Stray Dogs: गुजरात हाई कोर्ट परिसर में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की बढ़ती तादाद और उनके आतंक को लेकर एक अभूतपूर्व कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।
रजिस्ट्रार जनरल को लिखे अपने पत्र
गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के दो बार अध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता आसिम पंड्या ने हाई कोर्ट प्रशासन को लिखित अल्टीमेटम दिया है कि वे परिसर से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाएं, अन्यथा वे हाई कोर्ट के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू करेंगे। रजिस्ट्रार जनरल को लिखे अपने 4 जून 2026 के पत्र में वरिष्ठ वकील ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि सार्वजनिक और संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों को रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आसिम पंड्या ने चेतावनी देते हुए लिखा, यदि इस पत्र के जवाब में तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो मैं गुजरात हाई कोर्ट के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ अदालत की अवमानना सहित उपयुक्त कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए बाध्य होऊंगा।
‘गॉड्स गवर्नेंस से डॉग्स डोमिनियन!’: हाई कोर्ट परिसर का हाल
सीनियर वकील ने अपने पत्र में दावा किया है कि वर्तमान में 25 से अधिक आवारा कुत्ते हाई कोर्ट की मुख्य इमारत, वकीलों के चैंबर्स और आसपास के परिसरों में खुलेआम घूम रहे हैं।
वकीलों को काटा, हर फ्लोर पर कब्जा: पत्र के अनुसार, कुछ महीने पहले हाई कोर्ट बिल्डिंग के भीतर ही एक वकील को आवारा कुत्ते ने काट लिया था। ये कुत्ते न केवल वकीलों के चैंबरों में घुस रहे हैं, बल्कि कोर्ट परिसर की हर मंजिल पर मौजूद रहते हैं।
गंदगी और हाइजीन की समस्या: पत्र में गंभीर आरोप लगाया गया है कि कुत्ते वकीलों के चैंबर भवनों, कोर्ट के गलियारों (Corridors) और लाइब्रेरी के पास मलमूत्र त्याग कर रहे हैं, जिससे कोर्ट परिसर में स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पुराना विरोध: पंड्या ने याद दिलाया कि उन्होंने नवंबर 2025 में भी ‘फ्रॉम गॉड्स गवर्नेंस टू डॉग्स डोमिनियन! द डॉग मेनेस हॉन्ट्स हाई कोर्ट ऑफ गुजरात’ शीर्षक से एक खुला पत्र लिखकर इस मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान खींचा था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट के 2026 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (19 मई 2026): वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपने पत्र का मुख्य आधार सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को बनाया है। In Re: City Hounded by Strays, Kids Pay Price (सुओ मोटो रिट पिटीशन नं. 5/2025) मामले में शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को लेकर कड़े निर्देश जारी किए थे।
संस्थानों में कुत्तों की कोई जगह नहीं: पंड्या ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट माना है कि जिन संस्थागत परिसरों (Institutional Premises) में भारी संख्या में आम लोगों की आवाजाही होती है, वहां आवारा कुत्तों की निरंतर मौजूदगी या उन्हें (नसबंदी के बाद) वापस छोड़े जाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट परिसरों का कार्यात्मक चरित्र ऐसा है कि वे सीधे तौर पर इस फैसले के दायरे में आते हैं।
वकीलों और स्टाफ के कुत्ते खिलाने (Feeding) पर रोक की मांग
असिम पंड्या ने हाई कोर्ट प्रशासन से मांग की है कि जब तक कुत्तों को परिसर से पूरी तरह बाहर नहीं कर दिया जाता, तब तक कोर्ट भवनों और वकीलों के चैंबर के पास कुत्तों को खाना खिलाने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाए।
खिलाने वालों की जिम्मेदारी: उन्होंने शरिया या सामान्य कानून के बजाय एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के रुख का हवाला देते हुए कहा कि हालांकि पशु प्रेमियों को खाना खिलाने का अधिकार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि यदि उनके द्वारा पाले या खिलाए गए कुत्ते किसी को काटते हैं या नुकसान पहुंचाते हैं, तो उसकी पूरी जवाबदेही (Liability) खाना खिलाने वाले की होगी। इसलिए, कोर्ट बिल्डिंग से दूर एक अलग फीडिंग जोन बनाया जाए और वहां कुत्तों को खाना खिलाने वाले वकीलों या स्टाफ से बाकायदा अंडरटेकिंग (Undertaking) ली जाए।
विश्लेषण: सीनियर वकील की मुख्य मांगें और संवैधानिक आधार
वरिष्ठ वकील आसिम पंड्या ने इस मामले को केवल एक प्रशासनिक शिकायत न रखते हुए इसे संवैधानिक रूप से बाध्यकारी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है।
| उठाई गई मांग / कानूनी बिंदु | इसका संवैधानिक और व्यावहारिक आधार |
| सुओ मोटो (Suo Motu) केस दर्ज हो | हाई कोर्ट अपने स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर एक जनहित याचिका दर्ज करे। |
| अनुच्छेद 141 और 144 का हवाला | संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून देश की सभी अदालतों और प्रशासनिक अधिकारियों पर बाध्यकारी है। चीफ जस्टिस प्रशासनिक मुखिया होने के नाते इसे लागू करने के लिए बाध्य हैं। |
| AMC से डेटा की मांग | अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) के साथ समन्वय कर यह जानकारी दी जाए कि परिसर के कितने कुत्तों का वक्सीनेशन, डीवॉर्मिंग या नसबंदी (Sterilisation) हुई है। |

