Wednesday, September 9, 2026
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Public-spirited persons: देश में शक्तिशाली लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज कराना लगभग असंभव; IAS अफसरों पर केस मामले को समझें

मामले की पृष्ठभूमि और अभियोजन स्वीकृति का पेच

  • टेंडर घोटाला आरोप: पूर्व नगरपालिका प्रशासन मंत्री एस. पी. वेलुमणि पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में सड़क निर्माण के ठेके अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों को बांटे।
  • DVAC की प्राथमिकी: सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) ने IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
  • दिल्ली में अटकी फाइल: DVAC ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि चार्जशीट/अंतिम रिपोर्ट तैयार है, लेकिन मामले में शामिल दो IAS अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी (Prosecution Sanction) केंद्र सरकार (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय) के पास नवंबर 2025 से लंबित है।
  • केंद्र से मांगा स्टेटस रिपोर्ट: अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई सभी स्पष्टीकरण 14 फरवरी 2026 तक भेज दिए गए थे, फिर भी फाइलें लंबित हैं। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्रालय के अवर सचिव (Under Secretary) को पक्षकार बनाते हुए मंजूरी की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने देश में ताकतवर हस्तियों और शीर्ष नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने में आने वाली अड़चनों और प्रशासनिक सुस्ती पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है।

न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश की एकल पीठ ने पूर्व एआईएडीएमके (AIADMK) मंत्री एस.पी. वेलुमणि से जुड़े ₹98.25 करोड़ के टेंडर घोटाले में दो आईएएस (IAS) अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) देने में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही देरी पर यह तीखी टिप्पणी की। अदालत ने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अवर सचिव (Under Secretary) को मामले में पक्षकार बनाते हुए स्टेटस रिपोर्ट तलब की है और संबंधित अधिकारी को 19 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि जनहित की भावना रखने वाले नागरिक और न्यायाधीश न हों, तो इस देश में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होना लगभग असंभव है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख और गंभीर टिप्पणियां

1. ताकतवर लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर लाचारी

भ्रष्टाचार विरोधी मुकदमों की जमीनी हकीकत बयां करते हुए न्यायमूर्ति वेंकटेश ने कहा: “इस देश में शक्तिशाली लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज करना कितना कठिन है? इस अदालत में बैठा एक जज बार-बार कोशिश कर रहा है। यदि समाज में जनहित की भावना वाले लोग (Public-spirited persons) या न्यायाधीश न हों, तो इस देश में किसी के भी खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला दर्ज ही नहीं होगा।”

2. भ्रष्टाचार के प्रति संवेदनहीन होता समाज और समयसीमा पर सवाल

अदालत ने कहा कि भारतीय समाज अब उस स्थिति में पहुंच चुका है जहां लोग भ्रष्टाचार को देखकर उत्तेजित या विचलित भी नहीं होते। केंद्र सरकार के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए जज ने पूछा: “एक तरफ केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करती है, और दूसरी तरफ फाइलों को महीनों दबाकर रखा जाता है। क्या भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलों के निपटारे के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं होनी चाहिए?”

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मामले की पृष्ठभूमि और ₹98.25 करोड़ का टेंडर घोटाला

  • पूर्व मंत्री पर आरोप: पूर्व नगरपालिका प्रशासन मंत्री एस.पी. वेलुमणि (2014-2018) पर चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के टेंडर अपने रिश्तेदारों और करीबियों की कंपनियों को देकर सरकारी खजाने को ₹98.25 करोड़ का चूना लगाने का आरोप है।
  • एनजीओ की शिकायत पर FIR: भ्रष्टाचार विरोधी गैर-सरकारी संगठन ‘अरापोर इयक्कम’ (Arappor Iyakkam) की शिकायत पर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
  • विधानसभा अध्यक्ष से मंजूरी: विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने पूर्व मंत्री वेलुमणि के खिलाफ फरवरी 2024 में ही मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी। इसके अलावा 6 अन्य राज्य अधिकारियों के खिलाफ भी अनुमति मिल चुकी है।

2 IAS अधिकारियों की अभियोजन मंजूरी में केंद्र का विलंब

  • नवंबर 2025 से लंबित फाइलें: DVAC ने कोर्ट को सूचित किया कि मामले में चार्जशीट तैयार है, लेकिन दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों (के.एस. कंदासामी और के. विजय कार्तिकेयन) के खिलाफ मुकदमा चलाने की वैधानिक मंजूरी केंद्र सरकार के पास नवंबर 2025 से लंबित है।
  • स्पष्टीकरण भेजने के बाद भी कार्रवाई नहीं: केंद्र सरकार ने फाइलों के संबंध में कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे, जिन्हें तमिलनाडु सरकार और डीवीएसी ने 14 फरवरी 2026 तक उपलब्ध करा दिया था। इसके बावजूद महीनों से फाइलें नई दिल्ली में अटकी हुई हैं।

हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश और अगली सुनवाई

  1. केंद्रीय मंत्रालय पक्षकार बना: अदालत ने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के संबंधित अवर सचिव को अवमानना याचिका में पक्षकार (Implead) बनाया।
  2. वर्चुअल पेशी और स्टेटस रिपोर्ट का आदेश: अदालत ने केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारी को 19 सितंबर 2026 को दोपहर 2:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने और अभियोजन स्वीकृति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।

Public-spirited persons: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश
याचिकाकर्तागैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘अराप्पोर इयक्कम’ (Arappor Iyakkam)
मुख्य आरोपीपूर्व मंत्री एस. पी. वेलुमणि एवं 3 IAS अधिकारी
मुख्य मुद्दासड़क निर्माण टेंडर में अनियमितता और IAS अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी में देरी
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