हाईकोर्ट का विश्लेषण और मुख्य टिप्पणियां
- शादी का कानूनी वादा असंभव: अदालत ने पाया कि महिला और आरोपी दोनों ही अपने-अपने जीवनसाथी से कानूनी रूप से तलाकशुदा नहीं थे। ऐसी स्थिति में कानूनन शादी होना संभव ही नहीं था।
- हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणी:“जब याचिकाकर्ता और पीड़िता दोनों की शादी का तथ्य दोनों को अच्छी तरह पता था, तो शादी के वादे का कोई सवाल ही नहीं उठता। जब तक उन्होंने अपने संबंधित जीवनसाथी से तलाक नहीं लिया था, वे कानूनी रूप से शादी नहीं कर सकते थे।” — न्यायमूर्ति संदीप शर्मा
- सहमति से संबंध (Consensual Relationship): अदालत ने नोट किया कि महिला 2022 से आरोपी से लगातार मिल रही थी और लंबे समय तक संबंध में रहने के दौरान उसने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। प्रथम दृष्टया यह बिना मर्जी के बलात्कार का मामला प्रतीत नहीं होता।
- आपराधिक इतिहास पर स्पष्टीकरण: राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपी पर 23 मामले दर्ज होने की बात कही। लेकिन कोर्ट ने पाया कि इनमें से 21 मामलों में वह पहले ही बरी (Acquitted) हो चुका है और अधिकांश मामले आबकारी अधिनियम (Excise Act) के तहत थे।
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि जब आरोपी और पीड़िता दोनों पहले से ही किसी अन्य व्यक्ति से विवाहित हों और उन्होंने अपने-अपने जीवनसाथी से विधिवत तलाक न लिया हो, तो प्रथम दृष्टया शादी के वादे (Promise to Marry) या धोखे से संबंध बनाने का मामला नहीं बनता।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने 3 सितंबर 2026 के अपने आदेश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज एफआईआर में आरोपी ज्योतिषी विनोद कुमार को नियमित जमानत (Regular Bail) प्रदान करते हुए यह व्यवस्था दी। अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की वैवाहिक स्थिति से भली-भांति अवगत थे, तो कानूनी रूप से शादी करना संभव ही नहीं था [विनोद कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. शादी के वादे का कोई विधिक आधार नहीं (BNS धारा 69 की व्याख्या) अदालत ने दोनों पक्षों की वैवाहिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए दर्ज किया: “शादी के वादे का कोई प्रश्न ही नहीं उठता, विशेष रूप से तब जब याचिकाकर्ता और पीड़िता दोनों का विवाहित होना दोनों पक्षों की पूरी जानकारी में था। जब तक पीड़िता और याचिकाकर्ता ने अपने-अपने जीवनसाथी से कानूनी तलाक नहीं लिया था, वे अन्यथा भी आपस में विवाह नहीं कर सकते थे।”
2. सहमति बनाम धोखे से संबंध (Deceitful Means)
- अदालत ने पाया कि 31 वर्षीय महिला वर्ष 2022 से लगातार आरोपी से अपनी मर्जी से मिल रही थी।
- दोनों के बीच लंबे समय तक संपर्क रहा, लेकिन इस दौरान पीड़िता की ओर से किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।
- जमानत के चरण पर अदालत इस बात से संतुष्ट नहीं हुई कि आरोपी ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध या धोखे से शारीरिक संबंध बनाए थे।
मामले की पृष्ठभूमि (कुंडली मिलान से शुरू हुआ विवाद)
- शिकायत के तथ्य: महिला का विवाह 2017 में हुआ था, लेकिन वैवाहिक विवाद के चलते वह अपने पति से अलग रह रही थी। वर्ष 2022 में वह अपनी कुंडली दिखाने के लिए ज्योतिषी विनोद कुमार के पास गई।
- आरोप: महिला ने आरोप लगाया कि ज्योतिषी ने उसकी कुंडली देखकर कहा कि उसके वैवाहिक जीवन में कोई सुख नहीं है और उसे पति से तलाक ले लेना चाहिए। आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसकी अपनी पत्नी से अनबन है और वह तलाक के बाद उससे विवाह कर लेगा।
- एफआईआर: महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब उसे पता चला कि आरोपी के अन्य महिलाओं से भी संबंध हैं और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई, तो उसने 22 जून 2026 को BNS की धारा 69 के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
- आपराधिक इतिहास पर कोर्ट का रुख: राज्य सरकार ने आरोपी के खिलाफ 23 पुराने मामलों का हवाला देकर जमानत का विरोध किया। हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि आरोपी 23 में से 21 मामलों में पहले ही बरी (Acquitted) हो चुका है, जिनमें से अधिकांश मामले आबकारी अधिनियम (Excise Act) से जुड़े थे।
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हाईकोर्ट का अंतिम आदेश व जमानत की शर्तें
अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित शर्तों के अधीन नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया:
- जमानत राशि: ₹2 लाख का व्यक्तिगत मुचलका (Personal Bond) और इतनी ही राशि की दो स्थानीय जमानतें (Local Sureties)।
- शर्तें: आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और बिना अदालती अनुमति के भारत नहीं छोड़ेगा।
विधिक प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता (आरोपी) की ओर से: अधिवक्ता इमरान खान।
- राज्य सरकार की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजन कहोल, विशाल पंवार तथा उप-महाधिवक्ता रवि चौहान और अनीश बंशतू।
- पीठ: न्यायमूर्ति संदीप शर्मा।
Promise to Marry: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Himachal Pradesh High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति संदीप शर्मा |
| मामले का नाम | विनोद कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (Vinod Kumar v. State of HP) |
| संबंधित कानून/धारा | BNS धारा 69 (छल कपट या शादी के झूठे वादे से यौन संबंध बनाना) |
| अदालत का निर्णय | आरोपी को ₹2 लाख के मुचलके पर नियमित जमानत स्वीकार की गई। |

