Friday, June 19, 2026
HomeHigh CourtWestern Culture: भागने वाले जोड़े परिवारों का नाम खराब करते हैं, माता-पिता...

Western Culture: भागने वाले जोड़े परिवारों का नाम खराब करते हैं, माता-पिता को भी कैसे करते हैं बेईज्जत…फैसले से यूं समझाया

Western Culture: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और पारिवारिक गरिमा के मध्य कानूनी व सामाजिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

अविवाहित जोड़े की पुलिस सुरक्षा की मांग वाली याचिका खारिज

अदालत ने घर से भागकर लिव-इन में रह रहे एक अविवाहित जोड़े की पुलिस सुरक्षा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज का एक हिस्सा ऐसी “पश्चिमी संस्कृति” (Western Culture) को अपनाने लगा है, जो भारतीय संस्कृति से पूरी तरह भिन्न है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 केवल भागने वाले जोड़ों को ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता को भी समाज में शांति, सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ जीने का मौलिक अधिकार देता है। घर से भागकर यह जोड़ा न केवल अपने परिवार की बदनामी करा रहा है, बल्कि अपने माता-पिता के सम्मान से जीने के अधिकारों का भी उल्लंघन कर रहा है।

मामला क्या था? (पटियाला के वयस्क जोड़े की गुहार और विधिक अड़चन)

जोड़े का दावा: यह मामला पंजाब के पटियाला जिले के एक जोड़े से जुड़ा है जिन्होंने सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे दोनों वयस्क (Adult) हैं, एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और भविष्य में विवाह करना चाहते हैं। वर्तमान में वे लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।

उत्पीड़न का आरोप: जोड़े ने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार वाले उनके रिश्ते के खिलाफ हैं, उन्हें परेशान कर रहे हैं और लड़के को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने 1 जून को पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को प्रतिवेदन भेजकर सुरक्षा की मांग की थी।

उम्र का विधिक पेंच: अदालत ने मामले के दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया कि लड़का अभी विवाह की विधिक आयु (21 वर्ष) तक नहीं पहुंचा है। याचिका में खुद यह स्वीकार किया गया था कि लड़का जब 21 वर्ष का हो जाएगा, तब वे विवाह करेंगे।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ बनाम ‘अवैध संबंध’

अदालत ने जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप की विधिक वैधता और सामाजिक मूल्यों पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

केवल कुछ दिन साथ रहने से रिश्ता ‘लिव-इन’ नहीं हो जाता

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी रिश्ते को विधिक रूप से ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का दर्जा देने और उसे पवित्रता प्रदान करने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। केवल कुछ दिनों के लिए साथ रहने और कोरे दावों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वे वास्तव में लिव-इन में रह रहे हैं।

विधिक विवाह के योग्य होना अनिवार्य (Pre-requisites for Live-in)

सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप के लिए यह आवश्यक है कि जोड़ा समाज के सामने खुद को पति-पत्नी की तरह पेश करे और वे कानूनी रूप से विवाह करने के योग्य (Legal Age to Marry) होने चाहिए। चूंकि इस मामले में लड़का विवाह की कानूनी उम्र का नहीं था, इसलिए कोर्ट ने कहा, ऐसी स्थिति में पुलिस को सुरक्षा का निर्देश देना परोक्ष रूप से एक ‘अवैध संबंध’ (Illicit Relationship) को हमारी न्यायिक स्वीकृति देने जैसा होगा। अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता की गारंटी जरूर देता है, लेकिन यह स्वतंत्रता कानून के दायरे के भीतर (Within the ambit of law) होनी चाहिए।

माता-पिता का सम्मान ‘Jus in Rem’ (सार्वभौमिक अधिकार) है

अदालत ने पारिवारिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां परंपराएं, रीति-रिवाज और नैतिक मूल्य ही कानून के आवश्यक स्रोत हैं। विवाह एक कानूनी और सामाजिक सम्मान वाला पवित्र रिश्ता है। कोर्ट ने कहा, अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रतिष्ठा अक्षुण्ण रखने का अधिकार है। यह एक ‘जस इन रेम’ (Jus in Rem) है, यानी पूरी दुनिया के खिलाफ मिला एक वैध अधिकार। माता-पिता का सम्मान से जीने का अधिकार अत्यंत पवित्र है और बच्चे घर से भागकर अपने माता-पिता के इस मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकते।

विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)

विधिक बिंदुपंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का विधिक रुख
याचिकाकर्तापटियाला का एक अविवाहित जोड़ा (जिसमें लड़का विवाह की विधिक उम्र से छोटा था)।
विपक्षी पक्षलड़की के परिवार वाले और पंजाब पुलिस।
विधिक मांगजान-माल की सुरक्षा के लिए अनुच्छेद 21 के तहत पुलिस सुरक्षा की गुहार।
न्यायालय का मुख्य निष्कर्षविवाह की विधिक आयु प्राप्त किए बिना और बिना ठोस आधार के लिव-इन का दावा विधिक रूप से मान्य नहीं।
प्रतिष्ठा का सिद्धांतबच्चों का कृत्य माता-पिता के सम्मान से जीने के अधिकार (Right to Dignity) का उल्लंघन करता है।
अदालत का अंतिम आदेशपुलिस सुरक्षा देने से साफ इनकार, याचिका पूरी तरह खारिज।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
37 ° C
37 °
37 °
35 %
3.6kmh
86 %
Fri
37 °
Sat
44 °
Sun
44 °
Mon
44 °
Tue
45 °

Recent Comments