हाईकोर्ट का कानूनी विश्लेषण और मुख्य निर्देश
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सेवा नियमों और निष्पक्षता के सिद्धांतों का हवाला देते हुए राज्य सरकार को निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए:
- आपत्तियां मांगने के लिए सर्कुलर जारी हो: कोर्ट ने नगर प्रशासन और जल आपूर्ति (MAWS) विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वह सभी शहरी स्थानीय निकायों को एक विस्तृत परिपत्र (Circular) जारी करें। इसके माध्यम से पहले से प्रकाशित वरिष्ठता सूची पर अधिकारियों से आपत्तियां (Objections) मांगी जाएं और प्रामाणिक त्रुटियों (Genuine Errors) को सुधारा जाए।
- अनियमित पदोन्नतियों की समीक्षा और सुधार: खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में आदेश दिया:“यदि तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम व नियम 206 तथा 192A(5) और रोटेशन तय करने की नीति के विपरीत कोई भी पदोन्नति दी गई है, तो वरिष्ठता सूची में सुधार करके और ऐसी अनियमित पदोन्नतियों को रद्द/ठीक करने के लिए उचित कार्रवाई शुरू करके ऐसे मामलों की समीक्षा की जाए।”
- जनवरी 2025 की नई नीति वैध: अदालत ने राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2025 में जारी संशोधित पदोन्नति अनुपात और रोटेशन नीति (Revised Promotion Ratio and Rotation Policy) की वैधता को सही ठहराया और स्पष्ट किया कि भावी पदोन्नतियां इसी नीति व संशोधित वरिष्ठता सूची के अनुसार होंगी।
चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के सभी शहरी स्थानीय निकायों (शहरी निगमों, नगर पालिकाओं और चेन्नई नगर निगम सहित) में कार्यरत इंजीनियरिंग संवर्ग के अधिकारियों की वरिष्ठता निर्धारण, पदोन्नति में अवसर की समानता (संविधान के अनुच्छेद 16) और वैधानिक सेवा नियमों के अनुपालन पर एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति कृष्णसामी गोविंदराजन की खंडपीठ ने मई 2024 में शासनादेश (GO 287) के जरिए जारी की गई वरिष्ठता सूची और उसके बाद GO 57 के तहत दिए गए प्रमोशन आदेशों को चुनौती देने वाली कनिष्ठ, सहायक और सहायक कार्यपालक अभियंताओं की रिट याचिकाओं के बैच का निस्तारण करते हुए यह व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह सभी स्थानीय निकायों के अधिकारियों की इंटर-से वरिष्ठता सूची (Inter-se Seniority List) का पुनर्सत्यापन करे ताकि सहायक कार्यपालक अभियंता (AEE), कार्यपालक अभियंता (EE), अधीक्षण अभियंता (SE) और मुख्य अभियंता (CE) के पदों पर पदोन्नति के लिए सभी पात्र उम्मीदवारों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर मिल सके।
उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं निर्देश
1. ‘वैधानिक नियमों के विपरीत दी गई अनियमित पदोन्नतियां तुरंत सुधारी जाएं’: खंडपीठ अवैध और मनमाने प्रमोशनों पर सख्त रुख अपनाते हुए न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति कृष्णसामी गोविंदराजन की पीठ ने स्पष्ट व्यवस्था दी: “यदि तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम तथा नियम 206 और 192A(5) के प्रावधानों और रोटेशन तय करने की परिणामी सरकारी नीति के विपरीत कोई भी पदोन्नति प्रदान की गई है, तो ऐसे मामलों की भी इंटर-से वरिष्ठता सूची को सही करके समीक्षा की जानी चाहिए और अनियमित पदोन्नतियों (Irregular Promotions) को निरस्त/वापस लेने के लिए उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।”
2. आपत्ति दर्ज कराने के लिए सर्कुलर जारी करने का आदेश
- अदालत ने म्यूनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन एंड वॉटर सप्लाई (MAWS) विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों को एक औपचारिक परिपत्र (Circular) जारी करें।
- इस सर्कुलर के माध्यम से पहले से प्रकाशित वरिष्ठता सूची के खिलाफ सभी प्रभावित अधिकारियों और इंजीनियरों को अपनी विधिक आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।
- यदि आपत्तियों की जांच में कोई वास्तविक तथ्यात्मक या विधिक त्रुटि पाई जाती है, तो वरिष्ठता सूची को संशोधित और पुनर्गठित किया जाएगा।
3. जनवरी 2025 की संशोधित पदोन्नति अनुपात व रोटेशन नीति को वैधता
- उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2025 में जारी की गई संशोधित पदोन्नति अनुपात (Revised Promotion Ratio) और रोटेशन नीति (Rotation Policy) पूरी तरह वैध और विधिक सिद्धांतों के अनुरूप है।
