Thursday, August 27, 2026
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Next Gen: जेन-ज़ी, जेन-अल्फा और जेन-बीटा का कल्याण; पेपर लीक, एआई, स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

मुख्य बिंदु (Key Indicators)

  • पेपर लीक पर सख्त तंत्र: कोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं के बार-बार होते पेपर लीक पर चिंता जताते हुए केंद्र व राज्य सरकार से इसे रोकने के लिए एक मजबूत और त्रुटिहीन कानूनी/तकनीकी ढांचा पेश करने को कहा है।
  • स्क्रीन टाइम व एआई (AI) प्रभाव: अत्यधिक डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल से बच्चों की नींद, एकाग्रता और लिखने-पढ़ने की क्षमता पर पड़ रहे असर को देखते हुए स्क्रीन टाइम सीमित करने और साइबर सुरक्षा/एआई साक्षरता नीति बनाने के निर्देश दिए गए।
  • स्कूलों में जंक फूड पर बैन: कोर्ट ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन्स, 2020 का पालन न होने पर चिंता जताई और निर्देश दिया कि स्कूल कैंटीन और स्कूल परिसर के 50 मीटर के दायरे में उच्च वसा, चीनी और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों (चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स आदि) की बिक्री पर सख्त रोक लगे।
  • ग्रामीण सरकारी स्कूलों का कायाकल्प: 2047 के भारत निर्माण के लक्ष्य के साथ ग्रामीण सरकारी स्कूलों में शिक्षकों, प्रिंसिपलों, काउंसलर्स की भर्ती, स्मार्ट क्लासरूम, इंटरनेट, खेल मैदान और छात्राओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी/महिला स्टाफ तैनात करने का एक्शन प्लान मांगा गया।
  • विशेष मॉनिटरिंग सेल और एमिकस क्यूरी: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक “Gen Z, Alpha & Beta Monitoring Cell” बनाने का निर्देश दिया गया जो हर 3 महीने में समीक्षा करेगी। कोर्ट की सहायता के लिए अलग-अलग पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करने हेतु वरिष्ठ व युवा अधिवक्ताओं की टीमें (Amicus Curiae) नियुक्त की गईं।

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने देश की भावी पीढ़ियों—जेन ज़ी (Gen Z), जेन अल्फा (Gen Alpha) और जेन बीटा (Gen Beta)—के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) जनहित याचिका दर्ज की है [IN RE: “In the matter of Welfare and Future of Generation Gen-Z, Gen-Alpha and Gen-Beta”]।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने रेखांकित किया कि वर्ष 2047 (आजादी के 100 वर्ष) और उसके बाद देश का नेतृत्व इन्हीं तीन पीढ़ियों के हाथों में होगा। अदालत ने तेजी से बदलते तकनीकी और सामाजिक माहौल की चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) और स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां

पीठ ने बच्चों के राष्ट्र निर्माण में महत्व पर जोर देते हुए कहा: “बच्चे किसी राष्ट्र का भविष्य होते हैं क्योंकि वे ही बड़े होकर कार्यबल (Workforce), नेता और संरक्षक बनते हैं। आज हम एक राष्ट्र के रूप में उनकी कैसे देखभाल करते हैं, क्या सिखाते हैं और उनकी कैसे रक्षा करते हैं, यही कल हमारे देश की ताकत, सुरक्षा और सफलता तय करेगा। वे हमारे राष्ट्रीय उपवन के फूल हैं और इन फूलों की रक्षा करना हमारा सर्वोपरि कर्तव्य है।”

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युवाओं और बच्चों के सामने मौजूद 9 प्रमुख चुनौतियां

उच्च न्यायालय ने आधुनिक युग में नई पीढ़ियों के सामने आ रही गंभीर समस्याओं को सूचीबद्ध किया

  1. बार-बार होने वाले प्रतियोगी परीक्षा पेपर लीक
  2. शिक्षा प्रणाली और रोजगार बाजार के बीच बढ़ता अंतर।
  3. मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और डिजिटल बर्नआउट।
  4. गिग इकोनॉमी (Gig Economy) में काम करने वाले युवाओं की असुरक्षा।
  5. रहन-सहन और आवास की अत्यधिक ऊंची लागत।
  6. जलवायु चिंता (Climate Anxiety)
  7. नीतियों और राजनीति में युवाओं के प्रतिनिधित्व का अभाव।
  8. साइबर सुरक्षा खतरे और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से होने वाले व्यवधान
  9. अत्यधिक स्क्रीन टाइम (Screen Time) के कारण नींद, एकाग्रता, सामाजिक कौशल और सीखने की क्षमता पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव।

