केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (जुलाई 2026) |
| माननीय निकाय | केरल उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Kerala Consumer Disputes Redressal Commission) |
| पीठ | सी. टी. साबू (अध्यक्ष), श्रीजा एस. एवं राम मोहन (सदस्य) |
| संबंधित कानून | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | एक्सपायर्ड उत्पाद बेचना सेवा में गंभीर कमी है; व्यापारियों को टिकाऊ और पठनीय बिल देना अनिवार्य है। |
| आयोग का निर्णय | ₹175 रिफंड + ₹10,000 मानसिक क्षतिपूर्ति + ₹5,000 कानूनी खर्च (कुल ₹15,175)। |
Unfair Trade: केरल उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Kerala Consumer Commission) ने एक कॉस्मेटिक स्टोर को 3 महीने पहले एक्सपायर हो चुका उत्पाद बेचने के मामले में सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) का दोषी पाया है।
अध्यक्ष सी. टी. साबू तथा सदस्य श्रीजा एस. एवं राम मोहन की पीठ ने अपने आदेश में स्टोर को उत्पाद के ₹175 रिफंड करने और उपभोक्ता को ₹15,000 का मुआवजा व कानूनी खर्च देने का निर्देश दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को यह उम्मीद करने का पूरा कानूनी अधिकार है कि खरीदे गए सौंदर्य प्रसाधन सुरक्षित, उपयोग योग्य और उनकी ‘शेल्फ लाइफ’ (Shelf Life) के भीतर हों।
उपभोक्ता आयोग की मुख्य टिप्पणियां
- स्वास्थ्य जोखिम और उपभोक्ता अधिकार:“एक एक्सपायर्ड कॉस्मेटिक उत्पाद बिक्री के योग्य नहीं होता। उपभोक्ता इस वैध उम्मीद के साथ सौंदर्य उत्पाद खरीदते हैं कि वे सुरक्षित, उपयोग योग्य और अपनी शेल्फ लाइफ के भीतर हैं। एक्सपायर्ड कॉस्मेटिक बेचना न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह उपभोक्ता को संभावित स्वास्थ्य जोखिमों (Health Hazards) के प्रति भी झोंकता है।”
- धुंधले/फीके पड़ने वाले बिलों पर हिदायत: आयोग ने कहा कि हालांकि यह साबित करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि बिल का फीका पड़ना जानबूझकर किया गया था, लेकिन व्यापारियों और दुकानों को ऐसे टिकाऊ और स्पष्ट बिल (Durable & Legible Bills) जारी करने चाहिए जिन्हें उपभोक्ता किसी भी विवाद के समय प्रमाण के रूप में सुरक्षित रख सकें।
मामला क्या था? (Case Background)
- खरीद और एक्सपायरी
- केरल की एक महिला ने 19 मार्च 2023 को स्टोर से ₹175 में ‘यार्डली लंदन इंग्लिश ब्लॉसम’ (Yardley London English Blossom) कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदा।
- घर जाकर चेक करने पर महिला ने पाया कि वह प्रोडक्ट 12 दिसंबर 2022 को ही एक्सपायर हो चुका था—यानी बिक्री की तारीख से तीन महीने से भी अधिक समय पहले।
- दुकानदार का अभद्र व्यवहार
- शिकायतकर्ता जब शिकायत लेकर दुकान पहुंची, तो कर्मचारियों ने गलती सुधारने के बजाय उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और कहा कि “चाहे तो जाकर केस कर दो।”
- इसके अलावा, दुकान द्वारा दिया गया प्रिंटेड बिल कुछ समय बाद इतना फीका पड़ गया कि उसकी लिखावट मिटने लगी। कानूनी नोटिस का जवाब न मिलने पर महिला ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
- एकतरफा सुनवाई (Ex-Parte Order)
- सुनवाई के दौरान स्टोर का कोई भी प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिससे महिला के दावों को चुनौती नहीं दी जा सकी। आयोग ने प्रस्तुत उत्पाद की प्रत्यक्ष जांच में पाया कि डिब्बे पर छपी एक्सपायरी डेट 12 दिसंबर 2022 ही थी।
⚖️ उपभोक्ता आयोग का अंतिम आदेश
महिला द्वारा माँगे गए ₹1 लाख के मुआवजे को अत्यधिक मानते हुए, आयोग ने गैर-जिम्मेदाराना व्यापारिक आदतों को हतोत्साहित करने के लिए निम्नलिखित राहत प्रदान की।
- उत्पाद की कीमत वापसी: ₹175 का पूरा रिफंड।
- मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा: ₹10,000 का मानसिक कष्ट और असुविधा हेतु मुआवजा।
- मुकदमा खर्च (Litigation Cost): ₹5,000 की अदालती लागत।
- स्पष्ट बिल जारी करने का निर्देश: विक्रेता को भविष्य में उपभोक्ताओं को स्पष्ट और टिकाऊ प्रिंटेड बिल देने की हिदायत दी गई।

