Sunday, October 4, 2026
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Tax Addition: प्रॉपर्टी डीलर द्वारा बैंक में जमा ₹54 लाख नकद कर योग्य आय है या नहीं; ITAT दिल्ली ने जमा नकद पर करदाता को यह दी सीख

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
अपीलीय प्राधिकरणITAT, Delhi Bench (Pronounced: 30 July 2026)
संबंधित धाराएंIncome Tax Act Section 147/148
मुख्य विवादITR दाखिल किए बिना बैंक खाते में ₹54 लाख नकद जमा करने पर कर मांग।
अंतिम निर्णयमध्यस्थ के रूप में जमा की गई राशि साबित होने पर ₹54 लाख का टैक्स एडिशन रद्द; अपील स्वीकार।

Tax Addition: आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) की दिल्ली पीठ ने अनिल राठी बनाम आयकर अधिकारी (Anil Rathee vs ITO, ITA No. 3847/Del/2026) मामले में करदाता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ₹54,00,500 के कर समावेशन (Tax Addition) को रद्द कर दिया है।

ट्रिब्यूनल ने माना कि बैंक खाते में जमा किया गया नकद पैसा मध्यस्थ (Intermediary) के रूप में प्राप्त किया गया था और यह करदाता की अपनी व्यक्तिगत आय नहीं थी।

Tax Addition: अधिकरण का निष्कर्ष और निर्णय

  • मध्यस्थ की भूमिका प्रमाणित
    • ITAT Delhi Bench ने प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा के बाद स्पष्ट माना कि अनिल राठी ने केवल एक प्रॉपर्टी डीलर/मध्यस्थ के रूप में काम किया था। उन्होंने खरीदारों से नकद राशि ली, उसे अपने बैंक खाते में जमा किया और फिर बैनामा (Sale Deed) की रजिस्ट्री की सुविधा के लिए पूरी राशि मुख्य विक्रेताओं (सैलर्स) को स्थानांतरित कर दी।
  • ठोस साक्ष्य और ट्रेल
    • ट्रिब्यूनल ने पाया कि धन की प्राप्ति, बैंक में जमा और विक्रेताओं को हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया बैंक विवरण (Bank Statements), खरीदारों व विक्रेताओं के शपथ पत्रों (Affidavits), बैनामों की प्रतियों और पुनर्मिलन विवरण (Reconciliation Statement) द्वारा पूरी तरह से समर्थित थी।

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Tax Addition: मामले की पृष्ठभूमि

  1. 2011-12 का विवाद: वित्त वर्ष 2011-12 (AY 2012-13) के दौरान अनिल राठी ने अपने बैंक खाते में ₹54,00,500 की नकद राशि जमा की थी और आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया था।
  2. आयकर विभाग का पुनर्मूल्यांकन: आयकर विभाग ने सूचना मिलने के बाद धारा 147/148 के तहत पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही शुरू की और उचित जवाब न मिलने का हवाला देते हुए पूरी ₹54 लाख की राशि को अघोषित आय मानते हुए 16 दिसंबर 2019 को टैक्स एडिशन कर दिया।
  3. ट्रिब्यूनल में पेश सबूत: राठी ने ट्रिब्यूनल के समक्ष जिला सिंह और उनके परिवार (विक्रेताओं) के 3 हलफनामे, 8 बैनामे और 7 खरीदारों के शपथ पत्र प्रस्तुत किए, जिन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने विक्रेताओं को भुगतान करने के लिए राठी को नकद राशि दी थी।

Tax Addition: करदाताओं के लिए प्रमुख टेकअवे (Key Takeaway)

यह फैसला यह तय नहीं करता कि व्यक्तिगत खाते में जमा की गई नकद राशि स्वतः कर-मुक्त (Tax-Free) हो जाती है। ITAT का निर्णय पूरी तरह से स्पष्ट दस्तावेजी साक्ष्यों (Documentary Trail) पर आधारित था। यदि कोई करदाता किसी अन्य व्यक्ति की ओर से धन प्राप्त करता है, तो शपथ पत्र, बैंक ट्रेल और सौदे के कागजात यह साबित करने के लिए आवश्यक हैं कि वह राशि कर योग्य आय नहीं है।

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