देना। |
| आयोग का आदेश | जिला आयोग द्वारा दिया गया पूरा टिकट रिफंड रद्द; एयरलाइंस को ₹50,000 का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश। |

