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मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी बिंदु
- विवाद की शुरुआत:अल्मोड़ा निवासी डॉ. रमेश सिंह दानू ने 18 जनवरी 2023 को विशाल मेगा मार्ट से सामान खरीदा था। बिलिंग के दौरान ₹18 का कैरी बैग जोड़ा गया। दानू ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए जिला उपभोक्ता आयोग (अल्मोड़ा) का रुख किया, जिसे अगस्त 2024 में खारिज कर दिया गया था। इसके खिलाफ वे राज्य आयोग पहुँचे।
- विशाल मेगा मार्ट की दलील:स्टोर ने तर्क दिया कि बिलिंग काउंटर और स्टोर परिसर में कैरी बैग की कीमतों के बोर्ड लगाए गए हैं। ग्राहक अपना बैग खुद लाने के लिए स्वतंत्र हैं। शिकायतकर्ता ने बिना किसी विरोध के अपनी स्वेच्छा से ₹18 का बैग खरीदा था और उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया गया था।
- ‘बिग बाज़ार’ फैसले (Big Bazaar Landmark Case) से भिन्नता:शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) के 2020 के ऐतिहासिक फैसले (Big Bazaar v. Sahil Dawar) का हवाला दिया, जिसमें काउंटर पर बिना पूर्व सूचना के कैरी बैग का पैसा वसूलने को अनुचित व्यापार माना गया था।
- हालांकि, राज्य आयोग ने इस नज़ीर को अलग (Distinguish) करते हुए कहा कि बिग बाज़ार मामले में पूर्व सूचना का अभाव था, जबकि विशाल मेगा मार्ट ने स्पष्ट सूचना बोर्ड लगा रखे थे और शिकायतकर्ता ने जानकारी न होने का कोई दावा नहीं किया था।
मुख्य विधिक निष्कर्ष
1. सूचना का अधिकार एवं पारदर्शिता:
आयोग ने माना कि यदि कोई रिटेलर बिलिंग से पहले कैरी बैग की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है और ग्राहक के पास अपना बैग लाने का विकल्प रहता है, तो शुल्क लेना वैधानिक रूप से पूरी तरह सही है।
2. उपभोक्ता जागरूकता:
फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि ग्राहक को बिलिंग के समय ही कैरी बैग शुल्क का विरोध करने या उसे लेने से इनकार करने का अधिकार है। स्वेच्छा से खरीदने के बाद अनुचित व्यापार व्यवहार का दावा पोषणीय नहीं होगा।
देहरादून/अल्मोड़ा: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) की धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार / Unfair Trade Practice की वैधानिक परिभाषा), धारा 41 (राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का अपीलीय क्षेत्राधिकार), राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (NCDRC) के नज़ीरी फैसले बिग बाजार (फ्यूचर रिटेल लिमिटेड) बनाम साहिल डावर (2020) के विधिक भेद (Distinguishing Precedent), तथा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत कैरी बैग के मूल्य निर्धारण पर उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने खुदरा व्यापार क्षेत्र के लिए एक अत्यंत स्पष्ट और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (Uttarakhand State Consumer Disputes Redressal Commission) की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कुमकुम रानी (President Kumkum Rani) और सदस्य बी.एस. मनराल (Member BS Manral) की पीठ ने विशाल मेगा मार्ट द्वारा कैरी बैग के लिए ₹18 चार्ज किए जाने के खिलाफ ग्राहक डॉ. रमेश सिंह दानू (Dr. Ramesh Singh Danu) द्वारा दायर अपील को पूरी तरह खारिज (Dismissed) कर दिया।
राज्य आयोग ने स्पष्ट विधिक व्यवस्था दी कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो खुदरा विक्रेताओं या दुकानदारों को ग्राहकों को अनिवार्य रूप से मुफ्त कैरी बैग देने के लिए बाध्य करता हो। जब स्टोर के भीतर और बिलिंग काउंटर पर सूचना पट्ट (Notice Boards) के माध्यम से स्पष्ट रूप से कैरी बैग के सशुल्क होने की जानकारी प्रदर्शित की गई हो और ग्राहक अपनी स्वेच्छा से बैग खरीदता है, तो इसके लिए राशि वसूलना किसी भी प्रकार से ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) या सेवा में कमी की श्रेणी में नहीं आता।
