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Women in Bar: 30% महिला आरक्षण लागू करें वरना बार एसोसिएशन होगी सस्पेंड…सुप्रीम कोर्ट की देश भर की अदालती संस्थाओं को अंतिम चेतावनी

Women in Bar: सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशनों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि यह आदेश केवल हाई कोर्ट बार एसोसिएशनों के लिए ही नहीं, बल्कि तालुका और जिला स्तर की बार एसोसिएशनों के साथ-साथ टैक्स और रेरा (RERA) जैसे विशेष निकायों पर भी लागू होगा। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी बार एसोसिएशन अपनी कार्यकारी समितियों (Executive Committees) में 30% महिलाओं का प्रतिनिधित्व लागू नहीं करेंगे, उन्हें निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा और वहां नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे।

कोर्ट की सख्त चेतावनी (The Stern Warning)

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में “वर्ड ऑफ कौशन” (चेतावनी भरे शब्द) का इस्तेमाल किया।
  • निलंबन का खतरा: जिन बार एसोसिएशनों ने 13 मार्च, 2026 के पिछले आदेश का पालन नहीं किया है या भविष्य में इसकी अनदेखी करेंगे, उन्हें न्यायिक आदेश के माध्यम से निलंबित कर दिया जाएगा।
  • ताजा चुनाव: निलंबन के बाद उन संस्थाओं में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नए चुनाव कराए जाएंगे।
  • रिपोर्ट तलब: सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि वे अपने राज्यों की ऐसी बार एसोसिएशनों की सूची सौंपें जो इस नियम को लागू करने में आनाकानी कर रही हैं।

चुनाव नहीं तो ‘मनोयन’ (Nomination) का रास्ता

कोर्ट ने एक व्यावहारिक समस्या का समाधान भी निकाला। अगर किसी बार एसोसिएशन में महिला वकील चुनाव नहीं लड़ती हैं या उनकी संख्या कम है, तो 30% के लक्ष्य को पूरा करने के लिए खाली सीटों को मनोनयन (Nomination) के जरिए भरा जाएगा। यह नामांकन संबंधित हाई कोर्ट के एडमिनिस्ट्रेटिव (पोर्टफोलियो) जज द्वारा किया जाएगा। जज इसके लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, निर्वाचित पदाधिकारियों और बार की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्यों से परामर्श करेंगे। नामांकित महिला सदस्यों का कार्यकाल निर्वाचित सदस्यों के साथ ही समाप्त होगा।

महिला प्रतिनिधित्व का क्रमिक विकास (Timeline)

  • सुप्रीम कोर्ट 2024 से लगातार इस दिशा में कदम उठा रहा है।
  • दिसंबर 2025: स्टेट बार काउंसिल में 30% सीटों का आरक्षण अनिवार्य किया गया (20% चुनाव से, 10% सह-चयन से)।
  • जनवरी 2026: सभी हाई कोर्ट से अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) मांगी गई।
  • मार्च 2026: जिला जजों को महिलाओं को नामित करने की अनुमति दी गई (जिसे अब संशोधित कर पोर्टफोलियो जज की सलाह से किया गया है)।

आदेश के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
लक्ष्यहर बार एसोसिएशन की गवर्निंग बॉडी में 30% महिला सदस्य।
क्षेत्रतालुका, जिला, हाई कोर्ट और विशेष बार (Tax, RERA आदि)।
अनुपालन न करने पर सजाबार एसोसिएशन का निलंबन और पुनर्मतदान।
अगली सुनवाई12 मई, 2026

कानूनी पेशे में लैंगिक न्याय (Gender Justice)

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश बार एसोसिएशनों में मौजूद ‘ओल्ड बॉयज क्लब’ वाली संस्कृति को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रहार है। कोर्ट का मानना है कि जब तक बार के नेतृत्व में महिलाएं नहीं होंगी, तब तक कानूनी पेशे में समावेशी बदलाव नहीं आ सकता। अब गेंद बार एसोसिएशनों के पाले में है—या तो वे महिलाओं को जगह दें, या फिर निलंबन के लिए तैयार रहें।

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