मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- वरिष्ठ वकील की टिप्पणी पर चिंता: हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिवक्ता से इस प्रकार की टिप्पणियों या आचरण की बिल्कुल अपेक्षा नहीं की जाती। कोर्ट ने कहा कि यह टिप्पणी अदालती कार्यवाही के अनुकूल नहीं थी।
- पूर्व डीएसपी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक: कोर्ट ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के दो मामलों में घिरे पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधू की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।
- शिकायतकर्ता की भूमिका की जांच का निर्देश: कोर्ट ने पुलिस से सवाल किया कि क्या पैसे ऐंठने और फर्जी शिकायतें दर्ज कराने के पूरे खेल में शिकायतकर्ता (बलजिंदर सिंह) की भूमिका की भी जांच की गई है।
- पक्षपात के आरोप की पृष्ठभूमि: जब कोर्ट ने राज्य सरकार को शिकायतकर्ता की संलिप्तता की जांच करने का निर्देश दिया, तो शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जी.के. मान ने पीठ पर पक्षपात का आरोप लगाया।
Senior Advocate Allegation: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पूर्व डीएसपी के खिलाफ चल रहे एक मामले की सुनवाई के दौरान एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता (Senior Advocate) के आचरण पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की एकल पीठ पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधू की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। वरिष्ठ वकील ने अदालत द्वारा उनके मुवक्किल (शिकायतकर्ता) के खिलाफ सुनवाई किए बिना जांच के आदेश देने पर जज पर ‘पूर्ण रूप से पक्षपाती’ होने का आरोप लगाया था।
मामले से जुड़ी मुख्य बिंदु और अदालती टिप्पणियां
- वरिष्ठ वकील के आचरण पर चिंता
- शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जी.के. मान (Advocate G.K. Mann) ने अदालत द्वारा शिकायतकर्ता की भूमिका की जांच के निर्देश पर आपत्ति जताई और अदालत पर पक्षपात का आरोप लगाया।
- हाईकोर्ट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एडवोकेट मान के इस आचरण पर टिप्पणी करने से बच रहा है और इसे उन्हीं के विवेक पर छोड़ता है। हालांकि, पीठ ने जोड़ा: “इस तरह का आचरण या टिप्पणियां बार के नामित वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कभी अपेक्षित नहीं होती हैं।”
- पूर्व डीएसपी संधू पर गंभीर आरोप
- पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी गुरशेर सिंह संधू पर आय से अधिक संपत्ति, फर्जी शिकायतें दर्ज कराकर वसूली (Extortion), बेनामी सौदे और मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामले दर्ज हैं।
- पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, संधू शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह के नाम पर झूठी शिकायतें दर्ज कराता था और बाद में उसके फर्जी हस्ताक्षर कर मामलों को बंद कर देता था।
- शिकायतकर्ता की संदिग्ध भूमिका
- सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संधू और शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह के बीच करीबी संबंध थे और शिकायतकर्ता कथित तौर पर संधू के इशारे पर लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराता था।
- कोर्ट द्वारा सवाल पूछे जाने पर राज्य सरकार (पंजाब पुलिस) ने आश्वासन दिया कि शिकायतकर्ता की संदिग्ध भूमिका की भी जांच की जाएगी।
- अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी पर रोक
- अदालत ने राज्य सरकार को शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित व्यक्तियों की पूरी कानूनी व तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
- इसके साथ ही पीठ ने संधू की अग्रिम जमानत याचिकाओं को लंबित रखते हुए दोनों भ्रष्टाचार के मामलों में उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक (Stay on Arrest) लगा दी।
मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण
यह मामला पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी गुरशेर सिंह संधू से जुड़ा है, जिन पर लोगों के खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज करवाकर बड़े पैमाने पर उगाही करने और बेनामी संपत्तियां बनाने का आरोप है। यह प्राथमिकी बलजिंदर सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
पुलिस जांच और शिकायतकर्ता का गठजोड़ पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि डीएसपी संधू और शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह के बीच घनिष्ठ संबंध थे। संधू के कहने पर मोहाली में विभिन्न लोगों के खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज कराई जाती थीं और बाद में बलजिंदर सिंह के जाली दस्तखत करके उन मामलों को बंद कर दिया जाता था।
हाईकोर्ट का रुख और वकीलों की बहस न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ ने पाया कि हालांकि बलजिंदर सिंह का दावा है कि उससे सादे कागजों पर दस्तखत करवाए गए थे, लेकिन उसने संधू की मदद से एक विवादित संपत्ति भी अपने नाम कराई थी। इस पर पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या उन्होंने शिकायतकर्ता के खिलाफ अपराध बनता है या नहीं, इसकी जांच की है?
जब राज्य सरकार ने इस पर रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया, तो वरिष्ठ वकील जी.के. मान ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि उनके मुवक्किल का पक्ष सुने बिना ही कोर्ट उसके खिलाफ जांच के आदेश दे रहा है और यह पीठ के पक्षपात को दर्शाता है।
इस पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति वशिष्ठ ने कहा: अदालत वकील के आचरण पर टिप्पणी करने से परहेज करती है और इसे उन पर ही छोड़ती है कि वे अपनी टिप्पणियों का विश्लेषण करें… हालांकि, बार के वरिष्ठ सदस्यों से इस प्रकार की टिप्पणियों की उम्मीद कभी नहीं की जाती।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 तय करते हुए राज्य सरकार को शिकायतकर्ता सहित सभी पक्षों की भूमिका पर अपनी पूरी तथ्यात्मक और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab & Haryana High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ (Justice Sanjay Vashisth) |
| मामला | गुरशेर सिंह संधू बनाम पंजाब राज्य (Gursher Singh Sandhu v. State of Punjab) |
| मुख्य विषय | वरिष्ठ अधिवक्ता के आचरण पर चिंता और पूर्व DSP की अग्रिम जमानत |
| अगली सुनवाई | 7 सितंबर 2026 |