राज्य उपभोक्ता आयोग के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां
1. ‘मुफ्त कैरी बैग देने का कोई कानूनी दायित्व नहीं; कोई ऐसा कानून अस्तित्व में नहीं’:
अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य बी.एस. मनराल की पीठ ने खुदरा विक्रेता के दायित्वों का विश्लेषण करते हुए अपने 30 अक्टूबर के आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया: *”यह सुस्थापित विधिक सिद्धांत है कि दुकानदार कैरी बैग उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं है, और वह भी बिना किसी लागत (Free of cost) के। ऐसा कोई कानून नहीं है जो ग्राहक को अनिवार्य रूप से मुफ्त कैरी बैग प्रदान करने का आदेश देता हो (There is no law which mandates providing free carry bag to the customer)।*
जब तक किसी कानून या वैधानिक नियम द्वारा मुफ्त आपूर्ति अनिवार्य न की गई हो, तब तक व्यापारी द्वारा किसी वस्तु (कैरी बैग) की लागत वसूलना अपने आप में अवैध नहीं ठहराया जा सकता।”
2. ‘ग्राहक ने अपनी मर्जी से बैग खरीदा; कोई बाध्यता या गलत बयानी नहीं थी’:
- आयोग ने शिकायतकर्ता के आचरण और बिलिंग काउंटर के तथ्यों का परीक्षण करते हुए कहा:“शिकायतकर्ता ने अपनी स्वतंत्र इच्छा (At his own free will) से कैरी बैग खरीदना चुना था। न तो शिकायतकर्ता का यह दावा है कि उसे बैग खरीदने के लिए विवश किया गया था, और न ही उसने बिलिंग काउंटर पर इस शुल्क का कोई विरोध किया था।शिकायतकर्ता का यह भी मामला नहीं है कि उसे इस बात से अवगत नहीं कराया गया था कि कैरी बैग की लागत वसूली जाएगी या बिलिंग काउंटर पर स्टोर एग्जीक्यूटिव द्वारा उसके साथ किसी प्रकार का छल या गलत बयानी (Misrepresentation) की गई थी।”
3. बिग बाजार (NCDRC 2020) के ऐतिहासिक फैसले से विधिक भेद:
- आयोग ने रेखांकित किया कि NCDRC ने बिग बाजार बनाम साहिल डावर में तब हर्जाना लगाया था जब स्टोर ने ग्राहकों को पहले से यह नहीं बताया था कि वे अपना बैग ला सकते हैं या काउंटर पर अचानक बिना पूर्व सूचना के पैसे जोड़ दिए गए थे।
- वर्तमान मामले में, विशाल मेगा मार्ट ने स्टोर में जगह-जगह स्पष्ट नोटिस बोर्ड लगाए थे कि बैग सशुल्क हैं और ग्राहक अपना निजी थैला लाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं; अतः बिग बाजार का फैसला इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में लागू नहीं होता।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (2023–2026)
| संदर्भ / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| फोरम / न्यायालय | उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, देहरादून (अपीलीय क्षेत्राधिकार) |
| पीठ | अध्यक्ष कुमकुम रानी (President Kumkum Rani) एवं सदस्य बी.एस. मनराल (Member BS Manral) |
| आदेश की तिथि | 30 अक्टूबर 2026 (सार्वजनिक विवरण नवंबर 2026 में जारी) |
| केस संदर्भ | डॉ. रमेश सिंह दानू बनाम विशाल मेगा मार्ट [First Appeal No. … / 2024] |
| अपीलकर्ता (ग्राहक) | डॉ. रमेश सिंह दानू (Dr. Ramesh Singh Danu) — अल्मोड़ा, उत्तराखंड के निवासी। |
| प्रतिवादी (दुकानदार) | विशाल मेगा मार्ट (Vishal Mega Mart) — शाखा माल रोड, अल्मोड़ा। |
| घटना का विवरण (18 जनवरी 2023) | अपीलकर्ता ने अल्मोड़ा स्थित विशाल मेगा मार्ट आउटलेट से घरेलू उपयोग का ₹1,435 मूल्य का सामान खरीदा। कैशियर द्वारा दिए गए अंतिम कैश मेमो/बिल में सामान के अलावा एक कैरी बैग के मद में ₹18 का अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया था। |
