मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| न्यायिक पीठ | ITAT Agra Bench (सुनील कुमार सिंह एवं ब्रजेश कुमार सिंह) |
| अपीलकर्ता | तेजप्रताप सिंह यादव |
| संबंधित धाराएं | Income Tax Act Section 199 एवं Rule 37BA |
| मुख्य बिंदु | बैंक की तकनीकी गलती से एक ही सह-मालिक के PAN पर कटे पूरे TDS को अन्य सह-मालिकों की सहमति से पूर्ण स्वीकृत किया जाना चाहिए। |
TDS Credit: आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) की आगरा पीठ ने करदाता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग को निर्देश दिया है कि वह किराएदार बैंक की गलती के बावजूद मकान मालिक को कटौती किए गए पूरे ₹4.06 लाख के स्रोत पर कर कटौती (TDS) का लाभ प्रदान करे।
अधिकरण की पीठ (सुनील कुमार सिंह, न्यायिक सदस्य और ब्रजेश कुमार सिंह, लेखा सदस्य) ने 30 जुलाई 2026 को तेजप्रताप सिंह यादव की अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।
TDS Credit: मामले का मुख्य विवरण और विवाद
- संयुक्त संपत्ति और बैंक की गलती
- याचिकाकर्ता तेजप्रताप सिंह यादव, उनकी मां (मृदुला यादव) और बहन (दीपाली यादव) ने एक संपत्ति भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को ₹40.62 लाख वार्षिक किराए पर पट्टे पर दी थी।
- तीनों सह-मालिकों ने अपने आयकर रिटर्न (ITR) में किराए की एक-तिहाई आय (₹13.54 लाख) घोषित की।
- हालांकि, किराएदार बैंक (SBI) ने गलती से कुल किराए का पूरा TDS (₹4,06,250) केवल तेजप्रताप यादव के PAN Card पर दाखिल कर दिया, जबकि इसे तीनों के नाम से 1/3 के अनुपात में विभाजित किया जाना चाहिए था।
- आयकर अधिकारी (AO) की कटौती
- आयकर अधिकारी ने यह तर्क देकर तेजप्रताप यादव को केवल ₹1,35,417 (1/3 हिस्सा) का TDS क्रेडिट दिया और शेष ₹2,70,833 का TDS क्रेडिट खारिज कर दिया कि उन्होंने कुल किराए का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही अपनी घोषित आय में दिखाया था।
TDS Credit: ITAT का मुख्य निष्कर्ष और कानूनी सिद्धांत
- तकनीकी बाधाओं से ऊपर न्याय का सिद्धांत:
- आयकर अधिनियम की धारा 199 और नियम 37BA का विश्लेषण करते हुए ITAT Agra Bench ने माना कि प्रक्रियात्मक नियमों का उद्देश्य न्याय प्रदान करना है, करदाताओं के जायज अधिकारों को छीनना नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि “तकनीकी न्याय कभी भी वास्तविक न्याय का स्थान नहीं ले सकता”।
- राजस्व द्वारा टैक्स का अनुचित प्रतिधारण अस्वीकार्य:
- अधिकरण ने टिप्पणी की कि अन्य दो सह-मालिकों ने अपने ITR में इस TDS का दावा नहीं किया था और उन्होंने तेजप्रताप यादव के पक्ष में शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे।
- ट्रिब्यूनल ने कहा: “टैक्स विभाग को ऐसा कोई भी अधिकार नहीं है कि वह काटा गया TDS अपने पास रख ले और उसका क्रेडिट किसी को भी न दे।”

