प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के मुख्य निष्कर्ष
- धारा 3(4) और धारा 4 के तहत उल्लंघन नहीं: CCI ने माना कि निर्माता और अंतिम उपभोक्ता के बीच हुए वारंटी अनुबंध की शर्तों को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3(4) (ऊर्ध्वाधर प्रतिबंध) के तहत नहीं परखा जा सकता। इसके अलावा, कंपनी द्वारा अपनी बाजार शक्ति के दुरुपयोग (Abuse of Dominance – Section 4) का भी कोई सबूत नहीं मिला।
- वाहनों की सुरक्षा और परफॉरमेंस के लिए शर्तें जायज: अदालत/आयोग ने माना कि वाहन निर्माता सुरक्षा, विश्वसनीयता और बेहतर परफॉरमेंस के लिए विशिष्ट उपभोग्य सामग्रियों (Consumables) के इस्तेमाल की शर्तें रख सकते हैं:“ऐसी शर्तें वाहन मालिक को निर्धारित मानकों का पालन करने और अनुशंसित उपभोग्य सामग्रियों का उपयोग करने के लिए तर्कसंगत रूप से बाध्य कर सकती हैं। जब तक ये शर्तें उपभोक्ता को सही तरीके से सूचित की गई हैं और वाहन की सुरक्षा या कामकाज से जुड़ी हैं, तब तक ये वारंटी दायित्वों को कानूनी रूप से प्रभावित कर सकती हैं।” — CCI
- पारदर्शिता और स्वैच्छिक अनुबंध: आयोग ने नोट किया कि शिकायतकर्ता ने निर्धारित नियम और शर्तों के अधीन स्वैच्छिक रूप से एक्सटेंडेड वारंटी खरीदी थी और ऐसी शर्तें छिपाई नहीं गई थीं।
नई दिल्ली: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) और उसके अधिकृत डीलर के खिलाफ दायर उस शिकायत को खारिज कर दिया है, जिसमें बाहर से खरीदे गए इंजन ऑयल के इस्तेमाल के आधार पर वारंटी क्लेम नामंजूर करने को प्रतिस्पर्धा-विरोधी (Anti-Competitive) करार दिया गया था।
आयोग ने पाया कि वाहन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए विनिर्माता द्वारा अधिकृत नेटवर्क से ही विशिष्ट कंज्यूमेबल्स/इंजन ऑयल लेने की शर्त लगाना एक वैध और उचित आवश्यकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन निर्माता और उपभोक्ता के बीच तय वारंटी की शर्तें प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3(4) के तहत ‘वर्टिकल रिस्ट्रेंट’ के दायरे में नहीं आतीं और न ही यह बाजार में दबदबे के दुरुपयोग (Abuse of Dominance) का मामला है [भारती शर्मा बनाम महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड एवं अन्य]।
प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के मुख्य विधिक निष्कर्ष
1. वारंटी की शर्तें धारा 3 (प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते) के दायरे से बाहर आयोग ने वैधानिक प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया:
- धारा 3(4) की अनुपयोगिता: कार निर्माता और अंतिम उपभोक्ता (End Consumer) के बीच हुए वारंटी अनुबंध को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3(4) के तहत ‘वर्टिकल एग्रीमेंट’ नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह उत्पादन-वितरण श्रृंखला (Supply Chain) के दो व्यावसायिक स्तरों के बीच का समझौता नहीं है।
- धारा 4 (दबदबे का दुरुपयोग) का अभाव: रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य या सामग्री नहीं मिली जिससे यह साबित हो सके कि महिंद्रा ने बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग कर अनुचित व्यापारिक शर्तें थोपी हैं।