| उपभोक्ता की कानूनी कार्यवाही | बिल में ₹18 देखकर ग्राहक ने स्टोर को कानूनी नोटिस भेजा। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अल्मोड़ा में परिवाद दायर कर ₹18 की वापसी और मानसिक प्रताड़ना हेतु हर्जाने की मांग की। |
| जिला उपभोक्ता आयोग का आदेश (अगस्त 2024) | जिला आयोग ने पाया कि स्टोर परिसर में ग्राहकों की जानकारी हेतु प्रमुखता से बोर्ड लगे थे कि कैरी बैग सशुल्क हैं और ग्राहक अपना बैग साथ ला सकते हैं। शिकायतकर्ता ने बिलिंग के समय कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। अतः जिला आयोग ने परिवाद खारिज कर दिया था। |
| अपील में ग्राहक का मुख्य विधिक तर्क | राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) के 2020 के बहुचर्चित निर्णय बिग बाजार (फ्यूचर रिटेल लिमिटेड) बनाम साहिल डावर का हवाला दिया गया, जिसमें NCDRC ने कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया था। |
| राज्य आयोग का अंतिम आदेश | जिला आयोग के आदेश की पुष्टि; अपील खारिज (Dismissed); खुदरा विक्रेता द्वारा ₹18 वसूलना विधि सम्मत माना गया। |
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: ‘अनुचित व्यापार व्यवहार बनाम उपभोक्ता की स्वैच्छिक सहमति’
- NCDRC के ‘बिग बाजार’ फैसले की सटीक विधिक स्थिति:
- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने वर्ष 2020 में बिग बाजार के खिलाफ फैसला सुनाते हुए यह नहीं कहा था कि कैरी बैग बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- NCDRC का मुख्य आधार यह था कि बिग बाजार ग्राहकों को अपना निजी बैग स्टोर के अंदर ले जाने से रोकता था (सुरक्षा कारणों से टोकन काउंटर पर जमा करा लेता था) और फिर बिलिंग काउंटर पर ग्राहक के पास बिग बाजार का लोगो लगा सशुल्क कैरी बैग खरीदने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं बचता था।
- उत्तराखंड राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि जहाँ स्टोर ग्राहक को अपना बैग लाने की पूरी छूट देता है और दरों की पूर्व सूचना बोर्ड पर अंकित होती है, वहाँ जबरन थोपने (Coercion) का तत्व समाप्त हो जाता है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47):
- ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ साबित करने के लिए यह आवश्यक है कि व्यापारी ने किसी वस्तु की बिक्री बढ़ाने के लिए कोई भ्रामक दावा किया हो, जानकारी छुपाई हो, या ग्राहक पर अनुचित दबाव डाला हो।
- यदि कोई व्यापारी अपनी लागत पर खरीदे गए कपड़े, जूट या उच्च-माइक्रोन प्लास्टिक बैग को उसके घोषित मूल्य पर बेचता है और ग्राहक उसे स्वेच्छा से स्वीकार करता है, तो यह दो पक्षों के बीच एक सामान्य और वैध वस्तु-विक्रय संविदा (Contract of Sale of Goods) है।
- पर्यावरण नीति और मुफ्त बैग का आर्थिक प्रभाव:
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पीछे की विधिक भावना भी यही रही है कि मुफ्त में पॉलीथिन या कैरी बैग बांटने से लोग अत्यधिक उपयोग करते हैं, जिससे कचरा बढ़ता है।
- जब किसी बैग की कीमत तय होती है, तो उपभोक्ता स्वयं अपना पुन: प्रयोज्य (Reusable) थैला घर से लाने के लिए प्रेरित होता है। आयोग का यह फैसला पर्यावरणीय नीति के साथ भी सामंजस्य स्थापित करता है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- न्यायालय / फोरम: उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, देहरादून (अपीलीय क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: डॉ. रमेश सिंह दानू बनाम विशाल मेगा मार्ट [First Appeal / Consumer / 2026]
