Wednesday, October 28, 2026
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Potency Test: साथी महिला ट्रेनी अधिकारी के यौन उत्पीड़न के आरोपी निलंबित ट्रेनी आईपीएस के पोटेंसी टेस्ट की अनुमति क्यों हुआ रद्द; यहां जानिए

हाईकोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

  1. कानूनी मानकों का पालन नहीं:उच्च न्यायालय ने मद्रास और कर्नाटक हाईकोर्ट्स द्वारा इसी तरह के मामलों में तय किए गए कानूनी सिद्धांतों का हवाला दिया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा दाखिल की गई याचिका उन स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी।
  2. भविष्य के आवेदन की छूट:हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि जांच एजेंसी पर पूरी तरह रोक लग गई है। यदि भविष्य में जांच के दौरान आवश्यकता पड़ती है, तो अभियोजन पक्ष नियमानुसार और उचित प्रक्रिया के साथ पुनः आवेदन कर सकता है।
  3. वर्तमान स्थिति:उदय कृष्णा रेड्डी वर्तमान में इस मामले में निलंबित हैं और न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, मामले की FIR को रद्द कराने (Quashing of FIR) के लिए उनकी एक अलग याचिका तेलंगाना हाईकोर्ट में लंबित है।

हैदराबाद: तेलंगाना हाईकोर्ट ने साथी महिला प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के यौन उत्पीड़न के आरोपी निलंबित ट्रेनी आईपीएस अधिकारी एम. उदय कृष्णा रेड्डी का ‘पोटेंसी टेस्ट’ (पुरुषत्व परीक्षण / Potency Examination) कराने की अनुमति देने वाले मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को निरस्त (Quash) कर दिया है।

न्यायमूर्ति जे. श्रीनिवास राव की एकल पीठ ने राजेंद्रनगर (रंगारेड्डी जिला) के तृतीय अतिरिक्त जूनियर सिविल जज-सह-25वें अतिरिक्त न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा 17 अगस्त 2026 को पारित आदेश को रद्द करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा इस परीक्षण के लिए दायर किया गया आवेदन कानूनी रूप से टिकने योग्य और स्थापित विधिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था [एम. उदय कृष्णा रेड्डी बनाम तेलंगाना राज्य]।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व्याख्या

1. स्थापित न्यायिक नजीरों के प्रतिकूल आवेदन मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा:

  • मद्रास और कर्नाटक उच्च न्यायालयों द्वारा बलात्कार और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में आरोपियों के पोटेंसी टेस्ट को लेकर तय किए गए विधिक सिद्धांतों के अनुसार अभियोजन की अर्जी कानूनन संपोषणीय नहीं पाई गई।
  • केवल औपचारिकता या बिना ठोस कानूनी आधार के अभियुक्त को ऐसे शारीरिक परीक्षण के अधीन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

2. कानून सम्मत नया आवेदन देने की छूट अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया:

  • इस आदेश का यह अर्थ नहीं है कि अभियोजन पक्ष के अधिकार पूरी तरह समाप्त हो गए हैं।
  • यदि मामले में जांच के दौरान वास्तविक आवश्यकता उत्पन्न होती है, तो अभियोजन पक्ष कानून के स्थापित मानकों के अनुसार सक्षम अदालत के समक्ष उचित आवेदन (Appropriate Petition) प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

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मामले की पृष्ठभूमि (ट्रेनी आईपीएस यौन उत्पीड़न विवाद)

  • गंभीर आरोप: निलंबित ट्रेनी आईपीएस अधिकारी एम. उदय कृष्णा रेड्डी पर अपनी एक सहकर्मी महिला प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी का कथित यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप है।
  • BNSS की धारा 52 के तहत अर्जी: जांच एजेंसी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 52 (गिरफ्तार व्यक्ति की चिकित्सा जांच) के तहत मजिस्ट्रेट अदालत से आरोपी का पोटेंसी टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी।
  • मजिस्ट्रेट का 17 अगस्त का आदेश: रंगारेड्डी जिले की मजिस्ट्रेट अदालत ने 17 अगस्त को अभियोजन की मांग स्वीकार करते हुए पोटेंसी टेस्ट कराने की अनुमति दे दी थी।
  • वर्तमान स्थिति: आरोपी अधिकारी वर्तमान में सेवा से निलंबित है और न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल में बंद है। उसने एफआईआर को रद्द कराने के लिए भी तेलंगाना हाईकोर्ट में एक अलग आपराधिक याचिका दायर कर रखी है, जो अभी विचाराधीन है।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

  1. मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त: 17 अगस्त 2026 का पोटेंसी टेस्ट कराने का निचली अदालत का निर्देश रद्द कर दिया गया।
  2. अभियोजन को कानूनी छूट: अभियोजन को विधिक प्रक्रियाओं और अदालती नजीरों के दायरे में रहकर नया आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता बरकरार रखी गई।

विधिक विवरण

  • प्रासंगिक वैधानिक प्रावधान: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 52
  • पीठ: न्यायमूर्ति जे. श्रीनिवास राव
  • याचिकाकर्ता: निलंबित ट्रेनी आईपीएस एम. उदय कृष्णा रेड्डी

Potency Test: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालततेलंगाना उच्च न्यायालय (Telangana High Court)
पीठन्यायमूर्ति जे. श्रीनिवास राव
याचिकाकर्ताएम. उदय कृष्णा रेड्डी (निलंबित ट्रैनी IPS अधिकारी)
विवादित आदेशनिचली अदालत द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 52 के तहत पोटेंसी टेस्ट की अनुमति देना।
हाईकोर्ट का फैसलापोटेंसी टेस्ट का आदेश रद्द; हालांकि जरूरत पड़ने पर अभियोजन पक्ष को कानून के तहत नया आवेदन करने की छूट।
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