केस मैट्रिक्स एवं नीतिगत सारांश (Matrix Overview)
| विधिक/नीतिगत बिंदु | हरियाणा सरकार का ताजा फैसला (2026) |
| संबंधित विभाग | मानव संसाधन विभाग, हरियाणा सरकार |
| प्रभावित पद | उच्च स्तरीय प्रशासनिक व तकनीकी कैडर (Group A & Group B) |
| मुख्य विवाद | पदोन्नति आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) को बाहर रखने का हाईकोर्ट का निर्देश। |
| संबंधित मामला | कमलजीत सिंह बनाम हरियाणा राज्य (LPA No. 1054/2026) |
| पदोन्नति की स्थिति | 20% आरक्षण कोटा अस्थायी रूप से स्थगित; आरक्षित पद कोर्ट के फैसले तक रिक्त रहेंगे। |
| वैकल्पिक मार्ग | योग्य SC कर्मचारी वरिष्ठता-सह-योग्यता आधार पर नियमित पदोन्नति पा सकते हैं। |
Creamy Layer: हरियाणा सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवाओं और अधिकारियों के कैडर में एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए ग्रुप ‘A’ और ग्रुप ‘B’ के पदों पर अनुसूचित जाति (SC) के कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotions) में आरक्षण के क्रियान्वयन को फिलहाल स्थगित (Freeze/In Abeyance) कर दिया है।
यह रोक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की अपील पर अंतिम फैसला सुनाए जाने तक प्रभावी रहेगी। राज्य मानव संसाधन विभाग ने 19 दिसंबर 2023 के अपने पुराने आदेशों को निष्प्रभावी करते हुए इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।
विवाद का कारण और मामला क्या है? (Case Background)
- यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 1 अप्रैल 2025 के उस निर्णय के बाद सामने आया है, जो ‘कमलजीत सिंह व अन्य बनाम हरियाणा राज्य’ याचिका पर आया था।
- हाईकोर्ट का पूर्व आदेश: अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट ने पदोन्नति में SC कर्मचारियों को 20% आरक्षण देने की हरियाणा सरकार की नीति को तो सही ठहराया था, लेकिन सरकार को यह निर्देश दिया था कि नीति लागू करते समय ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) को आरक्षण के लाभ से बाहर रखा जाए।
- राज्य सरकार की अपील: हरियाणा सरकार ने ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करने के इस निर्देश को हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष LPA (Letters Patent Appeal) के माध्यम से चुनौती दी है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
नई पदोन्नति नीति के मुख्य बिंदु (Key Provisions of Fresh Policy)
जब तक हाईकोर्ट अपील पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक पदोन्नति की प्रक्रिया निम्नलिखित व्यवस्था के तहत संचालित होगी।
- आरक्षित पद रहेंगे खाली: 7 अक्टूबर 2023 की नीति के तहत आरक्षण का लाभ देकर कोई नई पदोन्नति नहीं की जाएगी। SC कर्मचारियों के निर्धारित प्रतिनिधित्व को पूरा करने के लिए चिह्नित पद इस अवधि के दौरान आरक्षित व रिक्त रखे जाएंगे।
- वरिष्ठता-सह-योग्यता (Seniority-cum-Merit) पर पदोन्नति जारी रहेगी: जो SC कर्मचारी सामान्य सेवा नियमों के तहत अपनी वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर पदोन्नति के पात्र हैं, उन्हें पदोन्नत किया जाएगा। केवल आरक्षण व्यवस्था स्थगित होने के कारण उनकी सामान्य पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी।
- 20% कोटे की गणना: वरिष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर पदोन्नत होने वाले SC कर्मचारियों को भी सरकार की नीति के तहत निर्धारित 20% प्रतिनिधित्व कोटे में ही गिना जाएगा।