2. निर्माताओं का तकनीकी विनिर्देश तय करने का वैध अधिकार आयोग ने रेखांकित किया: “वाहन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए निर्माता तकनीकी विनिर्देश और रखरखाव की शर्तें निर्धारित कर सकते हैं। ऐसी शर्तों के तहत वाहन मालिक से यह अपेक्षा की जा सकती है कि वह निर्धारित मानकों का पालन करे और अनुशंसित कंज्यूमेबल्स (Recommended Consumables) का ही उपयोग करे। जब तक ये शर्तें उपभोक्ता को स्पष्ट रूप से सूचित की गई हैं और वाहन की कार्यप्रणाली व सुरक्षा से जुड़ी हैं, तब तक इनका वारंटी दायित्वों पर प्रभाव डालना वैध है।”
मामले की पृष्ठभूमि (महिंद्रा XUV700 और टर्बोचार्जर विवाद)
- वाहन खरीद व एक्सटेंडेड वारंटी: शिकायतकर्ता भारती शर्मा ने जून 2024 में दिल्ली स्थित अधिकृत डीलर ‘श्री दुर्गा ऑटोमोबाइल्स’ से महिंद्रा XUV700 खरीदी थी और जुलाई 2029 तक वैध एक्सटेंडेड वारंटी भी ली थी।
- बाहरी इंजन ऑयल का उपयोग: शिकायतकर्ता ने जनवरी 2025 और जनवरी 2026 की निर्धारित सर्विस के दौरान बाहर से खरीदा गया ‘Pakelo Krypton XT LA-V SAE 5W-30’ इंजन ऑयल डीलर को दिया, जिसे डीलर ने इस्तेमाल कर लिया।
- टर्बोचार्जर खराबी और वारंटी अस्वीकृति: जनवरी 2026 की सर्विस के तुरंत बाद वाहन में ‘चेक इंजन’ की चेतावनी आई और पिकअप कम हो गया। डीलर ने टर्बोचार्जर खराब होने की पुष्टि करते हुए ₹50,000 का एस्टीमेट दिया और वारंटी क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि इंजन ऑयल बाहर से लाया गया था, जिससे वारंटी अमान्य हो गई।
- CCI में शिकायत: शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि इस्तेमाल किया गया तेल महिंद्रा के विनिर्देशों के अनुरूप था और कंपनी ग्राहकों को केवल अपने अधिकृत नेटवर्क से ऑयल खरीदने के लिए मजबूर कर लुब्रिकेंट्स के आफ्टरमार्केट (Aftermarket) में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को खत्म कर रही है।
आयोग का अंतिम निर्णय
- व्यक्तिगत वारंटी विवाद, प्रतिस्पर्धा का मुद्दा नहीं: आयोग ने माना कि यह मूल रूप से व्यक्तिगत वाहन की वारंटी शर्तों से जुड़ा एक उपभोक्ता विवाद है, न कि बाजार शक्ति के दुरुपयोग का कोई व्यापक प्रतिस्पर्धात्मक मुद्दा।
- शर्तों का पूर्व प्रकटीकरण: यह पाया गया कि उपभोक्ता ने नियमों व शर्तों की पूरी जानकारी के साथ स्वेच्छा से एक्सटेंडेड वारंटी खरीदी थी।
- केस बंद: प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 3 या धारा 4 का कोई प्रथम दृष्टया उल्लंघन न पाते हुए आयोग ने शिकायत को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।
विधिक विवरण
- प्रासंगिक कानून: प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 3(4), धारा 4 और धारा 26(2)
- अधिकरण: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI)
Abuse of Dominance: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| नियामक संस्था | भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India – CCI) |
| विपक्षी पक्षकार | महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड एवं श्री दुर्गा ऑटोमोबाइल्स |
| शिकायतकर्ता | भारती शर्मा (महिंद्रा XUV700 की मालिक) |
| संबंधित कानून | प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 3(4) (Vertical Restraint) और धारा 4 (Abuse of Dominance) |
| CCI का आदेश | प्रतिस्पर्धा कानून की धाराओं का कोई प्रथम दृष्टया (Prima Facie) उल्लंघन नहीं; मामला बंद। |

