Wednesday, August 19, 2026
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Binding Directions: NDPS केसों में विदेशी नागरिकों की जमानत और फर्जी जमानतियों पर रोक के लिए 13 बाध्यकारी निर्देश जारी…इसे ध्यान से पढ़ें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति संजय करोल एवं न्यायमूर्ति अगस्टीन जॉर्ज मसीह (Supreme Court)
मूल मामलाUnion of India v. Chidiebere Kingsley Nawchara
संवैधानिक प्रावधानसंविधान का अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय प्रदान करने की विशेष शक्ति)
प्रयोज्यता (Applicability)ये निर्देश केवल NDPS अधिनियम के तहत वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity) के मामलों में अभियुक्त विदेशी नागरिकों पर लागू होंगे।

Binding Directions: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) के तहत वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity) के नशीले पदार्थों के मामलों में अभियुक्त विदेशी नागरिकों के फर्जी जमानतियों (Fake Sureties) के सहारे रिहा होकर फरार होने की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति संजय करोल (Justice Sanjay Karol) और न्यायमूर्ति अगस्टीन जॉर्ज मसीह (Justice Augustine George Masih) की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए देशभर की अदालतों के लिए 13 बाध्यकारी निर्देश (Binding Directions) जारी किए हैं।

Binding Directions: 13 प्रमुख और बाध्यकारी निर्देश (Binding Directions)

  1. पासपोर्ट जमा करना: अभियुक्त विदेशी नागरिक का पासपोर्ट संबंधित परीक्षण अदालत (Trial Court) में जमा किया जाएगा। कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा पर पूर्ण रोक रहेगी।
  2. FRRO पंजीकरण: जमानत पर रिहा होने के 1 सप्ताह के भीतर आरोपी को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) में पंजीकरण कराना होगा और इसकी लिखित सूचना जांच अधिकारी एवं अदालत को देनी होगी।
  3. डिजिटल पोर्टल निर्माण: FRRO को संबंधित सरकारी विभागों के परामर्श से इस पंजीकरण प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया गया है।
  4. दो अनिवार्य जमानती (Two Sureties): विदेशी नागरिकों के लिए समान राशि के दो जमानती प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। कोर्ट इसे केवल तभी शिथिल कर सकती है जब लिखित में ठोस कारण दर्ज किए जाएं।
  5. 3-दिवसीय सत्यापन सीमा: जमानतियों का सत्यापन अधिकतम 3 दिनों में पूरा किया जाना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट अदालत के सामने पेश होने के बाद ही आरोपी की रिहाई होगी।
  6. भौतिक पते का पुनः सत्यापन: जमानत आदेश जारी होने के 3 दिनों के भीतर आरोपी के भारतीय पते और संपर्क ब्योरे का भौतिक रूप से पुनः सत्यापन (Physical Re-verification) करना होगा।
  7. आय और बैंक खाते का शपथ पत्र: अभियुक्त को भारत में अपने आय के स्रोतों/फंड्स और सभी बैंक खातों का ब्योरा देते हुए हलफनामा दायर करना होगा।
  8. दूतावास को सूचना: जांच अधिकारी (IO) को अभियुक्त के मूल देश के संबंधित दूतावास को मामले की औपचारिक लिखित जानकारी देनी होगी।
  9. केंद्रीयकृत डेटाबेस (NIC): कानून मंत्रालय और NIC मिलकर एक केंद्रीयकृत डेटाबेस बनाएंगे, जिसमें NDPS मामलों के विदेशी आरोपियों और उनके जमानतियों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा।
  10. लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई: यदि जमानती बाद में फर्जी पाया जाता है, तो सत्यापन करने वाले पुलिस, राजस्व या अदालती कर्मचारियों के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही के लिए विभागीय जांच (Departmental Inquiry) चलाई जाएगी।
  11. संपत्ति पर लीन (Lien on Property): जमानती की संपत्ति पर जमानत राशि के बराबर लीन/चार्ज बनाया जाएगा, जिसे जमानत शर्तों के उल्लंघन पर अदालत द्वारा जब्त/वसूल किया जा सकेगा।
  12. डिजिटल प्रॉपर्टी पोर्टल: सभी उच्च न्यायालयों की आईटी समितियां संपत्ति और वित्तीय दस्तावेजों के त्वरित सत्यापन के लिए डिजिटल पोर्टल बनाएंगी।
  13. BNSS में नया Form 47A: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के फॉर्म 47 के बाद नया Form 47A जोड़ा जाएगा, जो विदेशी नागरिकों के जमानत बॉन्ड का नया विस्तृत प्रारूप होगा।

Binding Directions: मामले की पृष्ठभूमि और वजह (Case Background)

  • मूल मामला: यह अपील केंद्र सरकार (Union of India) द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें नाइजीरियाई नागरिक चिडीबेरे किंग्सले नावचारा (Chidiebere Kingsley Nawchara) को लगभग 5 किलोग्राम हेरोइन जब्ती मामले में जमानत दी गई थी।
  • फर्जी जमानती का खुलासा: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाई, लेकिन आरोपी फरार हो चुका था। जांच (DRI) में पाया गया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए जमानती का पता, नियोक्ता और बैंक खाते पूरी तरह फर्जी व मनगढ़ंत थे।
  • व्यापक समस्या: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 38 और डीआरआई (DRI) की 9 जांचों में यह सामने आया कि विदेशी नागरिक फर्जी जमानतियों के बल पर रिहा होकर देश से फरार हो रहे हैं, जिससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के गैर-बाध्यकारी सुझाव (Non-Binding Suggestions)

  • कॉर्पोरेट/प्रोफेशनल जमानत प्रणाली: पेशेवर जमानत देने वाले व्यक्तियों (Professional Bail Bondsperson) या कॉर्पोरेट/LLP संस्थाओं के नियमन पर विचार किया जाए।
  • जिले स्तर पर समर्पित कर्मचारी: जमानत सत्यापन के लिए हर जिला अदालत में स्वतंत्र गवाहों के साथ समर्पित स्टाफ नियुक्त किया जाए।
  • जियो-फेंसिंग (Geo-fencing): पुट्टस्वामी निजता फैसले के मापदंडों के अधीन रहते हुए आरोपियों की ट्रैकिंग के लिए जियो-फेंसिंग तकनीक के इस्तेमाल पर विचार हो।
  • आधार सत्यापन: जमानतियों के त्वरित सत्यापन हेतु UIDAI नियमों के तहत आधार प्रमाणीकरण की अनुमति दी जाए।

(नोट: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये सभी बाध्यकारी निर्देश केवल NDPS अधिनियम के तहत वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity) से जुड़े विदेशी नागरिकों पर लागू होंगे, भारतीय नागरिकों या गैर-वाणिज्यिक मात्रा के मामलों पर नहीं)۔

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