Friday, September 11, 2026
HomeDelhi-NCRProperty In Delhi: नागरिकों को अपनी संपत्तियों के लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन...अंतहीन...

Property In Delhi: नागरिकों को अपनी संपत्तियों के लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन…अंतहीन इंतजार नहीं करा सकते; अंतिम नीति पेश करने का आखिरी मौका

हाईकोर्ट के मुख्य निर्देश

  1. अंतिम अवसर: अदालत ने शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA), DDA और L&DO को अगली सुनवाई से पहले अपनी अंतिम नीति रिकॉर्ड पर रखने का आखिरी मौका दिया है।
  2. नई नीति का स्वरूप: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राधिकारियों द्वारा बनाई जाने वाली नई नीति भविष्यलक्षी (Prospective) होगी।
  3. लंबित आवेदनों पर स्थिति: जिन आवेदकों से DDA पहले ही कन्वर्जन शुल्क वसूल चुका है, उनके लंबित आवेदनों को उस समय लागू तत्कालीन नीति और दरों के अनुसार ही प्रोसेस किया जाएगा।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में वाणिज्यिक संपत्तियों (Commercial Properties) को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड (Leasehold to Freehold) में बदलने के लंबित आवेदनों पर डीडीए (DDA), केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) और लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) की लंबे समय से जारी निष्क्रियता पर कड़ी आपत्ति जताई है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने 7 सितंबर 2026 के आदेश में डीडीए द्वारा सिंगल जज के आदेशों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए प्राधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले अपनी अंतिम नीति (Final Policy) रिकॉर्ड पर रखने का अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक सुस्ती और नीतिगत अनिर्णय के कारण आम नागरिकों और संपत्ति मालिकों के अधिकारों को अनिश्चितकाल के लिए नहीं लटकाया जा सकता [दिल्ली विकास प्राधिकरण बनाम माला साहनी सेठ एवं अन्य]।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व प्रशासनिक टिप्पणियां

1. नागरिकों को इंतजार कराने पर तीखा ऐतराज प्रशासनिक देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए खंडपीठ ने कहा: “सैकड़ों नागरिकों को अपनी संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए इस तरह इंतजार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पर्याप्त समय बीत जाने के बावजूद आज भी अदालत को अधिकारियों की तरफ से कोई सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिला है।”

2. बैठकों में ठोस निर्णय का अभाव अदालत ने 30 जुलाई के निर्देश के बाद आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) की समीक्षा करते हुए असंतोष जताया:

  • बैठक में नीति निर्धारण, दस्तावेजीकरण के सरलीकरण (Simplification of Documentation) या कन्वर्जन शुल्क संशोधन पर कोई ठोस या व्यावहारिक निर्णय नहीं लिया गया।
  • डीडीए का ऑनलाइन कन्वर्जन पोर्टल फरवरी से बंद/होल्ड पर पड़ा है, जिससे नए और पुराने सभी आवेदन अटके हुए हैं।

3. नई नीति होगी ‘भविष्यलक्षी’ (Prospective) अदालत ने विधिक स्थिति स्पष्ट की:

  • सरकार जो भी नई नीति लाएगी, वह भविष्यलक्षी (Prospective) प्रभाव से लागू होगी।
  • जिन आवेदकों से डीडीए पूर्व में ही कन्वर्जन शुल्क वसूल चुका है, उनके लंबित आवेदनों का निपटारा उस समय लागू तत्कालीन नीति और दरों के अनुसार ही किया जाएगा।

Also Read; Travesty of Justice: लड़की की छाती पर आरोपी के नाम का टैटू और वह स्वेच्छा से मनाली गई; 17 साल बाद उसे दोबारा जेल भेजना न्याय का मखौल, जानें

मामले की पृष्ठभूमि (साकेत डीएलएफ साउथ कोर्ट मॉल विवाद)

  • 2023 से लंबित आवेदन: विवाद साकेत स्थित ‘डीएलएफ साउथ कोर्ट मॉल’ के कुछ संपत्ति मालिकों द्वारा दायर याचिकाओं से शुरू हुआ था। उन्होंने 2023 में अपनी दुकानों/संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कराने के लिए डीडीए में आवेदन किया था।
  • शुल्क भुगतान के बावजूद देरी: संपत्ति मालिकों ने डीडीए द्वारा निर्धारित पूरा कन्वर्जन शुल्क जमा कर दिया था, लेकिन डीडीए ने कन्वर्जन डीड निष्पादित नहीं की और उल्टे भूतलक्षी प्रभाव से जीएसटी (GST) की मांग जोड़ दी।
  • हाईकोर्ट के पूर्व निर्देश:
    • 5 दिसंबर 2025 को अदालत ने मालिकों से अंडरटेकिंग लेकर डीडीए को आवेदन प्रोसेस करने का आदेश दिया।
    • अनुपालन न होने पर 11 फरवरी और 18 मार्च को पुनः निर्देश जारी किए गए।
    • इन निर्देशों के खिलाफ डीडीए ने खंडपीठ में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश

  1. अंतिम नीति पेश करने का आखिरी मौका: MoHUA, डीडीए और L&DO को अगली सुनवाई से पहले फ्रीहोल्ड कन्वर्जन की अंतिम नीति और कार्ययोजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
  2. पोर्टल बहाली की दिशा में कदम: अधिकारियों को लंबित आवेदनों के निपटारे और रुके हुए पोर्टल को पुनः शुरू करने के लिए ठोस समयसीमा तय करने को कहा गया।
  3. अगली सुनवाई: मामले को विस्तृत समीक्षा के लिए 28 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • डीडीए (DDA) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एम. राव, स्टैंडिंग काउंसिल मृणालिनी सेन और अधिवक्ता गौरी राजपूत।
  • केंद्र सरकार (Union of India) की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा, स्टैंडिंग काउंसिल आशीष के. दीक्षित, अधिवक्ता उमर हाशमी, आयुष कुमार, सरकारी वकील राजवीर पांडे और मनीषा अग्रवाल नारायण।
  • सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) की ओर से: अधिवक्ता उर्वी मोहन।
  • संपत्ति मालिकों की ओर से: अधिवक्ता सौरभ सेठ, सुकृत सेठ, नीलमप्रीत कौर, अभिरूप राठौर, कबीर देव और सुखवीर सिंह।

Property In Delhi: मामले का विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठासीन पीठन्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन
याचिकाकर्तादिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)
मूल विवादसाकेत के DLF साउथ कोर्ट मॉल के संपत्ति मालिकों के फ्रीहोल्ड आवेदनों पर कार्रवाई न होना।
अदालत का रुखMoHUA, DDA और L&DO को अंतिम नीति पेश करने का आखिरी मौका; नई नीति केवल भविष्यलक्षी होगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
30 ° C
30 °
30 °
84 %
4.1kmh
43 %
Fri
30 °
Sat
34 °
Sun
35 °
Mon
34 °
Tue
35 °

Recent Comments