बार एसोसिएशन द्वारा मांगी गई मुख्य राहतें
- अग्रिम नियुक्तियां: सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही नए उत्तराधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।
- स्वीकृत क्षमता में वृद्धि: NCLT के स्वीकृत सदस्यों की संख्या 63 से बढ़ाई जाए।
- e-Courts 2.0 का कार्यान्वयन: NCLT ई-कोर्ट्स 2.0 प्रणाली को तुरंत मंजूरी देकर लागू किया जाए।
- वकीलों के लिए सुविधाएं: बायोमेट्रिक एक्सेस, स्थायी पहचान पत्र और वकीलों व याचिकाकर्ताओं के लिए पर्याप्त वेटिंग एरिया का निर्माण किया जाए।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) में न्यायिक व तकनीकी सदस्यों की भारी कमी, लचर बुनियादी ढांचे और मुकदमों के बढ़ते अंबार को लेकर NCLT बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
बार एसोसिएशन ने जोर देकर कहा है कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के लागू होने के बाद एनसीएलटी का क्षेत्राधिकार और कार्यभार कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन अधिकरण को पर्याप्त न्यायिक शक्ति, स्थाई सहायक कर्मचारी और सुरक्षित बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने में विफलता से पूरी वाणिज्यिक न्याय प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। एसोसिएशन ने शीर्ष अदालत के स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले में एक हस्तक्षेप आवेदन (Intervention Application) दाखिल कर खुलासा किया है कि सदस्यों की घोर कमी और लगातार सेवानिवृत्ति के चलते अधिकरण की कम से कम 18 महत्वपूर्ण पीठें केवल आधे दिन (Half-Day Sittings) ही काम करने के लिए विवश हैं।
NCLT बार एसोसिएशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
1. सदस्यों की भारी कमी और 18 पीठों का आधा-दिन संचालन
- 63 की स्वीकृत क्षमता अपर्याप्त: अधिकरण की स्वीकृत सदस्य संख्या अभी भी केवल 63 (न्यायिक और तकनीकी मिलाकर) बनी हुई है, जो विशाल केसलोड को देखते हुए बेहद कम है।
- मौजूदा संख्याबल: 30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, अधिकरण में अध्यक्ष (President) सहित केवल 26 न्यायिक सदस्य और 25 तकनीकी सदस्य ही कार्यरत हैं।
- आधे दिन की सिटिंग्स: 24 अगस्त से प्रभावी रोस्टर का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने रेखांकित किया कि सेवानिवृत्ति और रिक्त पदों को समय पर न भरने के कारण देश भर में कम से कम 18 पीठें केवल आधे दिन की सुनवाई कर पा रही हैं।
2. दिल्ली सीजीओ कॉम्प्लेक्स (CGO Complex) में जर्जर बुनियादी ढांचा
- छत से पानी का रिसाव और असुरक्षित कोर्टरूम: नई दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स के ब्लॉक 3 की 8वीं मंजिल पर छत से भारी रिसाव के कारण सितंबर 2025 में कोर्टरूम पूरी तरह असुरक्षित हो गए थे। इसके कारण बेंच V और बेंच VI के पास कोई समर्पित कोर्टरूम उपलब्ध नहीं रहा और उन्हें आधे दिन की सिटिंग्स पर मजबूर होना पड़ा।
- ठप पड़ा रेनोवेशन: जनवरी 2025 में शुरू हुआ मरम्मत/रेनोवेशन कार्य अप्रैल 2025 में रोक दिया गया था, जो कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के साथ पत्राचार के बावजूद आज तक ठप पड़ा है। इसके अलावा कोर्टरूम्स का आकार छोटा होने और वकीलों व वादियों के लिए प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
3. स्थायी सपोर्ट स्टाफ का अभाव: 246 स्वीकृत पद अधर में
- एसोसिएशन ने कहा कि यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में NCLT और NCLAT के लिए 246 सहायक स्टाफ पदों के सृजन का विचार रखा था, लेकिन इनमें से एक भी पद को अब तक स्थायी रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
- अधिकांश कोर्ट मास्टर, बेंच ऑफिसर और सहायक कर्मचारी आज भी अस्थायी या संविदा (Contractual) व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक स्थिरता का अभाव है।
4. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की विफलता (DMS Outages)
- याचिका में शिकायत की गई है कि डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (DMS) के सर्वर में बार-बार तकनीकी खराबी (Frequent Outages) आती है।
- कई बार रिकॉर्ड तक पहुंच न होने के कारण अदालतों को मजबूरन सुनवाई टालनी पड़ती है, जिससे कॉरपोरेट विवादों के समयबद्ध निस्तारण का आईबीसी का मुख्य उद्देश्य ही परास्त हो रहा है।
बार एसोसिएशन द्वारा मांगी गई प्रमुख राहतें
- स्वीकृत संख्या में वृद्धि: NCLT के न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की स्वीकृत संख्या को वर्तमान 63 की सीमा से आगे बढ़ाया जाए।
- अग्रिम नियुक्तियां: सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने या सेवानिवृत्त होने से पहले ही उनके उत्तराधिकारियों (Successors) की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।
- पात्र सदस्यों की पुनर्नियुक्ति: योग्य व कुशल मौजूदा सदस्यों के कार्यकाल विस्तार/पुनर्नियुक्ति पर समय रहते विचार हो।
- 246 स्थायी पदों का संचालन: अदालती संचालन के लिए आवश्यक 246 सहायक स्टाफ पदों को तत्काल प्रभाव से नियमित और स्थायी बनाया जाए।
- परिसर सुधार और ई-कोर्ट्स 2.0: सीजीओ कॉम्प्लेक्स में मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा कराया जाए या वैकल्पिक सुरक्षित परिसर आवंटित किया जाए, वकीलों के लिए बायोमेट्रिक एक्सेस/स्थायी आईडी कार्ड लागू हों तथा प्रस्तावित NCLT e-Courts 2.0 प्रणाली को अविलंब मंजूरी दी जाए।
विधिक विवरण
- मंच: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
- कार्यवाही का स्वरूप: अधिकरणों में बुनियादी सुविधाओं व रिक्तियों से संबंधित स्वतः संज्ञान (Suo Motu) याचिका में हस्तक्षेप आवेदन (IA)
- प्रासंगिक कानून: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 408 से 419 (NCLT का गठन, अधिकारिता व संरचना); दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (IBC); भारत का संविधान – अनुच्छेद 14, 21 एवं अनुच्छेद 32 (त्वरित और सुलभ वाणिज्यिक न्याय का अधिकार)
- संबद्ध संवैधानिक सिद्धांत: * मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (सुप्रीम कोर्ट) — ‘ट्रिब्यूनलों को कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त, स्वतंत्र और बुनियादी ढांचे के मामले में पूर्णतः सक्षम होना चाहिए; रिक्तियों के चलते न्यायाधिकरणों को पंगु नहीं बनाया जा सकता।’
- आवेदक: एनसीएलटी बार एसोसिएशन (NCLT Bar Association)
Half-Day Court: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| याचिकाकर्ता | NCLT बार एसोसिएशन (NCLT Bar Association) |
| मूल मुद्दा | सदस्यों की कमी, आधा दिन काम करने वाली पीठें, और जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर |
| स्वीकृत पद (Sanctioned Strength) | कुल 63 पद (30 जून 2026 तक केवल 26 न्यायिक और 25 तकनीकी सदस्य कार्यरत) |
| मुख्य मांगें | सदस्यों की पूर्व नियुक्ति, स्वीकृत पदों में वृद्धि, और 246 स्थायी सपोर्ट स्टाफ पदों की बहाली |

