हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और टिप्पणी
- पुलिस के अधिकार क्षेत्र की सीमा:हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस प्रशासन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े तकनीकी व वैधानिक मामलों का फैसला करने के लिए अधिकृत निकाय नहीं है:“पुलिस प्राधिकरण यह तय करने के लिए उपयुक्त प्राधिकारी नहीं है कि उत्तरदाताओं द्वारा डेरी फार्म/इकाइयां कानून के अनुसार चलाई जा रही हैं या नहीं और क्या ऐसे डेरी फार्म चलाने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा हो रहे हैं।” — कलकत्ता हाईकोर्ट
- उपयुक्त मंच (Appropriate Forum):अदालत ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण या वाणिज्यिक गतिविधियों की वैधता से जुड़ी शिकायतों के निवारण के लिए विशेष वैधानिक निकाय (प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) मौजूद हैं, इसलिए पक्षकारों को वहीं गुहार लगानी चाहिए।
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियों, पर्यावरण प्रदूषण और पुलिस प्राधिकारियों के विधिक अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने 14 सितंबर 2026 के अपने आदेश में याचिकाकर्ता को संबंधित वैधानिक निकाय—पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB)—के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करने की छूट देते हुए रिट याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई डेयरी फार्म कानून के अनुसार चल रहा है या अनधिकृत है, अथवा उसके संचालन से स्वास्थ्य संबंधी खतरे (Health Hazards) और प्रदूषण पैदा हो रहा है या नहीं, इसका निर्णय करने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है। ऐसे मामलों के न्यायनिर्णयन और तकनीकी जांच के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही वैधानिक मंच है [अंगूरबाला मोंडल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं अन्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. पुलिस प्राधिकारी तकनीकी व पर्यावरण संबंधी मुद्दों के लिए सक्षम नहीं अदालत ने पुलिस की शक्तियों और पर्यावरण कानूनों के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा: “पुलिस प्राधिकारी यह निर्णय लेने के लिए उचित प्राधिकारी (Appropriate Authority) नहीं है कि प्रतिवादी संख्या 7 और 8 द्वारा डेयरी फार्म/इकाइयां कानून के अनुसार चलाई जा रही हैं या नहीं और क्या ऐसे डेयरी फार्मों के संचालन से स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा हो रहे हैं।”
2. उपयुक्त वैधानिक मंच (Appropriate Forum) की अनिवार्यता
- उच्च न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और अनधिकृत वाणिज्यिक इकाइयों के संचालन से होने वाले उपद्रव (Nuisance) के तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय नगर निकाय ही अधिकृत हैं।
- नागरिकों को ऐसे विवादों के समाधान के लिए पुलिस पर दबाव बनाने के बजाय सीधे संबंधित नियामक प्राधिकरणों से संपर्क करना चाहिए।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (डेयरी फार्म संचालन विवाद)
- याचिकाकर्ता के आरोप: याचिकाकर्ता (अंगूरबाला मोंडल) ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस को निजी प्रतिवादियों (प्रतिवादी संख्या 7 और 8) के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके डेयरी फार्मों को बंद कराने का निर्देश देने की मांग की।
- दावा: याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके निवास के ठीक बगल में बिना किसी वैध अनुमति और प्राधिकरण के अनधिकृत डेयरी फार्म चलाए जा रहे हैं, जिससे गंभीर दुर्गंध, गंदगी और स्वास्थ्य संकट पैदा हो रहा है।
- राज्य व निजी प्रतिवादियों का विरोध:
- राज्य सरकार और निजी प्रतिवादियों ने याचिका का कड़ा विरोध किया।
- प्रतिवादियों ने तथ्य रखा कि याचिकाकर्ता स्वयं भी उसी क्षेत्र में एक डेयरी फार्म संचालित कर रही है, अतः यह विवाद व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है।
- राज्य के वकील ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को लगता है कि फार्म नियमों का उल्लंघन कर रहा है और स्वास्थ्य के लिए खतरा है, तो उसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जाना चाहिए, न कि पुलिस में।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
- याचिका का निस्तारण (Disposed of): उच्च न्यायालय ने माना कि पुलिस को ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
- सक्षम फोरम में जाने की स्वतंत्रता: अदालत ने याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता (Liberty) दी कि वह अपनी शिकायतों के निवारण हेतु पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB) या संबंधित सक्षम स्थानीय प्राधिकारी के समक्ष वैधानिक आवेदन प्रस्तुत कर सकती है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: अंगूरबाला मोंडल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं अन्य [रिट याचिका (सिविल) – पुलिस निष्क्रियता एवं डेयरी फार्म विवाद]
- प्रासंगिक कानून: भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (रिट क्षेत्राधिकार); जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974; वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- संबद्ध नियामक निकाय: पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB)
- पीठ: न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य (कलकत्ता उच्च न्यायालय)
Health Hazards: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य (Justice Saugata Bhattacharyya) |
| मामला/पक्ष | अंगुरबाला मोंडल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य व अन्य |
| मुख्य विवाद | पड़ोस में बिना अनुमति डेरी फार्म चलाने और स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा करने की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई की मांग। |
| अदालत का फैसला | पुलिस के पास पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी आकलन का अधिकार नहीं; याचिकाकर्ता प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष शिकायत दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र। |

