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At A Glance | एक नज़र में बड़ी ख़बर
- RTI से जानकारी देने से इनकार: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर के नाम और वर्जन का खुलासा करने से इनकार कर दिया है।
- छूट का कारण: चुनाव आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि यह जानकारी “व्यावसायिक गोपनीयता, ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा” (Commercial Confidence, Trade Secrets & Intellectual Property) के दायरे में आती है।
- स्वचालित प्रणालियों पर सवाल खारिज: एआई (AI), मशीन लर्निंग और स्वचालित निर्णय प्रणाली के उपयोग से जुड़े सवालों को खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि ये प्रश्न केवल ‘स्पष्टीकरण’ (Clarification) मांगते हैं, जो RTI अधिनियम की धारा 2(f) के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा में नहीं आते।
- कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं बनाया गया: आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR अभ्यास के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया है।
- अंतिम निर्णय EROs का: मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम अधिकार तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (Electoral Registration Officers – EROs) के पास ही रहता है।
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान विसंगतियों और गतियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर के नाम, संस्करण और इसके तकनीकी विवरण को उजागर करने से साफ इनकार कर दिया है। आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मिलने वाली छूट का हवाला देते हुए इन जानकारियों को “व्यावसायिक गोपनीयता, ट्रेड सीक्रेट्स और बौद्धिक संपदा (IPR)” करार दिया है।
यह खुलासा तेलंगाना आधारित सामाजिक कार्यकर्ता एम. ए. मुजीब अय्यूब द्वारा दायर की गई एक RTI अर्जी पर 16 अक्टूबर को आए आयोग के आधिकारिक जवाब से हुआ है।
आवेदक ने क्या-क्या सवाल पूछे थे?
सामाजिक कार्यकर्ता अय्यूब ने अपनी RTI अर्जी के माध्यम से चुनाव आयोग से निम्नलिखित तकनीकी और प्रक्रियात्मक जानकारियां मांगी थीं:
- सॉफ्टवेयर/एआई प्लेटफॉर्म का नाम: मतदाता डेटा में विसंगतियों की पहचान के लिए कौन सा सॉफ्टवेयर या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किया गया?
- स्वचालित फ्लैगिंग (Automated Flagging): क्या सिस्टम में AI, मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स के जरिए ऑटोमैटिक रूप से संदिग्ध मतदाताओं के रिकॉर्ड को चिन्हित किया गया?
- गलत पहचान से बचाव के उपाय: वैध मतदाताओं के नाम गलती से हटने या गलत पहचान (False Positives) से बचाने के लिए क्या-क्या सुरक्षा मानक लागू थे?
- समीक्षा अधिकारी: सॉफ्टवेयर द्वारा फ्लैग किए गए डेटा की अंतिम समीक्षा और स्वीकृति किस प्राधिकारी द्वारा की जाती थी?
चुनाव आयोग ने RTI का क्या दिया जवाब?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने आवेदक के सवालों का जवाब देते हुए निम्नलिखित वैधानिक दलीलें दी हैं:
1. धारा 8(1)(d) के तहत छूट लागू
आयोग ने सॉफ्टवेयर के विवरण देने से मना करते हुए RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) का उपयोग किया। इस धारा के तहत ऐसी किसी भी जानकारी को देने से छूट प्राप्त है जिससे किसी तीसरे पक्ष या संस्था की व्यावसायिक गोपनीयता (Commercial Confidence), ट्रेड सीक्रेट (Trade Secrets) या बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) का उल्लंघन होता हो।
2. ‘स्पष्टीकरण’ RTI के दायरे में नहीं (धारा 2(f))
AI, मशीन लर्निंग और ऑटोमेटेड निर्णय प्रणालियों के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर आयोग ने स्पष्ट किया कि ये प्रश्न धारा 2(f) के तहत ‘सूचना’ की श्रेणी में नहीं आते। आयोग का कहना था कि आवेदक आधिकारिक रिकॉर्ड मांगने के बजाय प्रक्रियात्मक स्पष्टीकरण (Clarification) मांग रहे हैं, जिसे RTI के तहत देना अनिवार्य नहीं है।
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│ RTI के तहत पूछे गए प्रश्न │
└───────────────┬────────────────┘
│
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┌────────────────────────┐ आयोग का जवाब ┌────────────────────────────┐
│सॉफ्टवेयर नाम व विवरण मांगा │ ──────────────► │ धारा 8(1)(d) लागू (ट्रेड सीक्रेट)│
└────────────────────────────────┘ └────────────────────────────┘
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┌────────────────────────┐ आयोग का जवाब ┌────────────────────────────────┐
│AI/ऑटोमेशन प्रक्रिया पर सवाल│ ──────────────► │ धारा 2(f) लागू (केवल स्पष्टीकरण)│
└────────────────────────────────┘ └────────────────────────────────┘
प्रक्रिया पर आयोग की सफाई: कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं, अधिकारी लेते हैं अंतिम निर्णय
RTI के अपने जवाब में चुनाव आयोग ने SIR अभ्यास की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
- कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं बनाया गया: ECI ने स्पष्ट किया कि SIR अभ्यास के संचालन के लिए अलग से कोई नया सॉफ्टवेयर न तो विकसित किया गया है और न ही खरीदा गया है।
- मानव अधिकार और वैधानिक प्रक्रिया: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) की धाराओं का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में किसी नागरिक का नाम शामिल करने या हटाने का अधिकार केवल निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (Electoral Registration Officers – EROs) के पास ही होता है।
- तथ्यों व रिकॉर्ड पर आधारित फैसले: EROs यह निर्णय पूरी तरह से साक्ष्यों, तथ्यों और भौतिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही लेते हैं, न कि किसी स्वचालित सॉफ्टवेयर निर्णय के आधार पर।
आगे का रास्ता और प्रतिक्रिया
आरटीआई आवेदक एम. ए. मुजीब अय्यूब ने आयोग के इस जवाब पर असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आयोग गलत धाराओं का हवाला देकर मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में उपयोग हो रही तकनीकों को छिपाने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने इस फैसले के खिलाफ प्रथम अपीलीय अधिकारी (First Appellate Authority) के समक्ष अपील दायर करने की बात कही है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ओ. पी. रावत ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आवेदक आयोग के जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं, तो उन्हें कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर करनी चाहिए।
SIR ROW: Key Indicators | मुख्य बिंदु और विवरण
| मुख्य बिंदु (Key Indicator) | विवरण एवं तथ्य (Details & Facts) |
| संबंधित संस्था | भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) |
| आरटीआई आवेदक | एम. ए. मुजीब अय्यूब (तेलंगाना के सामाजिक कार्यकर्ता) |
| आरटीआई जवाब की तारीख | 16 अक्टूबर |
| लागू की गई RTI धाराएं | धारा 8(1)(d) (ट्रेड सीक्रेट छूट) और धारा 2(f) (सूचना की परिभाषा) |
| विवाद का विषय | मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर |
| आयोग का मुख्य स्पष्टीकरण | मतदाता जोड़ने या हटाने का फैसला मानव/अधिकारी स्तर (ERO) पर ही होता है |

