Special Marriage Act: उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक महिला के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है।
जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल करके फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाया
हाईकोर्ट के जस्टिस वी. नरसिंह की एकल पीठ ने आरोपी महिला पुष्पांजलि स्वाइन (Puspanjali Swain) द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी हस्तलेख विशेषज्ञ (Handwriting Expert) की रिपोर्ट और मैरिज रजिस्ट्रेशन में पायी गईं प्रक्रियात्मक खामियां निचली अदालत में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं। महिला पर आरोप है कि उसने एक व्यक्ति के जाली हस्ताक्षर (Forged Signature) का इस्तेमाल कर विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act) के तहत फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाया और फिर खुद को पत्नी बताकर अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) का आदेश भी हासिल कर लिया।
क्या है पूरा मामला? धोखे से हस्ताक्षर और फर्जी शादी का खेल
जालसाजी का आरोप: यह कानूनी विवाद पुष्पांजलि स्वाइन और शोभन कुमार साहू (Shovan Kumar Sahoo) नाम के व्यक्ति के बीच का है। पुष्पांजलि पर आरोप है कि उसने शोभन कुमार से एक सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित करने के बहाने उनके हस्ताक्षर लिए। बाद में, उन्हीं हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर 16 जनवरी 2020 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत एक फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट तैयार करवा लिया। शोभन ने पुष्पांजलि के साथ किसी भी तरह की शादी से पूरी तरह इनकार किया है।
भरण-पोषण का आदेश: खुद को शोभन की पत्नी बताते हुए पुष्पांजलि ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत गुजारा भत्ता, मुआवजे और रहने की जगह के लिए याचिका दायर की। 4 मई 2022 को एसडीजेएम (SDJM), भुवनेश्वर ने महिला को ₹7,000 प्रति माह का अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश सुना दिया।
पुलिस जांच और चार्जशीट: अंतरिम आदेश के बाद, पीड़ित शोभन ने मई 2022 में एसपी (Puri) से शिकायत की और नवंबर 2022 में पुरी टाउन पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद 11 जनवरी 2025 को चार्जशीट दाखिल की, और 18 जनवरी 2025 को एसडीजेएम, पुरी ने इसका संज्ञान (Cognizance) लिया।
हाई कोर्ट का विधिक रुख: हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट बनी मुख्य आधार
उच्च न्यायालय ने मामले को रद्द न करने के पीछे मुख्य विधिक और वैज्ञानिक तर्कों को रेखांकित किया।
वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) भारी पड़ा
पुलिस जांच के दौरान सरकारी दस्तावेज परीक्षक (Government Examiner of Questioned Documents) से शोभन के हस्ताक्षरों की जांच कराई गई थी। विशेषज्ञ की रिपोर्ट में साफ हुआ कि मैरिज सर्टिफिकेट से जुड़े दस्तावेजों पर मौजूद शोभन के कथित हस्ताक्षर, उनके वास्तविक और नमूना (Specimen) हस्ताक्षरों से बिल्कुल मेल नहीं खाते।
कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन
जांच रिपोर्ट (Chargesheet) में यह भी पाया गया कि उक्त विवाह के पंजीकरण में विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत तय की गई अनिवार्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।
अदालत का निष्कर्ष: जब प्रथम दृष्टया (Prima Facie) धोखाधड़ी और जालसाजी को साबित करने वाले ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद हों, तो उच्च न्यायालय को आपराधिक कार्यवाही को शुरुआती चरण में ही रद्द करने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अब इस मामले का पूरा ट्रायल एसडीजेएम (SDJM), पुरी की अदालत में चलेगा।
केस मैट्रिक्स और विधिक धाराएं (Case Overview)
| कानूनी बिंदु / श्रेणियां | उड़ीसा उच्च न्यायालय का विधिक विवरण (2026) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस वी. नरसिंह (उड़ीसा हाई कोर्ट) |
| मुख्य आरोपी | पुष्पांजलि स्वाइन (तथाकथित पत्नी) |
| लगाई गई आपराधिक धाराएं | आईपीसी (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) और 34 (समान इरादा) |
| दीवानी / पारिवारिक कार्यवाही | शोभन कुमार साहू ने विशेष विवाह अधिनियम की धारा 25(iii) के तहत शादी को ‘धोखाधड़ी के आधार पर’ शून्य (Annulment of Marriage) घोषित करने के लिए भुवनेश्वर फैमिली कोर्ट में अलग से याचिका दायर की है। |