- पीठ: अध्यक्ष कुमकुम रानी (President Kumkum Rani) एवं सदस्य बी.एस. मनराल (Member BS Manral)
- आदेश की तिथि: 30 अक्टूबर 2026
- कार्यवाही का परिणाम: अपील निरस्त; जिला उपभोक्ता आयोग अल्मोड़ा के आदेश की पुष्टि; ₹18 का कैरी बैग शुल्क वैध ठहराया गया।
विधिक प्रतिनिधित्व:
- अपीलकर्ता (ग्राहक डॉ. रमेश सिंह दानू) की ओर से: अधिवक्ता चंद्र कला (Advocate Chandra Kala)।
- प्रतिवादी (विशाल मेगा मार्ट) की ओर से: अधिवक्ता राहुल गुप्ता (Advocate Rahul Gupta)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019):
- धारा 2(47) — अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice)
- धारा 35 — जिला आयोग में परिवाद दाखिल करने की प्रक्रिया
- धारा 41 — राज्य आयोग के समक्ष अपील
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (Indian Contract Act, 1872) — स्वतंत्र सहमति (Free Consent) के तहत वस्तुओं का क्रय-विक्रय
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 सहपठित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019):
- संबद्ध विधिक सिद्धांत:
- खुदरा बिक्री में कैरी बैग मूल्य निर्धारण का विधिक मानक: ‘कानून में ऐसा कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है जो किसी खुदरा विक्रेता या दुकानदार को ग्राहकों को मुफ्त में कैरी बैग उपलब्ध कराने के लिए बाध्य करता हो; यदि किसी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान द्वारा स्टोर परिसरों और बिलिंग काउंटरों पर कैरी बैग के सशुल्क होने की दरों का स्पष्ट प्रदर्शन (Prominent Prior Notice) किया गया हो, और ग्राहक अपना निजी थैला लाने के लिए स्वतंत्र हो, तो ग्राहक की स्वतंत्र सहमति से कैरी बैग का उचित मूल्य वसूलना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(47) के तहत ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ नहीं माना जा सकता; NCDRC का बिग बाजार सिद्धांत केवल तभी लागू होता है जब बिना पूर्व सूचना और बिना विकल्प के जबरन काउंटर पर शुल्क थोपा गया हो।’
- वर्तमान स्थिति व बाजार पर प्रभाव: इस निर्णय के बाद उत्तराखंड और उत्तर भारत के खुदरा स्टोरों (जैसे सुपरमार्केट्स, रिटेल चेन्स और डिपार्टमेंटल स्टोर्स) को बड़ी कानूनी राहत मिली है; यह साफ हो गया है कि यदि वे अपने स्टोरों में कैरी बैग की दरों और ‘अपना थैला लाएं’ के स्पष्ट साइनबोर्ड लगाते हैं, तो कैरी बैग के ₹5 से ₹20 तक के शुल्क को उपभोक्ता अदालतों में अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
Vishal Mega Mart: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित आयोग | उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Uttarakhand State Consumer Commission) |
| पीठ | अध्यक्ष कुमकुम रानी एवं सदस्य बी.एस. मनराल |
| मामला/साइटेशन | डॉ. रमेश सिंह बनाम विशाल मेगा मार्ट (Dr. Ramesh Singh Vs Vishal Mega Mart) |
| शिकायतकर्ता (Appellant) | डॉ. रमेश सिंह दानू (अल्मोड़ा निवासी) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता चंद्र कला |
| प्रतिवादी पक्ष | विशाल मेगा मार्ट (अल्मोड़ा आउटलेट) | प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता राहुल गुप्ता |
| मूल विवाद | 18 जनवरी 2023 को ₹1,435 की खरीदारी पर ₹18 का कैरी बैग चार्ज वसूलने के खिलाफ अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप। |
| अदालत का अंतिम निर्णय | अपील खारिज: जिला उपभोक्ता आयोग (अल्मोड़ा) के फैसले को बरकरार रखा गया; दुकानदारों पर मुफ्त कैरी बैग देने की कोई वैधानिक बाध्यता नहीं। |

