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At A Glance | एक नज़र में बड़ी ख़बर
- यमुना अथॉरिटी की बड़ी जांच: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की जांच में यमुना सिटी में किसानों के लिए आरक्षित आवासीय भूखंड प्राप्त करने के लिए फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है।
- फर्जी किसान बने बाहरी निवेशक: पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 52 बाहरी निवेशकों द्वारा स्थानीय किसान बनकर आवेदन करने की बात सामने आई है।
- सैटेलाइट से हुआ पर्दाफाश: 88 आवेदनों की गहन जांच में केवल 13 पात्र पाए गए, जबकि 75 आवेदनों को खारिज कर दिया गया। इसके लिए 2010 से 2012 की ऐतिहासिक सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite Imagery) का सहारा लिया गया।
- कब्जा दिखाने के लिए अस्थायी निर्माण: जांच में पाया गया कि बाहरी लोगों ने कृषि भूमि खरीदकर उस पर रातों-रात अस्थायी ढाँचे खड़े कर दिए ताकि उसे वर्षों पुराना रिहाइशी मकान साबित किया जा सके।
- कड़े कानूनी निर्देश: YEIDA के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने साफ किया है कि पुनर्वास का लाभ केवल वास्तविक विस्थापित किसानों को मिलेगा, सट्टेबाजी के मकसद से जमीन खरीदने वालों को नहीं।
ग्रेटर नोएडा / नई दिल्ली: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास के कारण बढ़ी जमीनी कीमतों ने सट्टेबाजों को फर्जीवाड़े का नया जरिया दे दिया है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की एक उच्चस्तरीय जांच में इसका बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि यमुना सिटी के फेज-I के करीब 30 गांवों में विस्थापित स्थानीय किसानों को मिलने वाले पुनर्वास आवासीय भूखंडों (Residential Plots) को हथियाने के लिए 52 बाहरी निवेशकों ने खुद को स्थानीय किसान बताकर झूठे दावे पेश किए थे।
सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite Evidence) से कैसे खुला राज?
प्राधिकरण को शिकायतें मिल रही थीं कि बाहरी लोग भू-माफियाओं के साथ मिलकर पुनर्वास नीति का गलत फायदा उठा रहे हैं। YEIDA ने फेज-1 के 30 गांवों से आए 88 आवासीय प्लॉट स्थानांतरण/विस्थापन दावों की विस्तृत जांच शुरू की।
इसके तहत प्राधिकरण ने केवल कागजातों की ही नहीं, बल्कि वर्ष 2010 से 2012 के बीच की ऐतिहासिक सैटेलाइट इमेजरी (Historical Satellite Imagery) और भू-अभिलेखों (Land Records) की गहन पड़ताल की:
[88 कुल प्राप्त आवेदन]
│
├──> [13 पात्र आवेदन] ──► (वास्तविक विस्थापित स्थानीय किसान)
│
└──> [75 अपात्र/खारिज आवेदन]
│
├──► 52 बाहरी निवेशक (जो खुद को स्थानीय किसान बता रहे थे)
│
└──► 23 केस (जहां या तो ढांचा था ही नहीं या अधिसूचना के बाद अवैध निर्माण किया गया)
- 52 बाहरी निवेशक: सैटेलाइट और रेसिडेंसी डाक्यूमेंट्स की क्रॉस-चेकिंग में पाया गया कि ये 52 आवेदक संबंधित क्षेत्र के मूल निवासी या किसान थे ही नहीं।
- 23 अवैध/अस्थायी निर्माण: बाकी 23 मामलों में अधिकारियों ने पाया कि जमीन पर कोई निर्माण था ही नहीं, या फिर प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद रातों-रात अस्थायी ढांचे (Temporary Constructions) खड़े कर दिए गए थे।
कैसे रचा गया फर्जीवाड़े का पूरा ताना-बाना?
जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण यमुना सिटी में जमीनों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बात का फायदा उठाने के लिए बाहरी निवेशकों ने स्थानीय किसानों से कृषि भूमि खरीदी।
उनका मुख्य मकसद सिर्फ कृषि भूमि का मालिक बनना नहीं था, बल्कि भविष्य में प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित जमीनों के बदले मिलने वाले आवासीय भूखंडों और पुनर्वास लाभों (Rehabilitation Benefits) को भुनाना था। अपनी रिहाइशी मौजूदगी साबित करने के लिए इन्होंने जमीनों पर शेड, झोपड़ी या अस्थायी दीवारें खड़ी कर दीं ताकि सैटेलाइट में पुराना रिहाइशी ढांचा दिखाया जा सके। हालांकि, प्राधिकरण की सैटेलाइट टाइम-लाइन जांच ने इस चालाकी की पोल खोल दी।
YEIDA सीईओ का सख्त रुख: “सट्टेबाजों को नहीं मिलेगा किसानों का हक”
YEIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) राकेश कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले वास्तविक भूमि स्वामियों और किसानों के लिए तय किए गए लाभों पर किसी भी बाहरी का हक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- दस्तावेज़ और वास्तविक स्थिति ही पैमाना: उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल जमीन का मालिकाना हक होने से कोई किसान कोटा के तहत पुनर्वास लाभ पाने का हकदार नहीं हो जाता। पात्रता का निर्धारण वैधानिक प्रावधानों, वास्तविक जमीनी स्थिति और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
- दोषियों पर होगी कानूनी कार्रवाई: नियम उल्लंघन और गलत जानकारी देकर सरकारी लाभ उठाने की कोशिश करने वाले 75 अपात्र आवेदकों के खिलाफ आगे की कानूनी/प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मुआवजा और लीज बैक के मामले भी प्रक्रिया में
आवासीय प्लॉटों की जांच से अलग, प्राधिकरण किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी कार्रवाई कर रहा है:
- 64.7% अतिरिक्त मुआवजा: किसानों को बांटे जाने वाले 64.7% अतिरिक्त मुआवजे को लेकर सुरक्षा ग्रुप (Suraksha Group) से जुड़े बकाए पर प्राधिकरण ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाया है।
- लीज़-बैक आवंटन पर कार्रवाई: YEIDA ने पूर्व में भी लीज-बैक मामलों में नियमों की अनदेखी करने पर 97 आवंटन रद्द किए थे, जिनके खिलाफ दायर अपीलों की समीक्षा फिलहाल जारी है।
प्राधिकरण के इस सख्त कदम से स्पष्ट है कि यमुना सिटी में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बीच सट्टेबाजी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा ताकि केवल वास्तविक भूमिहीन और विस्थापित किसानों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
Key Indicators | मुख्य बिंदु और विवरण
| मुख्य बिंदु (Key Indicator) | विवरण एवं तथ्य (Details & Facts) |
| जांच एजेंसी/संस्था | यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) |
| क्षेत्र/स्थान | यमुना सिटी (फेज-I के 30 गांव) |
| कुल जांच किए गए आवेदन | 88 आवासीय प्लॉट दावे |
| पात्र व अपात्र आवेदन | 13 पात्र मिले, 75 आवेदन खारिज (Disqualified) |
| फर्जीवाड़ा करने वाले बाहरी | 52 बाहरी निवेशक (Non-local Investors) |
| सैटेलाइट तस्वीरों की अवधि | वर्ष 2010 से 2012 के ऐतिहासिक उपग्रह चित्र |
| प्राधिकरण प्रमुख (CEO) | राकेश कुमार सिंह |

