मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| मामले का नाम | कनिष्क पांडे बनाम भारत संघ एवं अन्य (Kanishka Pandey vs Union of India & Ors.) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता |
| मुख्य मांग | खेल को Article 21A के तहत मौलिक अधिकार बनाना और स्कूलों में इसे अनिवार्य करना। |
| अगली तारीख | 22 सितंबर 2026 |
Kehlo Kids: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के शारीरिक विकास और खेलकूद से जुड़ाव की महत्ता पर बल देते हुए कहा है कि मौजूदा डिजिटल युग में बच्चे खेल के मैदानों से पूरी तरह दूर होते जा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने स्कूलों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य खेल शिक्षा और शारीरिक गतिविधियों को शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
Kehlo Kids: पीठ और याचिका की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ कनिष्का पांडे बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।
यह याचिका मूल रूप से वर्ष 2017 में एक विधि छात्र द्वारा दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई है कि:
- संविधान के अनुच्छेद 21A (जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है) के तहत ‘खेल और शारीरिक साक्षरता के अधिकार’ को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए।
- स्कूलों के पाठ्यक्रम में खेल शिक्षा और शारीरिक गतिविधियों को अनिवार्य बनाया जाए।
- खेल संस्कृति और खेल मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधनों पर विचार करने हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दे की सराहना करते हुए कहा: “यह एक अत्यंत सराहनीय मांग है और पूरी तरह आवश्यक है। मौजूदा डिजिटल युग में बच्चे खेल के मैदानों से पूरी तरह दूर होते जा रहे हैं।”
अदालत ने कहा कि स्कूलों में अनिवार्य खेल पाठ्यक्रम बच्चों और खेल गतिविधियों के बीच बढ़ती इस दूरी को पाटने में मददगार साबित हो सकता है।
एमिकस क्यूरी के महत्वपूर्ण सुझाव
मामले में अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पूर्व में निम्नलिखित प्रमुख सुझाव दिए थे:
- संवैधानिक दायित्व: राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) और अनुच्छेद 21A में संशोधन कर राज्य पर खेल गतिविधियों और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का दायित्व डाला जाए।
- समय का आवंटन: सीबीएसई (CBSE) और आईसीएसई (ICSE) जैसे स्कूली शिक्षा बोर्डों को स्कूल के समय में से कम से कम 90 मिनट शारीरिक गतिविधियों के लिए अनिवार्य रूप से आवंटित करने का निर्देश दिया जाए।
- बुनियादी ढांचा और वित्तपोषण: खेल सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन हो तथा दिव्यांग बच्चों सहित सभी के लिए खेल मैदानों व सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जाए।
अदालती कार्यवाही और अगला कदम
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के. एम. नटराज ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार का जवाब अभी लंबित है। उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि स्कूलों में खेल और मैदानों की व्यवस्था बेहद आवश्यक है।
पीठ को यह भी अवगत कराया गया कि चार अर्जुन पुरस्कार विजेताओं की ओर से भी इस मामले में पक्षकार (Impleadment) बनने के लिए एक अर्जी दाखिल की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि एमिकस क्यूरी द्वारा 17 मार्च 2022 को सौंपी गई रिपोर्ट को पोर्टल पर अपलोड किया जाए और दो सप्ताह के भीतर सभी राज्यों व संबंधित पक्षों के वकीलों के साथ साझा किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

