Friday, July 10, 2026
HomeConsumer NewsSocial Media Ban: सोशल मीडिया यूजर जान लें…फेक नाम से भी अकाउंट...

Social Media Ban: सोशल मीडिया यूजर जान लें…फेक नाम से भी अकाउंट चलाया तो रद्द होगी जमानत, मर्फ्ड फोटो अपलोड करने पर यह हुआ मामला

Social Media Ban: अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके किसी नाबालिग लड़की की गरिमा से खिलवाड़ करता है, तो उसे सबक सिखाना और समाज को संदेश देना जरूरी है।

नाबालिग लड़की की मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीर इंटरनेट पर किया अपलोड

डिजिटल युग में सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद अनोखा और कड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने एक नाबालिग लड़की की मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीर इंटरनेट पर अपलोड करने के आरोपी को नियमित जमानत देते हुए उसके सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर 3 साल का पूर्ण प्रतिबंध (Social Media Ban) लगा दिया है। आरोपी को जमानत तो दी जा रही है, लेकिन वह अगले 3 साल तक फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट जैसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। यदि उसने अपने असली या किसी भी फर्जी (Fictitious) नाम से सोशल मीडिया चलाया, तो निचली अदालत उसकी जमानत तुरंत रद्द कर देगी।

मामला क्या है?: अश्लीलता और सोशल मीडिया का दुरुपयोग

यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत दर्ज ‘दृश्यरतिकता’ (Voyeurism) और आईटी एक्ट के अपराधों से जुड़ा है।

घटनाक्रम: आरोपी तुलसा राम उर्फ तुषार (Tulsa Ram @ Tushar) के खिलाफ 12 फरवरी को एक नाबालिग लड़की की मॉर्फ्ड फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को 2 अप्रैल को गिरफ्तार किया था।

बचाव पक्ष की दलील: आरोपी के वकील विक्रम सिंह जैतावत ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वह अप्रैल से जेल में बंद है और मुकदमे की सुनवाई (Trial) जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।

वकील का अनोखा प्रस्ताव: सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने खुद कोर्ट के सामने एक बड़ा बयान दिया कि “यदि माननीय अदालत को लगता है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ है, तो वह आरोपी के सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगा सकती है।”

हाई कोर्ट का आदेश: कोर्ट रूम में शपथ पत्र देना होगा

जस्टिस अशोक कुमार जैन ने आरोपी की कस्टडी अवधि और ट्रायल में लगने वाले समय को देखते हुए उसे जमानत का हकदार माना, लेकिन साथ ही समाज में एक कड़ा संदेश देने के लिए कड़ी शर्तें लागू कर दीं।

फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट सब बंद

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया कि आवेदक-आरोपी को ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) के सामने एक हलफनामा/शपथ पत्र (Affidavit/Undertaking) पेश करना होगा कि वह अगले तीन वर्षों की अवधि के लिए फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram), थ्रेड्स (Threads), स्नैपचैट (Snapchat) आदि सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेगा।

फर्जी नाम (Fake ID) भी बनाई तो सीधे जेल

अदालत ने चालाकी की गुंजाइश को खत्म करते हुए साफ कहा, यदि यह पाया जाता है कि आरोपी अपने खुद के नाम पर या किसी भी काल्पनिक/फर्जी नाम (Fictitious Name) से किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है, तो ट्रायल कोर्ट स्वयं इस जमानत आदेश को वापस (Recall/Cancel) ले सकती है और उसे दोबारा जेल भेज सकती है। अदालत में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता का पक्ष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार गहलोत के साथ अधिवक्ता ओम प्रकाश चौधरी और अवार दान उज्ज्वल ने रखा।

केस शीट: राजस्थान उच्च न्यायालय निर्देश (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और शर्तें
संबंधित अदालतराजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर बेंच)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अशोक कुमार जैन (एकल पीठ)
मामले का शीर्षकतुलसा राम उर्फ तुषार बनाम राजस्थान राज्य (Tulsa Ram @ Tushar v State of Rajasthan)
संबंधित धाराभारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77 (Voyeurism) व अन्य
अनोखी शर्त3 साल तक सोशल मीडिया चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध।
शर्त उल्लंघन का नतीजाफर्जी आईडी से भी अकाउंट चलाने पर ट्रायल कोर्ट तुरंत जमानत रद्द कर जेल भेजेगी।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
34.4 ° C
34.4 °
34.4 °
53 %
1.7kmh
100 %
Fri
37 °
Sat
32 °
Sun
32 °
Mon
31 °
Tue
33 °

Recent Comments