- अदालत ने इस नीति में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए आदेश दिया कि भविष्य के सभी प्रमोशन और वरिष्ठता का पुनर्गठन इसी स्वीकृत नीति और वैधानिक नियमों के आधार पर संचालित होगा।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं याचिकाकर्ताओं की दलीलें
- शासनादेश GO 287 और GO 57 को चुनौती: राज्य सरकार ने मई 2024 में शासनादेश संख्या 287 के माध्यम से सभी स्थानीय निकायों के इंजीनियरिंग अधिकारियों की एक एकीकृत इंटर-से वरिष्ठता सूची जारी की थी। इसके आधार पर शासनादेश 57 के तहत विभिन्न उच्च पदों पर पदोन्नतियां दी गई थीं।
- इंजीनियरों का विधिक विरोध: चेन्नई नगर निगम (Greater Chennai Corporation) और विभिन्न नगर पालिकाओं में कार्यरत जूनियर इंजीनियर्स (JE), असिस्टेंट इंजीनियर्स (AE) और असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स (AEE) ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
- याचिकाकर्ताओं के मुख्य आरोप:
- मूल नियुक्ति तिथि की उपेक्षा: वरिष्ठता सूची तैयार करते समय तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम, 2023 (Tamil Nadu Urban Local Bodies Rules, 2023) का घोर उल्लंघन किया गया।
- मानकों का मनमाना प्रयोग: अधिकारियों की सेवा में नियमितीकरण (Regularisation) और मूल नियुक्ति की वास्तविक तिथि (Date of Original Appointment) जैसे प्राथमिक मानकों को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को वरिष्ठ बना दिया गया।
- असमान अवसर: वरिष्ठता निर्धारण में विसंगतियों के कारण पात्र और योग्य अधिकारियों को पदोन्नति के समान अवसर (Article 16) से वंचित कर दिया गया।
उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश
- वरिष्ठता सूची का पुनरीक्षण: सरकार को निर्देश दिया गया कि वह सभी स्थानीय निकायों की वरिष्ठता सूची की विधिक शुद्धता सुनिश्चित करे ताकि किसी भी संवर्ग में कोई असमानता या विसंगति शेष न रहे।
- आपत्ति निस्तारण तंत्र: सचिव (MAWS) एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सभी संबंधित अधिकारियों से आपत्तियां प्राप्त करेंगे और त्रुटियों को सुधारकर अंतिम संशोधित वरिष्ठता सूची जारी करेंगे।
- अनियमित प्रमोशन रद्द करना: जो पदोन्नतियां अधिनियम के नियम 206 और 192A(5) के विरुद्ध पाई जाएंगी, उन्हें नियमानुसार वापस (Undo) लिया जाएगा।
- याचिकाओं का निस्तारण: अदालत ने उपर्युक्त निर्देशों के साथ सभी रिट याचिकाओं का औपचारिक निस्तारण कर दिया।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: इंजीनियरिंग अधिकारीगण (याचिकाकर्ता) बनाम तमिलनाडु राज्य, सचिव MAWS एवं अन्य [रिट याचिकाओं का बैच – मद्रास उच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून एवं नियम: तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम, 1998 (संशोधित 2023); तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम, 2023 के नियम 206 एवं नियम 192A(5) (वरिष्ठता, संवर्ग वर्गीकरण एवं पदोन्नति रोटेशन); सरकारी आदेश GO Ms No. 287 (मई 2024) एवं GO 57; जनवरी 2025 की पदोन्नति अनुपात अधिसूचना; भारत का संविधान – अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- के. मेघचंद्र सिंह बनाम निंगम सिरो (2020, सुप्रीम कोर्ट) — ‘वरिष्ठता का निर्धारण उस तिथि से होना चाहिए जब किसी व्यक्ति की कैडर में विधिवत नियुक्ति हुई हो; वैधानिक नियमों की अनदेखी कर तैयार की गई वरिष्ठता सूची समानता के मौलिक अधिकार का हनन है।’
- मलविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य (सुप्रीम कोर्ट) — ‘यदि प्रशासनिक त्रुटि या नियमों के उल्लंघन में कोई गलत या अनियमित पदोन्नति दी जाती है, तो नियोक्ता प्राधिकारी को उसे सुधारने और पात्र व्यक्तियों के अधिकार बहाल करने का पूर्ण विधिक दायित्व है।’
- पीठ: न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति कृष्णसामी गोविंदराजन (मद्रास उच्च न्यायालय)
Promotion Ratio: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| पीठ (Judges) | न्यायमूर्ति एस. एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकवाड़ी |
| संबंधित विभाग | नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग (MAWS Department, Tamil Nadu) |
| संबंधित कानून/नियम | तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय नियम, 2023 (TN Urban Local Bodies Rules, 2023) |
| मुख्य मुद्दा | नगर निगमों/निकायों में इंजीनियरों की वरिष्ठता सूची में गलतियां और अवैध पदोन्नतियां |
| अदालत का निर्णय | आपत्तियां आमंत्रित कर नई सूची जारी करने का निर्देश; जनवरी 2025 की रोटेशन नीति को सही ठहराया |