- शेष पदों पर सामान्य नियम: बाकी बची पदोन्नति योग्य रिक्तियों को सामान्य सेवा नियमों (वरिष्ठता-सह-योग्यता) के अनुसार भरा जाएगा।
- सीधी भर्ती पर कोई असर नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल पदोन्नति (Promotions) पर लागू है। ग्रुप A और B पदों पर सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के लिए आरक्षण रोस्टर पूर्ववत लागू रहेगा।
आइए ऐतिहासिल फैसला कमलजीत सिंह व अन्य बनाम हरियाणा राज्य व अन्य के बारे में जानकारी लें
कमलजीत सिंह व अन्य बनाम हरियाणा राज्य व अन्य (Kamaljeet Singh and Others v. State of Haryana and Others – CWP-24608-2023) पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का एक प्रमुख कानूनी मामला है। यह मामला मुख्य रूप से सरकारी नौकरियों में पदोन्नति (Promotions) में आरक्षण से संबंधित है।
मामला किस बारे में है? (Background)
हरियाणा सरकार ने 7 अक्टूबर 2023 को एक अधिसूचना (Instructions/Notification) जारी की थी। इसके तहत राज्य सरकार के विभागों में ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ (Group A & Group B) के पदों पर पदोन्नति में अनुसूचित जाति (SC) के कर्मचारियों के लिए 20% आरक्षण की व्यवस्था की गई थी।
कमलजीत सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर सरकार के इस आदेश को चुनौती दी।
मुख्य कानूनी मुद्दे (Key Legal Issues)
- संविधान का अनुच्छेद 16(4A): क्या सरकार बिना आवश्यक और सटीक आंकड़े (Quantifiable Data) जुटाए पदोन्नति में आरक्षण लागू कर सकती है?
- अपर्याप्त प्रतिनिधित्व (Inadequacy of Representation): क्या ग्रुप ‘ए’ और ‘बी’ के कैडर में एससी वर्ग के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को साबित करने के लिए पर्याप्त डेटा एकत्र किया गया था?
- सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश: क्या यह अधिसूचना उच्चतम न्यायालय के एम. नागराज (2006) और जरनैल सिंह (2018/2022) मामलों में दिए गए ऐतिहासिक फैसलों के अनुरूप है?
उच्च न्यायालय का रुख और कानूनी पहलू (Court’s Proceedings & Rationale)
- अंतरिम आदेश व प्रक्रिया (Interim Orders):
- शुरुआत में अदालत ने पदोन्नति की प्रक्रिया पर रोक लगाई थी, लेकिन बाद में यह स्पष्ट किया गया कि जो पदोन्नतियाँ इस विवादित आदेश (7 अक्टू 2023) से संबंधित नहीं हैं, उन पर कोई रोक नहीं रहेगी।
- न्यायालय ने राज्य सरकार को यह अनुमति दी कि वह पदोन्नति प्रक्रिया को जारी रख सकती है, लेकिन इस शर्त के साथ कि सभी पदोन्नति आदेशों पर यह लिखा जाएगा कि “यह पदोन्नति याचिका के अंतिम फैसले के अधीन होगी”।
- जरनैल सिंह एवं अन्य निर्णयों का संदर्भ:
- संविधान पीठ के फैसलों के अनुसार, यदि सरकार पदोन्नति में आरक्षण देना चाहती है, तो उसे संबंधित कैडर में प्रतिनिधित्व की कमी और कैडर-वार आंकड़ों का अध्ययन करना अनिवार्य है।
- अदालत ने यह जांचा कि क्या हरियाणा सरकार ने कैडर-वार (Cadre-wise) डेटा का सही ढंग से विश्लेषण किया था।
फैसले का मुख्य कानूनी सार (Legal Takeaway)
अंतरिम सुरक्षा: अंतिम फैसला आने तक कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सभी जारी पदोन्नतियाँ याचिका के अंतिम निर्णय से बंधी (Provisional) रहेंगी।
कैडर-वार समीक्षा: पदोन्नति में आरक्षण सीधे पूरे विभाग पर लागू न होकर कैडर-वार लागू किया जाना चाहिए।

