बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
- नियम 21 (Regulation 21) का स्पष्ट अर्थ: हाईकोर्ट ने NMC Regulations, 2023 के नियम 21 के शब्दों की समीक्षा करते हुए कहा कि कानून की भाषा पूरी तरह स्पष्ट है:“2023 के नियमों का नियम 21 यह प्रावधान करता है कि किसी भी परिस्थिति में छात्र को MBBS के प्रथम वर्ष (First Professional MBBS) के लिए 4 से अधिक प्रयासों की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम 4 प्रयासों की सीमा पूरे प्रथम वर्ष पर लगाता है, न कि अलग-अलग विषयों के आधार पर।” — बॉम्बे हाईकोर्ट
- पुराने नियमों में संशोधन या शब्दों के हटने का प्रभाव नहीं: अदालत ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि 1997 के नियमों के तुलनात्मक वाक्य हटने से नियम बदल गए हैं। कोर्ट ने कहा कि जब नियम 21 का अर्थ स्पष्ट है कि 1st Year के लिए केवल 4 अटेम्प्ट मिलेंगे, तो चाहे छात्र ने किसी एक परीक्षा में एक विषय दिया हो या दो, वह अवसर 1st Year MBBS के कुल 4 प्रयासों में ही गिना जाएगा।
- परीक्षा में बैठने को प्रयास माना गया: अदालत ने माना कि चूंकि छात्रा ने पहली यूनिवर्सिटी परीक्षा में फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री के पेपर दिए थे, इसलिए वह 1st Year MBBS का उसका पहला आधिकारिक प्रयास था। तदनुसार, वह 1st Year की कुल 4 परीक्षाएं दे चुकी है और 2023 के नियमों के तहत 5वें प्रयास का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के ‘ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस, 2023’ (GMER 2023) के नियम 21 की वैधानिक व्याख्या करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फर्स्ट प्रोफेशनल MBBS (प्रथम वर्ष) को उत्तीर्ण करने के लिए निर्धारित अधिकतम 4 प्रयासों (Four-Attempt Ceiling) की सीमा संपूर्ण प्रथम वर्ष की परीक्षा पर लागू होती है, न कि एनाटॉमी, फिजियोलॉजी या बायोकेमिस्ट्री जैसे अलग-अलग विषयों पर व्यक्तिगत रूप से।
न्यायमूर्ति आर.आई. छागला और न्यायमूर्ति फिरदौश पी. पूनीवाला की खंडपीठ ने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (MUHS) के खिलाफ दायर एक मेडिकल छात्रा की रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने एनाटॉमी विषय की परीक्षा में अतिरिक्त (पांचवां) अवसर दिए जाने की मांग की थी।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. नियम 21 का स्पष्ट व गैर-संदेहास्पद दायरा NMC के 2023 विनियमों के नियम 21 की व्याख्या करते हुए खंडपीठ ने कहा: “2023 के विनियमों का नियम 21 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि किसी भी परिस्थिति में छात्र को प्रथम वर्ष (फर्स्ट प्रोफेशनल MBBS) के लिए चार से अधिक प्रयासों की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नियम प्रथम वर्ष MBBS के लिए अधिकतम चार प्रयासों की सीमा तय करता है, न कि विभिन्न विषयों में किए गए अलग-अलग प्रयासों के आधार पर इसे सीमित करता है। ऐसी स्थिति में, छात्र को प्रथम वर्ष MBBS के केवल चार प्रयासों की ही अनुमति दी जा सकती है, चाहे उसने उन प्रयासों में से प्रत्येक में किसी भी विषय की परीक्षा दी हो।”
2. पुराने नियमों के शब्दों के हटने से 4-अटेम्प्ट की सीमा नहीं बदलती
- याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि 1997 के विनियमों (2019 में संशोधित) के नियम 11.2.7 में यह स्पष्ट लिखा था कि “विश्वविद्यालय परीक्षा में आंशिक उपस्थिति (Partial Attendance) को एक अवेल किया गया प्रयास माना जाएगा”, जिसे 2023 के विनियमों से हटा दिया गया है।
- इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा:“2023 के विनियमों से उक्त शब्दों का हटना नियम 21 के स्पष्ट शब्दों को नहीं बदलता। नियम 21 में प्रयुक्त शब्द पूरी तरह स्पष्ट हैं और प्रथम वर्ष के लिए अधिकतम चार प्रयासों को संदर्भित करते हैं। इसलिए केवल यह नहीं माना जा सकता कि जिस परीक्षा में छात्रा केवल अन्य विषयों में बैठी थी, वह प्रथम वर्ष का प्रयास नहीं कहलाएगा।”
3. न्यायिक नजीर की भिन्नता अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा उद्धृत राजकुमार सिंह बनाम अमरावती विश्वविद्यालय (1996) के फैसले को अलग बताते हुए स्पष्ट किया कि उस मामले में कम उपस्थिति और परिणाम में देरी के कारण छात्र परीक्षा में बैठ ही नहीं पाया था, जबकि वर्तमान मामले में छात्रा ने पहली बार में फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की परीक्षा वास्तविक रूप से दी थी।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (नीट-यूजी 2023 बैच का विवाद)
- प्रारंभिक आंतरिक मूल्यांकन: याचिकाकर्ता ने नीट-यूजी 2023 के माध्यम से फर्स्ट ईयर MBBS में प्रवेश लिया। आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) में वह फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में पास हुई, लेकिन एनाटॉमी में 2 अंकों से पिछड़ गई।
- पहला विश्वविद्यालय प्रयास (Attempt 1): नियमों के अनुसार आंतरिक मूल्यांकन पास न होने के कारण वह केवल फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की विश्वविद्यालय परीक्षा में बैठी और पास हुई, लेकिन एनाटॉमी में नहीं बैठ सकी (अनुत्तीर्ण घोषित)।
- पूरक एवं आगामी प्रयास (Attempts 2, 3 & 4):
- सप्लीमेंट्री परीक्षा में वह पहली बार एनाटॉमी में बैठी, लेकिन थ्योरी में 4 अंकों से फेल हो गई।
- इसके बाद उसने एनाटॉमी के लिए दो और प्रयास किए, जहां दोनों बार प्रैक्टिकल पास किया लेकिन थ्योरी में असफल रही।
- कॉलेज का इनकार और याचिका: जब छात्रा ने कॉलेज से एनाटॉमी में एक और अवसर मांगा, तो कॉलेज ने 4 प्रयास समाप्त होने का हवाला देकर मना कर दिया। छात्रा का तर्क था कि उसने एनाटॉमी की परीक्षा केवल 3 बार दी है, इसलिए वह चौथे प्रयास की हकदार है।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
- याचिका खारिज: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पाया कि छात्रा प्रथम प्रोफेशनल MBBS के चार अनुमेय प्रयास पहले ही समाप्त कर चुकी है, इसलिए NMC विनियमों के तहत उसे पांचवां प्रयास देने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
- विश्वविद्यालय को निर्देश देने से इनकार: MUHS को छात्रा की एनाटॉमी परीक्षा कराने का निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया गया।
विधिक विवरण
- प्रासंगिक कानून: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (GMER), 2023 का नियम 21
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (छात्रा) की ओर से: अधिवक्ता पूजा वी. थोरात
- प्रतिवादी (MUHS/कॉलेज) की ओर से: अधिवक्ता प्रसाद बी. कुलकर्णी
- पीठ: न्यायमूर्ति आर.आई. छागला और न्यायमूर्ति फिरदौश पी. पूनीवाला (बॉम्बे उच्च न्यायालय)
MBBS Study: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| पीठासीन पीठ | जस्टिस आर. आई. छागला एवं जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला |
| मुख्य विषय | MBBS First Professional में अधिकतम 4 अटेम्प्ट (Attempts) की सीमा का नियम |
| संबंधित कानून/नियम | NMC Graduate Medical Education Regulations, 2023 की Regulation 21 |
| संबंधित विश्वविद्यालय | महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (MUHS) |
| अदालत का निर्णय | याचिका खारिज; 4 अटेम्प्ट की सीमा पूरे 1st Year MBBS पर लागू मानी गई। |

