Saturday, September 12, 2026
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Hiring Law Faculty: प्रोफेसर कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं हैं…जिन्हें आउटसोर्स किया जाए; लॉ कॉलेजों में फैकल्टी आउटसोर्सिंग पर यूं फटकारा

अदालत में सरकार का जवाब और फैसला

हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी के बाद, शासकीय अधिवक्ता (Government Pleader) जी. एच. विर्क ने नॉलेज कंसोर्टियम ऑफ गुजरात की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया।

  • वर्क ऑर्डर वापस: सरकार ने निजी स्टॉफिंग एजेंसी को दिया गया भर्ती वर्क ऑर्डर तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया।
  • सरकारी एजेंसी द्वारा भर्ती का आश्वासन: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में वचन दिया कि अब यह भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से राज्य सरकार या उसकी अधिकृत सरकारी एजेंसियों के तत्वावधान में ही निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी।

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट द्वारा निजी एजेंसी के माध्यम से लॉ कॉलेजों में प्रोफेसर्स/अध्यापक सहायकों की भर्ती करने के निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताए जाने और स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu PIL) शुरू करने की चेतावनी के बाद गुजरात सरकार बैकफुट पर आ गई है।

न्यायमूर्ति निखिल करियल की एकल पीठ ने पाटन के एक उम्मीदवार द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य के इस रुख को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का अंतिम निस्तारण कर दिया। राज्य सरकार ने निजी स्टाफिंग एजेंसी को जारी किया गया वर्क ऑर्डर तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए अदालत को आश्वस्त किया है कि भविष्य में सभी शैक्षणिक भर्तियां केवल राज्य सरकार या उसकी वैधानिक एजेंसियों के सीधे तत्वावधान में ही आयोजित की जाएंगी।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. प्रोफेसर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं हैं अदालत ने शैक्षणिक पदों की गरिमा और वैधानिक मानकों को रेखांकित करते हुए कहा:“अदालत इस प्रकार की कार्यप्रणाली को कभी मंजूरी नहीं दे सकती। उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसर कोई चतुर्थ श्रेणी (Class IV) कर्मचारी नहीं हैं जिनकी सेवाएं निजी ठेकेदारों या आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए ली जाएं। किसी निजी एजेंसी द्वारा कानूनी व शैक्षणिक नियुक्तियों के चयन मानदंड तय करने और उन्हें लागू करने की वैधता व निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।”

2. स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की चेतावनी

  • न्यायालय ने कहा कि सरकारी लॉ कॉलेजों में आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती का यह मुद्दा व्यापक जनहित से जुड़ा है और यह उच्च न्यायालय द्वारा अपनी पहल पर जनहित याचिका (Suo Motu PIL) के रूप में सुने जाने योग्य है।
  • अदालत ने राज्य सरकार को अपना स्पष्ट रुख बताने के लिए केवल एक दिन का समय दिया था।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (108 अध्यापक सहायकों की भर्ती का विवाद)

  • विवादित भर्ती योजना: राज्य सरकार के ‘नॉलेज कंसोर्टियम ऑफ गुजरात’ (KCG) ने 27 सरकारी लॉ कॉलेजों में 108 अध्यापक सहायकों (Adhyapak Sahayaks / Faculty Members) की भर्ती का जिम्मा एक निजी स्टाफिंग एजेंसी को आउटसोर्स कर दिया था।
  • पारदर्शिता और योग्यता पर सवाल: पाटन के एक योग्य उम्मीदवार ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि इस आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता का घोर अभाव है, चयन के कोई स्पष्ट यूजीसी (UGC) व बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) दिशानिर्देश निर्धारित नहीं हैं, और यह मेधावी अभ्यर्थियों के अधिकारों पर कुठाराघात है।
  • सरकार का यू-टर्न: हाईकोर्ट के कड़े रुख के अगले ही दिन सरकारी वकील (Government Pleader) जी.एच. विर्क ने नॉलेज कंसोर्टियम ऑफ गुजरात का आधिकारिक पत्र प्रस्तुत करते हुए पुष्टि की कि निजी एजेंसी के पक्ष में जारी किया गया वर्क ऑर्डर पूरी तरह वापस (Cancelled/Withdrawn) ले लिया गया है।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश और सरकार का आश्वासन

  1. वर्क ऑर्डर रद्द: राज्य सरकार द्वारा वर्क ऑर्डर वापस लेने के पत्र को अदालत ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया।
  2. भविष्य की भर्ती पर राज्य का वचनपत्र: सरकारी वकील ने अदालत के समक्ष वचन दिया कि आगे से यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे कि भर्ती प्रक्रिया केवल राज्य सरकार या उसकी अपनी आधिकारिक एजेंसियों (जैसे GPSC या उच्च शिक्षा विभाग) के सीधे नियंत्रण में ही संपन्न हो।
  3. याचिका का निस्तारण: सरकार द्वारा आउटसोर्सिंग योजना पूरी तरह समाप्त करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: लॉ कॉलेजों में अध्यापक सहायकों की आउटसोर्सिंग भर्ती को चुनौती देने वाली रिट याचिका
  • प्रासंगिक मानक: यूजीसी (UGC) फैकल्टी भर्ती विनियम, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) लीगल एजुकेशन रूल्स एवं संविधान के अनुच्छेद 14 व 16
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • राज्य सरकार की ओर से: सरकारी वकील (Government Pleader) जी.एच. विर्क
  • पीठ: न्यायमूर्ति निखिल करियल (गुजरात उच्च न्यायालय)

Hiring Law Faculty: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतगुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति निखिल करील
मामला/विवाद27 सरकारी लॉ कॉलेजों में 108 फैकल्टी सदस्यों की निजी एजेंसी द्वारा आउटसोर्स भर्ती
नोडल सरकारी निकायनॉलेज कंसोर्टियम ऑफ गुजरात (Knowledge Consortium of Gujarat)
अदालत का रुखआउटसोर्सिंग पर सख्त ऐतराज; स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने की चेतावनी
सरकार का निर्णयवर्क ऑर्डर वापस लिया; भर्ती केवल सरकारी माध्यम से कराने का हाईकोर्ट को आश्वासन
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