केंद्र और राज्य सरकार को एक्शन प्लान पेश करने के निर्देश

अदालत ने केंद्र और राजस्थान सरकार को निम्नलिखित बिंदुओं पर ठोस नीति व कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया:

  • पेपर लीक रोधी मजबूत तंत्र: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए फुलप्रूफ व्यवस्था।
  • पाठ्यक्रम सुधार: एआई (AI), डेटा एनालिसिस, ग्रीन स्किल्स, अप्रेंटिसशिप और इंडस्ट्री-लिंक्ड इंटर्नशिप को शामिल करना।
  • स्क्रीन टाइम सीमा नीति: बच्चों में डिजिटल डिवाइस के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत कदम।
  • सुलभ काउंसलिंग: मानसिक स्वास्थ्य परामर्श को सुलभ बनाना और गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा उपाय लागू करना।
  • शिक्षा ऋण व आवास सुधार: युवाओं के लिए सस्ती आवासीय योजनाएं और शिक्षा ऋण सुधार।

ग्रामीण सरकारी स्कूलों के सुधार व बुनियादी ढांचे पर कड़ा रुख

अदालत ने चिंता जताई कि एक तरफ हम 2047 के लिए इन पीढ़ियों को तैयार कर रहे हैं, वहीं ग्रामीण सरकारी स्कूल बुनियादी ढांचे की गंभीर कमियों से जूझ रहे हैं। अदालत ने निर्देश दिए कि:

  • शिक्षकों, प्रिंसिपलों, वार्डनों, कंप्यूटर शिक्षकों और मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं के रिक्त पद तत्काल भरे जाएं।
  • स्मार्ट क्लासरूम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, खेल के मैदान, स्वच्छ शौचालय, बिजली व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो।
  • छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूलों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे और महिला स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
  • जिला कलेक्टर और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग 8 सप्ताह के भीतर ग्रामीण स्कूलों का औचक निरीक्षण करें।

जंक फूड पर तत्काल रोक (स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में प्रतिबंध)

अदालत ने FSSAI के 2020 के नियमों के अप्रभावी क्रियान्वयन पर संज्ञान लेते हुए अंतरिम निर्देश जारी किए:

  • स्कूलों में और स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस-फैट युक्त बेकरी उत्पाद और अत्यधिक वसा, चीनी व नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध का कड़ाई से पालन हो।
  • जिला मजिस्ट्रेट (DM) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) इसका मासिक निरीक्षण करेंगे।
  • स्कूलों में ‘खाद्य सुरक्षा एवं पोषण समितियां’ गठित की जाएं और कैंटीन में कैलोरी व पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित की जाए।

निगरानी सेल और न्याय मित्र (Amicus Curiae) की नियुक्ति

  • मुख्य सचिव स्तर पर निगरानी: राज्य सरकार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक “Generation Z, Alpha and Beta Monitoring Cell” गठित करने का निर्देश दिया गया, जो हर 3 महीने में प्रगति की समीक्षा करेगा।
  • तीनों पीढ़ियों के लिए न्याय मित्र नियुक्त:
    • Gen Z की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली, सचिन आचार्य और विकास बालिया।
    • Gen Alpha की ओर से: अधिवक्ता पंकज शर्मा, प्रियंका बोराणा, नमन महनोत और अविन छंगाणी।
    • Gen Beta की ओर से: अधिवक्ता अदिति मोद, अक्षिती सिंघवी, निधि सिंघवी और अभिलाषा बोरा।

अदालत ने केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, FSSAI और राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद तय की है।

Next Gen: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणविवरण जानकारी
केस/मामलाIn Re: Welfare and Future of Generation Gen-Z, Gen-Alpha and Gen-Beta
संबंधित अदालतराजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court)
पीठासीन अधिकारीन्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड (Justice Anoop Kumar Dhand)
मुख्य बिंदुपेपर लीक, एआई व स्क्रीन टाइम, गीग वर्कर्स की सुरक्षा, स्कूल जंक फूड बैन
कार्रवाईकेंद्र, राज्य सरकार, FSSAI और बाल अधिकार आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी; 8 हफ्ते में रिपोर्ट तलब।

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